महाराष्ट्र का विकास हिंदीभाषियों के साथ

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मायानगरी मुंबई की खासियत है कि यहां जो आता है, यहीं का होकर रह जाता है। उत्तर भारतीय भी यहां की आबोहवा में इतने विलीन हो चुके हैं कि परायापन कब विदा हो चुका यह उन्हें भी पता नहीं चला। मुंबई ने उन्हें बहुत कुछ दिया और उन्होंने भी मुंबई को अपनी मेहनत से खूब दिया। शेष महाराष्ट्र में भी इससे जुदा स्थिति नहीं है।

जनप्रतिनिधि हूं, जनता के लिए लडूंगा ही

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बोरीवली, मुंबई के भाजपा सांसद श्री गोपाल शेट्टी ‘उद्यान सम्राट’ माने जाते हैं। उन्होंने विभिन्न राष्ट्र पुरुषों के नाम पर विभिन्न उद्यान बनवाए और जनता में राष्ट्रीय विचारों का संदेश पहुंचाया। उनके इस कार्य के कारण कुछ असामाजिक तत्व परेशान हैं और अदालतबाजी के जरिए उन्हें प्रताड़ित करने की कोशिश…

प्लास्टिक का दानव

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    प्लास्टिक का कूड़ा भारत ही नहीं विश्व के लिए समस्या बना बैठा है और उससे निजात पाने के लिए विभिन्न कदम उठाए भी जा रहे हैं, लेकिन अभी माकूल विकल्प मौजूद नहीं है। यदि पर्यावरण को बचाना है तो इस दानव से मुक्ति का मार्ग खोजना ही होगा।

दीक्षा नेकी और पवित्रता की मिसाल

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प्रसिद्ध सेवाभावी संस्था ‘समस्त महाजन’ के गिरीशभाई शाह के भतीजे 24 वर्षीय ‘मोक्षेस’ ने जैन मुनि की हाल में दीक्षा ली। प्रस्तुत है मोक्षेस के सनदी लेखाकार (सीए) से मुनि बनने तक के सफर पर उनसे हुई बातचीत के महत्वपूर्ण अंश-

जुनून का धनी महान वैज्ञानिक स्टीफन हाकिंग

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असाध्य बीमारी से बेहद विकलांग बन चुके स्टीफन हाकिंस अपनी पीएच.डी. तक पूरा करने की स्थिति में नहीं थे, लेकिन अपनी जिजीविषा के बल पर उन्होंने ब्लैक होल तथा बिग बैंग थ्योरी को समझने में अहम भूमिका अदा की। यही क्यों, 14 मार्च को मृत्यु के समय तक उनके पास 12 मानद डिग्रियां और अमेरिका का सब से उच्च नागरिक सम्मान था।

अवांछित एनजीओ और सरकारी सख्ती

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अगर इन चारों की विवेचना करें तो तीनों सजीव सेवा क्षेत्र के अंतर्गत आते हैं| पर पुरनियों ने तीनों से ही संभल कर रहने की बात कही है| अर्थात् जीव सेवा के साथ ही साथ उन संक्रमणों से भी बचने की बात पर जोर दिया गया है जो समाज के मेरुदंड को तहस-नहस कर सकते हैं| दुनिया भर के धर्मशास्त्र व ऐतिहासिक तथा साहित्यिक रचनाकर्म बताते हैं कि मानव सेवा की परंपरा की ही तरह उसके नाम पर की जाने वाली धोखाधड़ी का इतिहास भी लगभग उतना ही पुरातन है|

‘रुग्ण नारायण’ का बसेरा सेवाधाम आश्रम

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’‘मानव तन खासकर रुग्ण, वंचित, बहिष्कृत, संक्रामक रोगों से ग्रसित जन की सेवा ही सर्वोपरि कही जा सकती है; क्योंकि सेवक और सेवित दोनों के संतुष्ट होने पर ही सेवा सार्थक मानी जा सकती है। ईश्‍वर भी आपसे तभी प्रसन्न होगा जबकि आप प्राणी सेवा के प्रति सजग हैं।

शुचिता चिंतन

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अंतरात्मा की प्रेरणा का सबब कही जा सकने वाली स्वच्छ जीवन पद्धतियों का अनुसरण व मार्गदर्शन प्राप्त करने की दिशा में निरंतर प्रयासरत रहना ही सफल मानव जीवन का भाव है। जीवन के हर क्षेत्र में शुचिता के बिना यह संभव नहीं है।

नौकरशाही में उलझे प्रदूषण के नियम

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केंद्र सरकार ने २०१५ के कड़े प्रदूषण नियमों को बदल कर उनमें ढील दे दी है. यह तो प्रदूषण पर आगे बढ़ने के बजाय पीछे लौटना हुआ. अतः २०१७ में संशोधित नियमावली को कचरे के डिब्बे में डाल कर २०१५ के मानकों को ही आदर्श के रूप में स्थापित कर उनका कड़ाई से पालन किया जाना चाहिए.

‘माय होम इंडिया’ का पूर्वोत्तर में अलख

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पूर्वोत्तर में, विशेष रूप से त्रिपुरा में, आई राजनीतिक बयार ने वहां भाजपा और राष्ट्रवादी विचारों को बल प्रदान करने वाला माहौल पैदा किया है. केंद्र में श्री नरेंद्र मोदी की नई सरकार आने के बाद वहां लोगों का आत्मविश्वास बढ़ा है. प्रस्तुत है, त्रिपुरा की जमीनी हकीकत और समग्र पूर्वोत्तर के लिए समर्पित रूप से काम कर रही ‘माय होम इंडिया’ के श्री सुनील देवधर से हुई विशेष बातचीत के महत्वपूर्ण अंशः

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर सार्थक विहंगम दृष्टि

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वैसे तो ‘संघ’ शब्द के कई पर्याय हैं; मसलन वृंद, समुदाय, समूह, गण, झुंड इत्यादि। पर इस शब्द का प्रयोग करने पर सबसे पहली जो तस्वीर हम सबकी आंखों में आती है, वह है भगवा ध्वज तले सफेद व खाकी पहिरावे में ‘नमस्ते सदा वत्सले...’ की मधुरिमा से आलोकित स्वयंसेवकों का समूह जो निःस्वार्थ भाव से जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में अपने आपको समर्पित करते हुए राष्ट्र भावना को सार्थकता प्रदान करते हैं। अपने प्रवास के ९ दशकों में तमाम कठिनाइयों, दबावों तथा प्रतिबंधों को परे करते हुए विश्व का सबसे बड़ा स्वयंस

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