बीज बना वटवृक्ष उत्तरांचल मित्र मंडल, भायंदर

उत्तरांचल मित्र मंडल एक सामाजिक संस्था है। सन 2003 में कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं की सोच से इस संस्था का जन्म हुआ और 19 नवंबर 2005 को कुछ बुद्धिजीवियों के प्रयास से संस्था का पंजीकरण किया गया। भायंदर शहर में हम उत्तराखंडी प्रवासी बिखरे हुए थे, एक दूसरे के प्रति अनजान थे, इस मंडल के माध्यम से सभी उत्तराखण्डियों को एक प्लेटफॉर्म पर लाने का प्रयास किया गया। उत्तराखंड विशेषतः दो प्रान्तों में बंटा हुआ है, गढ़वाल तथा कुमांऊं। मंडल के माध्यम से यही प्रयास रहा है कि हम प्रान्त से हटकर सिर्फ उत्तराखंडी कहलाएं और काफी हद तक यह प्रयास सफल भी रहा। समय ने करवट बदली और 16 वर्ष पहले उत्तरांचल मित्र मंडल नाम का जो बीज हमने बोया था, आज वह 500 से भी अधिक टहनियों वाले पेड़ के रूप में हमारे बीच मजबूती से खड़ा है।

उत्तरांचल मित्र मंडल, भायंदर द्वारा कई सामाजिक कार्य किए गए चाहे वो शैक्षणिक जगत में हो, चाहे सामाजिक जगत में हो या फिर चिकित्सा जगत में हो। इन कामों को पूर्ण करने के लिए मंडल सदा अग्रणी रहा है। सन 2013 की भयंकर उत्तराखंड आपदा में भी मंडल ने प्रमुख भूमिका निभाई थी। अपनी जान जोखिम में डालकर कुछ सदस्यों द्वारा उत्तराखंड जाकर पीड़ितों की यथा संभव मदद की गई। वर्ष में एक बार अपनी सभ्यता एवं संस्कृति को कायम रखने हेतु उत्तराखंडी कार्यक्रमों के आयोजन का प्रयास किया जाता है। समय-समय पर स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए चिकित्सा शिविरों  का भी आयोजन किया जाता है। शैक्षणिक जगत में आर्थिक रूप से पिछड़े बच्चों की यथासंभव मदद करने का प्रयास भी किया जाता है। भविष्य में भी ऐसे अनेक कार्यों को सफल करने का संकल्प किया गया।

 

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