संस्कृति का आदि प्रतीक दीपक

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दीपावली और दीप का सम्बंध उसी प्रकार का है, जैसे शरीर और आत्मा का होता है। दीप मानव को अज्ञानता से ज्ञान की ओर जाने तथा अपने जीवन को बुद्धि-सम्पदा से सम्पन्न करने की प्रेरणा प्रदान करता है। आसुरी प्रवृत्तियों पर मानवीय विजय का प्रतीक दीपावली का त्यौहार दीपों की मालिका के बिना अपूर्ण है क्योंकि ये दोनों ही भारतीय संस्कृति की विशालता और अपरिग्रह भाव के परिचायक हैं।

वैश्विक नवाचार सूचकांक में भारत 40वें स्थान पर आया

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हालांकि दुनिया में वैज्ञानिक और अभियंता पैदा करने की दृष्टि से भारत का तीसरा स्थान है। लेकिन विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संबंधी साहित्य सृजन में केवल पाश्चात्य लेखकों का ही बोलबाला है। पश्चिमी देशों के वैज्ञानिक आविष्कारोंसे ही यह साहित्य भरा पड़ा है। भारत में भी इसी साहित्य का पाठ्य पुस्तकों में अनुकरण है। इस साहित्य में न तो हमारे प्राचीन वैज्ञानिकों की चर्चा है और न ही आविष्कारों की। ऐसा इसलिए हुआ, क्योंकि हम खुद न अपने आविष्कारको को प्रोत्साहित करते हैं और न ही उन्हें मान्यता देते हैं। इन प्रतिभाओं के साथ हमारा व्यवहार भी कमोबेश उपहासपूर्ण अभ्रद रहता है।

सिलिकोन घाटी बैंगलुरु में बाढ़ की तबाही

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सिलिकान वैली के नाम से मशहूर बैंगलुरु जैसा हाईटेक शहर बारिश एवं बाढ़ की चपेट में हैं। आफत की बारिश के चलते डूब में आने वाले इस शहर ने संकेत दिया है कि तकनीकि रूप से स्मार्ट सिटी बनाने से पहले शहरों में वर्षा जल के निकासी का समुचित ढांचा खड़ा करने की जरूरत है। लेकिन हमारे नीति नियंता हैं कि जलवायु परिवर्तन से जुड़े  संकेतों पर ध्यान नहीं दे रहे हैं। नतीजतन बैंगलुरु की सड़कों और गलियों में कारों की जगह नावें और ट्रेक्टरों से जान बचाने की नौबत आई हुई है। इस स्थिति ने प्रशसन की अकर्मण्यता और अदुर्दार्शिता जताते हुए महानगरों के आवासीय नियोजन पर सवाल खड़े कर दिए है।

रोहिंग्याओं की समस्या का हल भारत निकाले -बांग्लादेश

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बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने रोहिंग्या मुसलमानों के मुद्दे के सामाधान के लिए भारत की ओर ताक रही हैं। उन्होंने कहा  कि इस समस्या के हल के लिए भारत एक बड़ी भूमिका निभा सकता है। बांग्लादेश में रह रहे 10 लाख रोहिंग्या शरणार्थी देश के लिए भारी बोझ के साथ एक चुनौती के रूप में भी पेश आ रहे हैं। भारत के साथ मिलकर शेख हसीना इस समस्या का सामाधान अंतरराश्ट्रीष् समुदाय से बात करके इनके मूल देश म्यांमार में वापसी की राह खोज रही हैं। लेकिन यहां सोचने की बात है कि जो भारत देश में घुसे 40 हजार रोहिंग्याओं की समस्या का निदान नहीं कर पा रहा है, वह बांग्लादेश के 10.10 लाख रोहिंग्याओं का हल कैसे निकाले ?

अध्यापकों की सीधी भर्ती से शिक्षा में सुधार

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योजना के प्रारूप के अनुसार, इन विशेषज्ञों को अनुबंध के आधार पर विज्ञान, अभियांत्रिकी, मीडिया, साहित्य, उद्यमिता, सामाजिक विज्ञान, ललित कला, लोकसेवा और सशस्त्र बल आदि क्षेत्रों में नियुक्ति दी जाएगी। इस नीति को सितंबर माह में 'प्रोफेसर आफ प्रैक्टिसÓ (पेशेवर प्राध्यापक) रूप में अधिसूचित किया जाएगा। पीएचडी जैसी पात्रता भी अनिवार्य नहीं रह जाएगी। शिक्षण संस्थानों में स्वीकृत कुल पदों में से दस प्रतिशत पदों की नियुक्ति इस योजना के अंतर्गत की जाएगी। फिलहाल देशभर में पत्रकारिता के विवि में अनेक पेशेवर पत्रकार इसी आधार पर अध्यापन का कार्य कर रहे हैं।   

अतिवादी शिक्षा पर लगे अंकुश

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बंटवारे के समय करोड़ों मुसलमान पाकिस्तान नहीं गए क्योंकि उनकी गर्भनाल यहां से जुड़ी हुई थी। राष्ट्र के विकास और रक्षा के लिए भी हमेशा तत्पर रहे परंतु संविधान में सेक्युलर शब्द जोड़ दिए जाने और सरकारों द्वारा प्रश्रय पाने के बाद कठमुल्लाओं ने लोगों को भड़काना शुरू किया और मुख्यधारा से काटकर रख दिया।

धर्म आधारित जनसंख्यात्मक घनत्व बिगड़ने की आशंका

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कश्मीर, केरल समेत अन्य सीमांत प्रदेशों में बिगड़ते जनसंख्यात्मक अनुपात के दुष्परिणाम कुछ समय से प्रत्यक्ष रूप में देखने में आ रहें हैं। कश्मीर में पुष्तैनी धरती से 5 लाख हिंदुओं का विस्थापन, बांग्लादेशी घुसपैठियों के चलते असम व अन्य पूर्वोत्तर राज्यों में बदलते जनसंख्यात्मक घनत्व के चलते जब चाहे तब दंगे के हालात उत्पन्न हो जाते हैं। यही हालात पश्चिम बंगाल में देखने में आ रहे हैं। जबरिया धर्मांतरण पूर्वोत्तर और केरल राज्यों में बढ़ता ईसाई वर्चस्व ऐसी बड़ी वजह बन रही हैं, जो देश के मौजूदा नक़्शे की शक्ल बदल सकती हैं ? लिहाजा परिवार नियोजन के एकांगी उपायों को खारिज करते हुए आबादी नियंत्रण के उपायों पर नए सिरे से सोचने की जरूरत है।

लीक से हटकर पढ़ाया जाएगा सोच का पाठ

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नए अविष्कार या अनुसंधानों की शुरुआत अकसर समस्या के समाधान से होती है, जिसमें उपलब्ध संसाधनों को परिकल्पना के अनुरुप ढालकर क्रियात्मक अथवा रचनात्मक रूप दिया जाता है। यही वैचारिक स्त्रोत अविष्कार के आधार बनते हैं। किंतु हमारी शिक्षा पद्धति से इन कल्पनाशील वैचारिक स्त्रोतों को तराशने का अध्यापकीय कौशल कमोबेश नदारद रहा है। लिहाजा सोच कुंठित होती रही है। अंग्रेजी का दबाव भी नैसर्गिक प्रतिभाओं को कुंठित कर रहा है। देर से ही सही आईआईटी मद्रास ने सोच का पाठयक्रम शुरू करके एक आवश्यक  पहल की है।

भारतीय कृषि सब्सिडी विकसित देश नाराज

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जेनेवा में सम्पन्न डब्ल्यूटीओ की बैठक में एक बार फिर अमेरिका समेत विकसित देशों ने भारत जैसे देशों द्वारा किसानों को दी जा रही सब्सिडी का विरोध किया लेकिन भारत अपने रुख पर अड़ा रहा और लगभग 80 देशों ने भारत की नीति का समर्थन किया। 

भूकंप से दहला अफगानिस्तान

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धरती पर पड़ने वाली सूरज की गर्मी प्रत्यावर्तित होने की बजाय, धरती में ही समाने लगी है। गोया, धरती का तापमान बढ़ने लगा, जो जलवायु परिवर्तन का कारण तो बना ही, प्राकृतिक आपदाओं का कारण भी बन रहा है। ऐसे में सिमेंट, लोहा और कंक्रीट के भवन जब गिरते हैं, तो मानव त्रासदी ज्यादा होती है।

चिकित्सा-शिक्षा में गुणवत्ता की कमी

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अपने बच्चों को हरहाल में मेडिकल और आर्इटी कॉलेजों में प्रवेश की यह महत्वाकांक्षा रखने वाले पालक यही तरीका अपनाते हैं। देश के सरकारी कॉलेजों की एक साल की शुल्क महज 4 लाख है, जबकि निजी विश्व-विद्यालय और महाविद्यालयों में यही शुल्क 64 लाख है। यही धांधली एनआरआर्इ और अल्पसंख्यक कोटे के छात्रों के साथ बरती जा रही है। एमडी में प्रवेश के लिए निजी संस्थानों में जो प्रबंधन के अधिकार क्षेत्र और अनुदान आधारित सीटें हैं, उनमें प्रवेश शुल्क की राशि 2 करोड़ से 5 करोड़ है। बावजूद सामान्य प्रतिभाशाली छात्र के लिए एमएमबीबीएस परीक्षा कठिन बनी हुर्इ है।

आतंक पर रोक के लिए सिंधु-जल संधि बने हथियार

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कश्मीर में आतंकी गैर-मुस्लिम पेशेवरों को निशाना बनाने की नई साजिश को अंजाम दे रहे हैं। जिस दौरान भारत-पाकिस्तान ने स्थाई सिंधु आयोग की रिपोर्ट को अंतिम रूप देकर हस्ताक्षर किए, उसी दौरान पाकिस्तान परस्त आतंकी घाटी में एक-एक कर हिंदू नौकरीपेशाओं की लक्षित हत्या में लगे थे। राहुल भट्ट,…

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