दि. १३-२० जुलाई साप्ताहिक अंक

हिंदी विवेक के इस अंक में मोस्टवांटेड अपराधी विकास दुबे के इंकाउंटर पर आवरण कथा लिखी गई है. जिसमें ‘जालिमों का यही अंजाम होगा’, ‘गुंडों को पनाह देती राजनीति’ और ‘खाकी, खादी, क्राईम का काकटेल’, ‘न सुनवाई, न अपील, सीधे फैसला’ नामक शीर्षक से प्रकाशित आलेख एवं सम्पादकीय हमारे सिस्टम में व्याप्त अपराध पर कुठाराघात करते है और बदलाव व सुधार की मांग करते है. चीनी घुसपैठ और डरकर उसका पीछे हटना, नेपाल में चीनी ड्रैगन का शिकंजा नामक आलेख में चीन के षड्यंत्र और भारत के आक्रामक रणनीतिक जवाब का विश्लेषण किया गया है. मीडिया के उन लिबरलों से रहे सतर्क, में फेक न्यूज़ के वामपंथी सिपहसालार पत्रकारों की पोल खोली गई है तथा ‘कोरोना वैक्सीन का है सबको इंतजार’ में दुनियाभर में बनाई जा रही वैक्सीन के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई है. इसके अलावा ‘चल रे कावंरिया शिव के धाम’ में कावड़यात्रा के महत्व और भारत के सांस्कृतिक, धार्मिक सामाजिक एकता के सरोकार सहित वैज्ञानिक पहलु पर भी प्रकाश डाला गया है.

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