बीजेपी की जंग: कोरोना, महंगाई और चुनाव

बीजेपी फिलहाल में देश की सबसे बड़ी पार्टी है और लगातार सबसे अधिक चुनाव जीतने का रिकार्ड भी उसके पास है। बीजेपी में मोदी और शाह की जोड़ी का कमाल देश की जनता 2014 से देख रही है और विकास की तेज रफ्तार भी सभी को नजर आ रही है लेकिन अब बीजेपी के लिए मुश्किलें धीरे धीरे बढ़ती जा रही है। विपक्ष हजारो सवालों के साथ पहले से ही खड़ा था कि कोरोना और उसके बाद बढ़ती महंगाई ने बीजेपी का रास्ता और कठिन कर दिया है। इसके साथ ही आगामी कुछ महीनों में विधानसभा के चुनाव भी होने वाले है। ऐसे में बीजेपी के सामने चुनाव जीतना एक बड़ी चुनौती है। देश की जनता का एक बड़ा सीधा हिसाब होता है कि वह पुराने कार्यों को बहुत जल्दी भूल जाती है वह चाहे अच्छे हों या फिर बुरे, चुनाव के समय जो भी नजर आता है अक्सर उसके हिसाब से ही वोट डाले जाते हैं। 
 
आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए बीजेपी की तरफ से तैयारी शुरु हो चुकी है और हाल ही 100 करोड़ लोगों के टीकाकरण के साथ इसका आगाज किया गया है। इस बात से कतई इंकार नहीं किया जा सकता है कि बीते 7 वर्षो में बीजेपी ने काम नहीं किया है। कश्मीर से धारा 370 को खत्म करना और अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण बीजेपी के बड़े काम हैं जो हिन्दूवादी विचारधारा के लिए वोट का कारण बनेंगे लेकिन फिर भी बीजेपी के सामने 5 राज्यों के विधानसभा चुनाव हैं जिसे वह हल्के में लेने की गल्ती नहीं कर सकती है। वैसे राजनीतिक विश्लेषक प्रशांत किशोर ने एक साक्षात्कार में कहा था कि अभी बीजेपी को सत्ता से बाहर करने का विपक्ष का सपना पूरा नहीं होगा। बीजेपी दशकों तक सत्ता में रहेगी और राहुल गांधी का बीजेपी को बाहर करने का सपना अभी पूरा नहीं होगा। 
 
कोरोना काल में अर्थव्यवस्था को बहुत नुकसान हुआ जिससे बाजार में मंदी आ गयी। भारी संख्या में लोग बेरोजगार हुए और व्यवसाय करने वालों को भी भारी नुकसान से गुजरना पड़ा। करीब एक साल बाद कड़े नियमों के साथ बाजार खुलने शुरु हुए और अर्थव्यवस्था की गाड़ी पटरी पर आने लगी लेकिन अचानक से बाजार खुलने से मांग बढ़ी और ज्यादातर सामानों के दाम बढ़ गये जिससे महंगाई की मार सभी पर पड़ने लगी। अब सरकार के लिए भी यह एक बड़ी चुनौती हो गयी है क्योंकि आगामी चुनाव को देखते हुए महंगाई पर तेजी से काबू करने की जरुरत है। अगर महंगाई पर काबू नहीं किया गया तो सरकार को इसकी कीमत आगामी चुनाव में चुकानी पड़ सकती है इसलिए सरकार कोई भी रिक्स नहीं लेना चाहती है और उदाहरण के तौर पर हाल ही में केंद्र सरकार की तरफ से तेल के दामों में कमी की गयी है इसके साथ ही बीजेपी शासित राज्यों में वैट में कटौती कर आम लोगों को पेट्रोल और डीजल के दाम में बड़ी राहत दी गयी है। पेट्रोल और डीजल के दामों में पिछले काफी समय से बढ़ोत्तरी देखने को मिल रही है जिससे ढुलाई के दाम बढ़ने से प्रतिदिन जरुरत के सामान के दाम बढ़ गये थे नतीजा आम जनता की जेब पर इसका प्रभाव पड़ने लगा था लेकिन केंद्र की तरफ से मिली राहत के बाद इस पर कुछ हद तक लगाम लग गया। 
 
अब बीजेपी की तरफ से यह कोशिश जारी है कि आगामी चुनाव से पहले महंगाई पर रोक लगाई जाए और देश की जनता को यह फिर से विश्वास दिलाया जाए कि बीजेपी के शासनकाल में सभी का विकास संभव है। हालांकि मोदी-शाह की जोड़ी पर भी संदेह नहीं किया जा सकता है क्योंकि इन दोनों की जोड़ी ने कई बार कमाल किया है और उस राज्य मे भी सरकार बनाई जहां की कभी उम्मीद भी नहीं की जाती थी। 5 राज्यों के चुनाव में उत्तर प्रदेश का विधानसभा चुनाव सबसे अधिक महत्तवपूर्ण होगा क्योंकि उसके आधार पर ही लोकसभा चुनाव का रास्ता तैयार होगा और आम जनता मूड भी समझ आयेगा। फिलहाल अगर देश की जनता का मूड देखा जाए तो पेट्रोल-डीजल के दाम और महंगाई के अलावा सरकार के बाकी फैसलों से जनता खुश हैं तो अधिकतम यह उम्मीद की जाती है कि आगामी चुनाव में फिर से बीजेपी विजयी पार्टी बनेगी।  

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