छठ पूजा का महत्व

*यह पूर्णरूप से प्रकृति की पूजा है, जिस प्रकृति से हम सबका जीवन चलता है।

*वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित पूरे संसार में ऊर्जा के स्रोत भगवान भास्कर की आराधना की जाती है।

*उगते सूर्य की पूजा तो सब करते है, इस पर्व में डूबते सूर्य की भी पूजा की जाती है।

*यह पर्व किसी भी जाति व सम्प्रदाय के बंधन से मुक्त है। इसे हर कोई कर सकता है। अब मुस्लिम भक्त भी इस पर्व को करते है।

*यह सामाजिक सहजीविता का अनुपम उदाहरण है। इसमें प्रयुक्त होने वाले कुछ वस्तु डोम यानि दलित के घर से भी आते है।

*इसमें अमीर-गरीब, स्त्री-पुरुष, बच्चे-बूढ़े , ऊंच-नीच किसी का भेद नहीं है।

*छठी मैया की पूजा प्रकृति में उपलब्ध सामान्य वस्तु केला, नींबू, बैगन, मूली, गन्ना, फल, गुड़ व दूध से बनी वस्तुओं से होती है। कोई कीमती चढ़ावा नहीं।

*स्वच्छता व पवित्रता का सबसे अधिक ध्यान रखा जाता है।

*इसमें किसी पंडित – पुरोहित या किसी तंत्र-मंत्र की जरूरत नहीं है।

*इसमें भक्त व भगवान के बीच सीधा संवाद है,- आत्मा से परमात्मा का सीधा सम्पर्क बिना किसी के मदद के। यह पवित्र मन से पूर्ण समर्पण का पर्व है।

इस पर्व को 70 साल तक उम्र के लोग करते है। करीब 3 दिन का निर्जला उपवास के बाद सुबह 4 बजे से भींगे बदन ठंडे पानी में ठंड के मौसम में करीब 2 घण्टे पानी में खड़े होकर भगवान सूर्यदेव व छठी मैया की आराधना करते है, लेकिन आज तक कहीं किसी के भी सर्दी-जुकाम तक होने की शिकायत नहीं मिली।

यह है छठी मैया व सूर्य देव के पूजा का महत्व। साक्षात प्रमाण है इनके शक्ति का।  छठी मैया आप सब का कल्याण करें और आप सब भी इस पावन पर्व में जरूर शामिल हो, इस पूजा की शुरुआत करें अगर अब तक नहीं करते है तो।

जय छठी मैया। ॐ भास्कराय नमः।

 

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