भारत की अफगान नीति उपयुक्त और व्यवहारिक

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भारत की अफगानिस्तान और तालिबान संबंधी नीतियों को लेकर जिस तरह के दुष्प्रचार और अफवाह बार-बार सामने आ रहे हैं उनसे आम भारतीय के अंदर भी कई प्रकार की आशंकाएं पैदा हो रही है। सोशल मीडिया पर सबसे बड़ा प्रचार यह हुआ कि भारत ने तालिबान को मान्यता दे दिया।…

गोरे व्यक्ति का बोझ और आतंकवादी, सरीखे ही

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तालिबानियों को समाप्त करने का लक्ष्य लेकर अमेरिका 20 वर्ष पूर्व अफगानिस्तान में दाखिल हुआ। परंतु 20 वर्ष बाद उन्ही तालिबानियों के हाथों अफगानिस्तान को सौंपकर अमेरिकी सेना स्वदेश वापस लौट गई है। इससे अमेरिका की विश्वसनीयता और प्रतिष्ठा पर अनेक प्रश्न चिन्ह लग गए हैं। उनकी चर्चा हो रही…

तालिबान से बढ़ी भारत की चुनौतियां

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A Taliban fighter looks on as he stands at the city of Ghazni, Afghanistan August 14, 2021. REUTERS/Stringer NO RESALES. NO ARCHIVES
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भारत के संदर्भ में विचार करें तो अफगानिस्तान में तालिबान के हाथों सत्ता आने से केवल उसकी आंतरिक राजनीति नहीं बदली बल्कि पूरे क्षेत्र की भू -राजनीतिक -सामरिक स्थिति व्यापक रूप से परिवर्तित हो गई है ? केवल भारतीय ही नहीं, विश्व भर में शांति के लिए समर्पित सभी देशों के वासी अफगानिस्तान…

दुनिया के लिए अतंकवादी खतरा तालिबान

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Taliban fighters stand over a damaged police vehicle along the roadside in Kandahar on August 13, 2021. (Photo by - / AFP)
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अफगानिस्तान का पूरा परिदृश्य विचलित और आतंकित करने वाला है ।  एक घोषित मजहबी आतंकवादी संगठन सशस्त्र संघर्ष करते हुए  पूरे देश पर आधिपत्य जमा ले, निर्वाचित व विश्व द्वारा मान्यता प्राप्त सरकार को सत्ता छोड़ने के लिए मजबूर कर दे और विश्व समुदाय मूकदर्शक बना देखता रहे सामान्यतः इस…

नेतृत्व विहीन अफगानिस्तान

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तालिबानी की विजय की खबर आने के बाद मलाला युसुफज़ई ने ट्वीट किया, ‘अफगानिस्तान पर तालिबान का नियंत्रण होने से हम स्तब्ध हैं। मुझे स्त्रियों, अल्पसंख्यकों और मानवाधिकार-समर्थकों को लेकर चिंता है। वैश्विक, क्षेत्रीय और स्थानीय शक्तियों को चाहिए कि वे फौरन युद्धविराम कराएं, जरूरी मानवीय सहायता मुहैया कराएं और शरणार्थियों तथा नागरिकों की हिफाजत करें।’ मलाला युसुफज़ई कौन है?वही जिसे तहरीके तालिबान ने इसलिए गोली मारी थी, क्योंकि वह पढ़ना चाहती थी और लड़कियों की पढ़ाई की समर्थक थी।

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