सतर्क रहें तो तीसरी लहर नहीं बरपा सकेगी कहर

भारत में कोरोना संक्रमण की रफ्तार एक बार फिर भयावह गति से बढ़ने लगी है और एक दिन में 1लाख 80000 से अधिक मामले सामने आने के बाद अब यह माना जा रहा है  कि देश में कोरोना की तीसरी लहर दस्तक दे चुकी है। दक्षिण अफ्रीका में मिला कोरोना का नया वैरिएंट ओमिक्रान भारत में 27 राज्यों में पांव पसार चुका है और यह यह आंकड़ा रोज ही बढ़ता जा रहा है।  पश्चिम बंगाल , महाराष्ट्र, और  दिल्ली में कोरोना संक्रमण की रफ्तार अब डराने लगी है । सुप्रीम कोर्ट के चार न्यायाधीश,  दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और भाजपा सांसद मनोज तिवारी के साथ ही महाराष्ट्र सरकार के दस मंत्री और बीस विधायक , मध्यप्रदेश सरकार के दो मंत्रियों सहित अनेक वरिष्ठ राजनीतिक नेता  और देश के कई अस्पतालों के चिकित्सक , स्वास्थ्य कर्मी भी कोरोना संक्रमित हो चुके हैं।

कोरोना  के नए वैरिएंट ओमिक्रान से संक्रमित होने वाले लोगों की संख्या भी देश में लगभग चार हज़ार तक पहुंच चुकी है यद्यपि राहत की बात यह है कि ओमिक्रान को डेल्टा वैरिएंट से अधिक संक्रामक होने के बावजूद उससे कम घातक बताया जा रहा है और ओमिक्रान संक्रमित मरीज अस्पतालों से जल्दी ही स्वस्थ हो कर घर लौट रहे हैं। टीकाकरण पर राष्ट्रीय तकनीकी सलाहकार समूह के प्रमुख डॉ एन के अरोड़ा के अनुसार दिल्ली , मुम्बई ‌‌और कोलकाता जैसे महानगरों में कोरोना संक्रमण के 75 प्रतिशत से अधिक मरीजों में ओमिक्रान के लक्षणों का मिलना इस बात का संकेत है कि  देश में कोरोना की तीसरी लहर ने दस्तक दे दी है और यह मानने के भी पर्याप्त कारण हैं कि ओमिक्रान वैरिएंट  ही देश में कोरोना की तीसरी लहर लेकर  आ रहा है। दिल्ली में तो कोरोना संक्रमितों 80 प्रतिशत से अधिक लोग ऐसे हैं जो ओमिक्रान से संक्रमित हुए हैं। विभिन्न राज्य सरकारें  लोगों से यह अपील कर रही हैं कि कोरोना से भयभीत न हों लेकिन सतर्क अवश्य रहें।  जिन राज्यों में कोरोना संक्रमण के मामलों में तेजी से उछाल आया है वहां की सरकारों ने अपने यहां पाबंदियां बढानी शुरू कर दी हैं।

अनेक राज्यों में रात्रिकालीन कर्फ़्यू लागू कर दिया गया है। महाराष्ट्र में धारा 144 के तहत प्रतिबंधात्मक आदेश जारी कर दिए गए हैं। दिल्ली में पाजिटिविटी दर 8 प्रतिशत होते ही पाबंदियों में इजाफा किया गया है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए दिल्ली में न केवल वीक एंड कर्फ्यू लगा कर दिया गया है बल्कि लोगों से यह अनुरोध भी किया गया है कि वे बहुत जरूरी होने पर ही घर से बाहर निकले। संक्रमण की रफ्तार और बढ़ने पर मध्यप्रदेश सहित कुल और  दूसरे राज्यों की सरकारें भी अपने यहां उन शहरों में वीक एंड लाक डाउन का फैसला लागू करने का फैसला ले सकती हैं जहां पाजिटिविटी दर में तेजी से इजाफा हो रहा है। दिल्ली में संक्रमण की भयावह रफ्तार को ध्यान में रखते हुए एम्स में चिकित्सकों की छुट्टियां भी रद्द कर दी गई हैं। अनेक राज्य सरकारों ने अपने यहां फिर से वही पाबंदियों को लागू किए जाने की घोषणा कर दी है जो कोरोना की दूसरी लहर में लागू की गई थी ।

अब यह तय माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में  कोरोना संक्रमण के आंकड़े अगर और तेजी से बढ़ते हैं तो पाबंदियों में इजाफा भी हो सकता है। मुम्बई की मेयर ने  सचेत कर दिया है कि अगर कोरोना से रोजाना  संक्रमण के मामले 20000से अधिक होते हैैं तो वहां लाकडाउन लागू करना मजबूरी हो जाएगा। कुल  मिलाकर आज के हालात यह संकेत दे रहे हैं कि भारत में अगले कुछ हफ्तों में कोरोना वायरस और तेजी से पांव पसार सकता है और फरवरी के मध्य तक संक्रमण के आंकड़े लगातार बढ़ सकते हैं ।इसी आशंका को ध्यान में रखते हुए अनेक राज्य सरकारें अपने पाबंदी बढ़ाने का फैसला कर रही हैं। गौरतलब है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन दुनिया में कोरोना की तीसरी लहर में संक्रमण की सुनामी आने की चेतावनी दे चुका है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने तो यहां तक चेतावनी दे दी है कि किसी भी देश को  कोरोनावायरस के ओमिक्रान वैरिएंट को हल्के में लेने की गलती नहीं करना चाहिए।

यह वैरिएंट इतना अधिक संक्रामक है कि इसके कारण मेडिकल सिस्टम ही लड़खड़ा सकता है। अमेरिका और ब्रिटेन जैसे संपन्न देशों में जिस गति से रोज ही कोरोना संक्रमितों की संख्या में इजाफा हो रहा है उससे विश्व स्वास्थ्य संगठन की चेतावनी सच साबित होने लगी है। इसी बीच फ्रांस में कोरोनावायरस का एक और वैरिएंट  मिलने से चिंताएं बढ़ गई हैं। इस वैरिएंट को IHU नाम दिया गया है। दरअसल इस नए वैरिएंट के मिलने से चिंता बढ़ने का कारण यह है कि यह 46 बार म्यूटेट हो चुका है और वहां 12 लोग इसके संक्रमण की चपेट में आ चुके हैं। वैज्ञानिक इस नए वेरिएंट के व्यवहार और संक्रमण की क्षमता का अध्ययन कर रहे हैं । गौरतलब है कि फ्रांस में इस वैरिएंट का पता चलने के पहले ही एक दिन में दो लाख से अधिक लोग कोरोना संक्रमित हो चुके हैं। ब्रिटेन में भी रोज दो  लाख लोगों को कोरोनावायरस अपनी चपेट में ले रहा है। अमेरिका में तो यह आंकड़ा दस लाख से ऊपर भी जा चुका है।

देश के वैज्ञानिक और चिकित्सा विशेषज्ञ यह मानकर चल रहे हैं कि कोरोनावायरस का ओमिक्रान वैरिएंट धीरे धीरे डेल्टा वैरिएंट की जगह ले लेगा और आगे चलकर ओमिक्रान के तेजी से बढ़ते मामलों के कारण  लोगों में हर्ड इम्युनिटी विकसित होने की संभावनाएं बढ़ जाएंगी । ओमिक्रान वैरिएंट के बारे में एक और सुकून देने वाली बात यह बताई जा रही है कि इसके संक्रमण का पीक एक माह में आ सकता है जैसा कि दक्षिण अफ्रीका में हुआ जहां ओमिक्रान संक्रमण का पहला मामला एक माह पूर्व सामने आया था। वहां अब इसका पीक आ चुका है। ओमिक्रान वैरिएंट को डेल्टा वैरिएंट से कम घातक बताने वाले वैज्ञानिक और चिकित्सा विशेषज्ञ यह आशंका अवश्य व्यक्त  कर रहे हैं कि आगे चलकर ओमिक्रान संक्रमण के मामले अत्यधिक तेज रफ्तार से बढ़ सकते हैं और यह रफ्तार दूसरी लहर के रिकार्ड भी तोड़ सकती है जब एक दिन में कोरोना संक्रमण के चार लाख से अधिक मामले दर्ज किए जा रहे थे। इसीलिए केंद्र सरकार ने उन  9 राज्यों की सरकारों को , जहां ओमिक्रान संक्रमण के मामले दूसरे राज्यों से अधिक मिल रहे हैं, जांच में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं ताकि किसी भी व्यक्ति में संक्रमण  की पुष्टि होते ही तत्काल उसका होम आइसोलेशन ‌‌‌‌‌‌सुनिश्चित किया जा सके ।

कोरोना संक्रमण के आंकड़ों में  रोजाना ही आने वाला उछाल यद्यपि चिंता का कारण अवश्य बना हुआ है परंतु राहत की बात यह है कि कोरोना की तीसरी लहर में संक्रमित होने वाले लोग लगभग घर में आइसोलेट होकर  एक सप्ताह के अंदर ही पूर्ण स्वस्थ  हो रहे हैं। ओमिक्रान वेरिएंट कोरोनावायरस के पूर्व में मिले दूसरे प्रारूपों से अधिक संक्रामक होने ‌के बावजूद  उनसे कम घातक होने का सबसे बड़ा प्रमाण यह है कि अस्पतालों में संक्रमितों के लिए सुरक्षित ‌‌‌‌‌‌रखे गए अधिकांश  बिस्तरों की अब आवश्यकता नहीं पड रही है। देश विदेश के वैज्ञानिकों और चिकित्सा विशेषज्ञों का मानना है कि कोरोनावायरस के ओमिक्रान वैरिएंट  के संक्रमण का अत्यधिक तेजी से फैलना दुनिया से कोरोना  महामारी के अंत की शुरुआत का शुभ संकेत भी हो सकता है।  वैज्ञानिकों की मानें तो आगे चलकर कोरोनावायरस के और हल्के वैरिएंट भी मिल सकते हैं जिसके बाद इस वायरस का प्रभाव साधारण सर्दी ज़ुकाम से अधिक नहीं होगा। विश्व स्वास्थ्य संगठन की मुख्य वैज्ञानिक सौम्या स्वामी नाथन भी कह चुकी हैं कि  भविष्य में कोरोनावायरस के और भी कम घातक वैरिएंट सामने आ सकते हैं । उनका यह भी माओ है कि लाकडाउन अब इसका समाधान नहीं है क्योंकि लोग भी  इस महामारी के प्रति जागरूक हो चुके हैं । मास्क लगाना और सार्वजनिक स्थानों पर निश्चित दूरी बनाकर रखना ही कोरोनावायरस से बचाव का सर्वोत्तम उपाय है।

भारत में कोरोनावायरस के ओमिक्रान वैरिएंट के संक्रमण का विस्तार होने के बावजूद यदि संक्रमित लोग जल्दी स्वस्थ हो रहे हैं तो उसका सबसे बड़ा कारण है कि मोदी सरकार ने टीकाकरण  अभियान की रफ्तार को कभी मंद नहीं पड़ने दिया । देश में अब तक कोरोना के टीकों की डेढ़ करोड़ डोज दी जा चुकी हैं और अब किशोरों का टीकाकरण प्रारंभ करना  तथा  चिकित्सकों, स्वास्थ्य कर्मियों, फ्रंट लाइन वर्कर्स  और गंभीर बीमारियों से ग्रस्त 60,वर्ष से अधिक आयु के बुजुर्गो को प्रिकाशन डोज डोज देने का जो सराहनीय फैसला केंद्र सरकार ने किया है वह निश्चित रूप कोरोना के विरुद्ध लड़ाई में मील का अहम का पत्थर साबित होगा। गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कोरोना काल  में जो महत्वपूर्ण फैसले किए हैं उनकी विश्व स्वास्थ्य संगठन के प्रमुख ने ‌भी प्रशंसा की है। देश में कोरोना की तीसरी लहर में संक्रमण की तेज रफ्तार से चिंतित प्रधानमंत्री ने गत  दिवस दिल्ली में बुलाई गई उच्च स्तरीय बैठक में स्थिति का जायजा लिया और तीसरी लहर से प्रभावी तरीके से निपटने के लिए जिला स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं को चुस्त-दुरुस्त रखने के निर्देश दिए हैं।

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