पाकिस्तान में फौजी भ्रष्टाचार

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मैं पाकिस्तान के कई राष्ट्रपतियों, प्रधानमंत्रियों और बड़े उद्योगपतियों के घरों में भी गया हूं लेकिन जो ठाठ-बाठ मैंने सेनापतियों और फौजियों के घरों में देखा, वैसा भारत के किसी फौजी के घर में नहीं देखा। इस वक्त जनरल क़मर बाजवा पाकिस्तान के सेनापति हैं। उनकी कुल निजी संपत्ति लगभग 500 करोड़ रु. की आंकी जा रही है। इसका पता तो उनके खिलाफ प्रचार कर रही एक वेबसाइट ने दिया है। यह भी एक कारण बताया जा रहा है, उनके स्वेच्छया सेवा-निवृत्त होने का! इसमें थोड़ी बहुत अतिशयोक्ति भी हो सकती है लेकिन इनकी तुलना ज़रा हमारे सेनापतियों से करें। वे बेचारे अपनी पेंशन पर किसी तरह गुजारा करते हैं।

ऐसी क्रूरता आती कहां से है ?

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आखिर परवरिश में ऐसी गलती कहां हो रही है कि नई पीढ़ी वास्तविक या तथाकथित प्यार के चक्कर में अपने माता-पिता तक के रिश्ते को नकारने किस सीमा तक चली जाती है? हमने कैसा समाज बना दिया है जहां हर कोई आप केंद्रित हो गया है? हर व्यक्ति यहां स्वयं को अकेला पाता है और अनेक समस्याओं की जड़ यही है। दूसरी ओर यह घटना नई पीढ़ी को भी अपने रवैये पर पुनर्विचार के लिए बाध्य करती है। जब श्रद्धा के पिता ने आफताब के साथ उसके संबंधों को स्वीकार नहीं किया तो उसने कहा कि मैं 25 वर्ष की हो गई हूं और अपना भला बुरा सोच सकती हूं। इसके बाद वह उसके साथ लिव-इन में रहने लगी। ऐसी लड़कियों की बड़ी संख्या है जो घोषित उम्र के साथ बालिग होने के बाद माता-पिता की सलाह मशविरा या सहमति के बिना इस तरह के कदम उठातीं हैं जिनकी परिणति भयावह होती है।

वीर सावरकर के आगे बौनी कांग्रेस और नेहरु-गाँधी

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दुर्भाग्य से सोनिया गांधी और राहुल गांधी के नेतृत्व वाली कांग्रेस ऐसे अतिवादी बुद्धिजीवियों और नेताओं के प्रभाव में आ गई जिनके लिए हिंदुत्व, उसकी विचारधारा के सभी नेता और संगठन दुश्मन हैं। भारत जोड़ो यात्रा के सलाहकार और रणनीतिकार भी यही लोग हैं। इसीलिए राहुल गांधी अपने भाषणों में कहते हैं कि एक और आरएसएस और सावरकर की विचारधारा है तो दूसरी ओर कांग्रेस की। वह तोड़ते हैं और हम जोड़ते हैं। यह भी कहते हैं कि भाजपा और आरएसएस के प्रतीक सावरकर हैं।

ईरान में हिजाब पर जन-आक्रोश

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जब से आयतुल्लाह खुमैनी का शासन (1979) ईरान में आया है, ईरानी महिलाओं का दम घुट रहा है। पहले भी दो बार इस तथाकथित इस्लामी शासन के खिलाफ बगावत का माहौल बना था लेकिन अमीनी का यह मामला इतना तूल पकड़ लेगा, इसका किसी को अंदाज भी नहीं था। कल-परसों तो फुटबाल के विश्व कप टुर्नामेंट में ईरान की टीम ने अपने राष्ट्रगीत को गाने से भी मना कर दिया था। ईरानी लोग अपनी इस टीम को राष्ट्रीय सम्मान का प्रतीक मानते हैं। हिजाब के विरोध ने आर्थिक कठिनाइयों में फंसे ईरान के कोढ़ में खाज का काम किया है। इस्लामपरस्त लोग भी खुले-आम कह रहे हैं कि कुरान शरीफ में कहीं भी हिजाब को औरतों के लिए अनिवार्य नहीं बताया गया है। भारत में चाहे हिजाब के लिए हमारी कुछ मुस्लिम बहनें काफी शोर मचा रही हैं लेकिन यूरोप के कई देशों ने तो उस पर प्रतिबंध लगा दिया है। 

स्वयं से संघर्षरत पाकिस्तान…

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इस्लाम के नाम पर बने इस देश का बड़ा जनमानस मजहबी जुनून में लगभग विक्षिप्त हो चुका है। पाकिस्तान में वर्ष 1967-2021 के बीच 1500 से अधिक ईशनिंदा के मामले दर्ज हुए है, जिसमें कई आरोपियों (मुस्लिम सहित) को न्यायिक प्रक्रिया के दौरान मजहबी भीड़ ने या तो मौत के घाट उतार दिया या फिर उनसे मारपीट की। हिंसा के साथ हिंदू और ईसाई आदि अल्पसंख्यकों का पाकिस्तान से अस्तित्व मिटाने, अर्थात— मजहबी दायित्व की पूर्ति के लिए भी ईशनिंदा कानून का दुरुपयोग किया जाता है। पाकिस्तानी संसदीय समिति के अनुसार, ईशनिंदा जनित हिंसा में शामिल 90 प्रतिशत लोगों की आयु 18-30 वर्ष होती है। बात केवल यही तक सीमित नहीं। पाकिस्तान में वर्ष 2001-2018 के बीच सांप्रदायिक हिंसा की घटनाओं में 4,847 शियाओं को सुन्नी कट्टरपंथियों द्वारा मौत के घाट उतार दिया गया। लगभग 20 लाख अहमदी मुसलमान पाकिस्तान में रहते हैं, जो 1974 में आधिकारिक रूप से गैर-मुस्लिम घोषित होने से पूर्व, बलात् घृणा का शिकार हो रहे है। यह सब पाकिस्तान के वैचारिक अधिष्ठान के अनुरूप है। 

त्रिपुरा के उनाकोटी पहाड़ों की रहस्यमयी मूर्तियां

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उनाकोटी को रहस्यों से भरी है, क्योंकि एक पहाड़ी इलाका है जो दूर-दूर तक घने जंगलों और दलदली इलाकों से भरा है। अब ऐसे में जंगल के बीच में लाखों मूर्तियों का निर्माण कैसे किया गया होगा, क्योंकि इसमें तो सालों लग जाते और पहले तो इस इलाके के आसपास कोई रहता भी नहीं था। यह लंबे समय से शोध का विषय बना हुआ है। उनाकोटि में दो तरह की मूर्तियों मिलती हैं, एक पत्थरों को काट कर बनाई गईं मूर्तियां और दूसरी पत्थरों पर उकेरी गईं मूर्तियां। जिनमें भगवान शिव, देवी दुर्गा, भगवान विष्णु, और गणेश भगवान आदि की मूर्तियां स्थित है। इस स्थान के मध्य में भगवान शिव के एक विशाल प्रतिमा मौजूद है, जिन्हें उनाकोटेश्वर के नाम से जाना जाता है।

उत्तर प्रदेश : पर्यटन से लगेंगे विकास के पंख

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प्रदेश सरकार की नई पर्यटन नीति बहुआयामी विकास को धार देने वाली है और यदि इसको सही ढंग से धरातल पर उतारा गया तो प्रदेश में धार्मिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन नई ऊर्चाइयों को छूने जा रहा है। पर्यटन को बढावा देने के लिए भी निवेशकों को विभिन्न योजनाओं  के अंतर्गत आकर्षित किया जा रहा है।  प्रदेश सरकार ने नई पर्यटन नीति में 22 नई गतिविधियों को जोड़ा है जिसमें बजट होटल, हेरिटेज होटल, स्टार होटल, हेरिटेज होम स्टे, इको टूरिज्म की ईकाइयां, कारवां टूरिज्म, यूनिट, प्रदर्शनी, तीर्थयात्रा, धर्मशालाएं, वेलनेस रिसार्ट, आल वेदर सीजनल कैंप, जलाशय, झील, वेलनेस टूरिज्म तथा  एडवेंचर टूरिज्म को भी शामिल कर लिया गया है। अब पर्यटन का विकास गांवों तक किया जायेगा। प्रत्येक गांव में किसी प्राचीन मंदिर, धरोहर व महापुरूषों से संबंधित स्थलों को चिन्हित करके उस गांव का भी विकास किया जाएगा। अमृत सरोवरों के माघ्यम से भी पर्यटन को बढ़ावा दिया जाएगा। 

ग्रामीण विकास के सहारे ही बनेगी ५ ट्रिलियन इकोनॉमी

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आज विश्व के लगभग सभी विकसित एवं विकासशील देश आर्थिक परेशानियों से जूझ रहे हैं। इन समस्त अर्थव्यवस्थाओं के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था को वैश्विक स्तर पर एक चमकते सितारे के रूप में देखा जा रहा है। भारतीय अर्थव्यवस्था में लगातार तेज गति से हो रहे सुधार के चलते आज भारत का नाम पूरे विश्व में बड़े ही आदर और विश्वास के साथ लिया जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय मौद्रिक फण्ड एवं विश्व बैंक जैसी वित्तीय संस्थाएं भी भारतीय अर्थव्यवस्था में अपनी अपार श्रद्धा जता चुकी हैं। इन वित्तीय संस्थानों का कहना है कि भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था का विकास बहुत ही मजबूती के साथ आगे बढ़ रहा है।

 हम ‘छात्र प्रतिज्ञा’ भूल तो नहीं रहे?

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समय के साथ पाठशाला, पाठ्यपुस्तकों में काफी परिवर्तन हुए | लेकिन छात्र प्रतिज्ञा हमेशा से ही हमारे शालेय जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रही है | कहते हैं, बच्चे कच्ची मिट्टी की तरह होते हैं, उन्हें जो आकार दिया जाए वे उसमें ढल जाते हैं | छात्र प्रतिज्ञा के कारण ये कच्ची मिट्टी के घडे, मानसिक रूप से परिपक्व होते हैं | और इसके एक एक शब्द का अर्थ समझने पर वे देश के और देशवासियों के और करीब आते हैं | लेकिन धीरे धीरे समाज में फैल रहे इस धर्म और जाती के आधार पर हो रहे भेदभाव और ‘लव्ह जिहाद’ और ‘धार्मिक कट्टरता’ जैसी बुराईयों से जन्मी नफरत ने कहीं ना कहीं हमारी इस प्रतिज्ञा को ठेस पँहुचाई है | और आज हम इसके मायने भूलते चले जा रहे हैं |

पुल गिरने से पहले संकेत देगा स्मार्टफ़ोन

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वैसे तो शासन-प्रशासन द्वारा समय-समय पर पुराने पुलों की मजबूती विशेषज्ञ इंजीनियरों, तकनीशियनों द्वारा निर्धारित की जाती है, फिर भी लापरवाही और सटीक जानकारी नहीं मिल पाने के कारण कभी-कभी चूक हो जाने के कारण समय पर उनकी मरम्मत नहीं हो पाती। जिसके कारण मोरबी जैसी दुर्घटनाओं के चलते बड़ी संख्या में मौतें होती हैं।  आशा की जाती है कि इन शोधकर्ताओं द्वारा स्मार्टफोन के माध्यम से विकसित इस तकनीक से नए और पुराने विशेषतया जोखिम भरे जर्जर पुलों की कंपन अर्थात मोडल फ्रीक्वेंसीज़ की वास्तविक स्थिति की पहचान हो जाने और समय पर मरम्मत करने से उन्हें दुर्घटनाग्रस्त होने से बचाने के साथ-साथ बड़ी संख्या में लोगों के जीवन को बचाया जा सकेगा। अतः, इस तकनीक को और विकसित करने तथा दुनिया भर में सुलभ बनाने की आवश्यकता है।

प्यार, धोखा, षड्यंत्र और 35 टुकड़े

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एक प्रेमी ने अपनी प्रेमिका को 35 टुकड़ों में काटकर बेरहमी से मार डाला, यह न केवल प्यार करने वाले युवक-युवतियों के रोंगटे खड़े कर देने वाली घटना है, बल्कि यह प्रेम के नाम पर लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले आधुनिक शगल से जुड़ा चिंतनीय बिंदु भी है। प्रेम अंधा होता है। इसलिए यह न तो उम्र देखता है और न ही धर्म-जाति-संप्रदाय। यह कब और किसी से भी हो सकता है। राह चलते होने वाला प्रेम मंजिल तक ठीकठाक पहुंचने से पहले ही दम तोड़ दे, तो सोचनीय है कि यह प्रेम है या क्षणिक आकर्षण।

आर्थिक विकास : अगली पूरी सदी ही भारत की होगी

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भारतीय अर्थव्यवस्था का आकार वर्तमान स्तर 3.50 लाख करोड़ अमेरिकी डॉलर से बढ़कर वर्ष 2031 तक 7.5 लाख करोड़ अमेरिकी डॉलर के स्तर पर पहुंच जाएगा और इस प्रकार भारतीय अर्थव्यवस्था अमेरिका एवं चीन के बाद  विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था होगी। इसी प्रकार, भारत का पूंजी बाजार भी अपने वर्तमान स्तर 3.5 लाख करोड़ अमेरिकी डॉलर पर 11 प्रतिशत की, चक्रवृद्धि की दर से, वार्षिक वृद्धि दर्ज करते हुए अगले 10 वर्षों में 10 लाख करोड़ अमेरिकी डॉलर के स्तर पर पहुंच जाएगा। भारत में घरेलू मांग के लगातार मजबूत होने से एवं भारत में डिजिटल  क्रांति के कारण भारतीय नागरिकों की आय में बहुत अधिक वृद्धि होने की सम्भावना के चलते वैश्विक अर्थव्यवस्था के विकास का पांचवा हिस्सा भारत से निकलेगा, ऐसी सम्भावना व्यक्त की जा रही है।

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