हर पल खुशियों को तलाशने से बनेगा बेहतर जीवन

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प्रसन्नता का अर्थ हर व्यक्ति के लिए अलग-अलग हो सकता है। बावजूद इसके लोक कल्याणकारी राज्य की परिकल्पना हमारे संविधान में की गई है। ऐसे में जब हम बात लोक- कल्याण की करते हैं। फ़िर स्वतः ही प्रसन्नता का सूचक शब्द प्रस्फुटित हो जाता है। वैसे प्रसन्नता के मायने भले…

युवाओं को क्यों पड़ रहा दिल का दौरा (Heart attack)

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आप ने अक्सर देखा होगा कि एक युवा जो पूरी तरह से फिट नजर आता है जिम कर के उसकी बॉडी भी शानदार नजर आती है फिर अचानक से एक दिन पता चलता है कि उसे दिल का दौरा पड़ा और उसकी मौत हो गयी जबकि हमारी पहले से यह…

भारी बारिश ने मचाया कहर, लोग पलायन करने को मजबूर

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देश में बारिश का कहर जारी है पिछले करीब 3 दिनों से लगातार बारिश हो रही है हालांकि इस बारिश से मुंबई और दिल्ली का हाल थोड़ा खराब है। दिल्ली में जहां जल जमाव से सड़कें रुक गयी है तो वहीं मुंबई में भी भारी बारिश की वजह से लोग अपने…

नौकरशाही में उलझे प्रदूषण के नियम

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केंद्र सरकार ने २०१५ के कड़े प्रदूषण नियमों को बदल कर उनमें ढील दे दी है. यह तो प्रदूषण पर आगे बढ़ने के बजाय पीछे लौटना हुआ. अतः २०१७ में संशोधित नियमावली को कचरे के डिब्बे में डाल कर २०१५ के मानकों को ही आदर्श के रूप में स्थापित कर उनका कड़ाई से पालन किया जाना चाहिए.

आओ! जीवन का विश्वास जगाएं

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अमेरिका के लास वेगास में जो नरसंहार हुआ वह सिहरन पैदा करता है। इक्कीसवीं सदी के दूसरे दशक का उत्तरार्द्ध हमें सचेत कर रहा है कि अब भी समय है कि हम इस भस्मासुरी प्रवृत्ति से बचें और सनातन जीवन मूल्यों को आत्मसात करते हुए विज्ञान और टेक्नालाजी से प्राप्त सुविधाओं और संपन्नता का सम्यक तथा संतुलित उपयोग और उपभोग करें। पिछले दिनों एक दिल दहला देने वाला समाचार दुनिया के सब से समृद्ध और सभ्य कहे जाने वाले देश अमेरिका से आया। वहां के एक शहर लास वेगास में एक संगीत समारोह चल रहा था। १४०००० लोग उस समारोह का आनंद

गुमराह होती जिंदगियां

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मृत्यु कैसी भी हो, उसमें एक समानता यह होती है कि वह जीवन का अन्त कर देती है । हर मृत्यु के कारण उत्पन्न वेदना अलग‡अलग तीव्रता की होती है ।

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