आंदोलन के सिपाही

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श्रीराम जन्मभूमि के लिए संघर्षरत कई ऐसे आंदोलनकारी हैं जिनका योगदान महत्वपूर्ण रहा है। जिनमें संत परमहंस रामचन्द्र दास, संघ के वरिष्ठ प्रचारक महेश नारायण सिंह, विश्व हिन्दू परिषद के संपर्क अधिकारी मोरोपंत पिंगले, महंत अवैधनाथ, अशोक सिंहल, विनय कटियार, गिरिराज किशोर, साध्वी ऋतंभरा, उमा भारती आदि शामिल हैं।

हिंदुओं पर अनगिनत अत्याचारो पर खामोशी क्यों

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भारतीय इतिहास में 90 के दशक में 300 हिंदुओ को कश्मीर में मारा गया। 1992 में मुस्लिम तुष्टिकरण के चलते उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री द्वारा हज़ारो निहत्थे हिंदू कारसेवकों पर गोली चलवाई गई। 1998 के दौर मे जम्मू-कश्मीर के कई ज़िलों एवं हिमांचल के चंबा ज़िले में सैकडो की संख्या में मुसलमानों ने हिंदुओं को मारा गया।

विदेशों में भारत को क्यों बदनाम कर रहे राहुल गांधी

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भारत की सबसे बूढ़ी पार्टी  के युवराज अपने वतन से बाहर जा कर भी वही बोले जो कभी उन्होंने संसद मे कहा था की “भारत एक राष्ट्र ही नही है” अगर भारत हम राष्ट्र नही है तो हमारी हज़ारों वर्षों  की हिन्दू संस्कृति क्या है? भारत की आज़ादी में  बलिदानी…

अजान से परेशान हर इंसान

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मस्जिदों से लाउडस्पीकर उतारे जाने के सामाजिक मुद्दे को छद्म सेक्युलर और मुसलमान धार्मिक रंग दे रहे हैं जबकि उन्हीं लाउडस्पीकरों पर हनुमान चालीसा बजाए जाने को सामाजिक द्वेष की संज्ञा दी जा रही है। यानी उनका मजहब और उससे सम्बंधित बातों को लेकर अन्य धर्म भले सहिष्णुता अपनाएं लेकिन वे अपने एक्सक्लूसिव दायरे से बाहर आने की कोशिश नहीं करेंगे।

अल्पसंख्यक होने का पुनः निर्धारण हो

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भारतीय राजनीति में अल्पसंख्यकवाद हमेशा से एक ज्वलंत मुद्दा रहा है। अभी हाल के दिनो में सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय द्वारा  इस विषय पर कोर्ट में करी गई अपील ने इस मुद्दे को फिर एक बार सुर्ख़ियो में ला खड़ा किया है। अल्पसंख्यक प्रश्न आज का है, ऐसा…

जवहारलाल नेहरू विश्वविद्यालय में विषैला वामपन्थ

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दुनिया में अपने शैक्षिण गतिविधि, उत्कृष्टता के लिये जाने-जाना वाला जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय गाहे-बगाहे चर्चा में आ ही जाता है। जे. एन. यू. की पहचान एक उन्मुकत वातावरण में डिबेड, चर्चा-परिचर्चा रही है, अपनी स्थापना से ही व्यवस्था बदलाव को लेकर यहाँ का छात्र समाज में अपनी आवाज़ को बुलन्द …

मतांतरण देश की हिन्दू संस्कृतिक अस्मिता के विरुद्ध

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भारत में प्रायः सुप्त पड़ी हिन्दू अस्मिता के पुनः जागरण ने जहाँ एक और अयोध्या में प्रभु राम जन्मभूमि मंदिर के भव्य निर्माण को साकार रूप दिया है तो वही भारत की प्राचीन नगरी काशी को भी दिव्यता दी है, वही मथुरा भी भविष्य में अपने उसी वैभव को प्राप्त…

समाज में एकत्व भाव का निर्माण ही है समाजिक समरसता

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सामाजिक समरसता समाज के भीतर रहने वाले तमाम जन समुदायों के बीच एकत्व निर्माण की एक आदर्श स्थिति है, जिस समरस समाज की अवधारणा को प्रभु राम ने बताया जिसमें वे कहते है“ समाज का निर्माण व्यक्ति-व्यक्ति के भीतर परस्पर “एक होने” के भाव एवं समता, बंधुत्व के विचार पर…

वस्त्र एवं कपड़ा आधारित आन्दोलन

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ब्रिटिश काल में ब्रिटिश सरकार ने अपने हितों के लिए कई ऐसी नीतियां और कानून बनाए, जिसके अंतर्गत वस्त्र एवं कपड़ा उद्योग से जुड़े लोगों के हितों पर बहुत प्रतिकूल असर पड़ा। इसमें 1813 एक्ट के तहत भारत में मुक्त व्यापार की नीति लागू की गई। इस नीति के तहत अब न सिर्फ ईस्ट इंडिया कंपनी बल्कि अन्य बाहरी कंपनियां भी भारत में व्यापार कर सकती थीं।

गावों की और बढ़ता विकास

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अगर हमने गांव केंद्रित योजनाओं का निर्माण किया होता तो शायद हमें मजदूरों के पलायन की समस्या का सामना न करना पड़ता। डॉ. बाबासाहब आंबेडकर और पं. दीनदयाल उपाध्याय देशज मॉडल पर विकास की बात करते थे। मोदी सरकार अब इस दिशा में अग्रसर है। विकास का केंद्र अब गांवों की ओर बढ़ रहा है। भारत की आत्मनिर्भरता का यह वर्तमान माडल है।

कोरोना , संघ और सेवा कार्य

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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ तो इतना काम कर रहा है वही जो वामपंथी एवं छद्म आंबेडकरवादी सदैव संघ की आलोचना करते हुए नहीं थकते थे, जो सब अब कहीं नहीं दिख रहे हैं। जब भी भारत पर संकट आया राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने बड़ी ही तत्परता के साथ समाज कार्य में अपना योगदान दिया।

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