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बाधा बनते छद्म पर्यावरण आंदोलन

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छद्म पर्यावरण संगठनों की पूरी एक श्रृंखला है, जिन्हें समर्थक संस्थाओं के रूप में देशी-विदेशी औद्योगिक घरानों ने पाला-पोसा है। ऐसे संगठन हमारे आर्थिक विकास की गति को रोक रहे हैं। उन्हें खोजकर उन पर अंकुश लगाया जाना चाहिए।

जम्मू – कश्मीर का हुआ सार्थक विभाजन

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    जम्मू - कश्मीर का जम्मू - कश्मीर और लद्दाख के रूप में विभाजन ने उस पल सार्थकता ग्रहण कर ली जब इन केंद्र शासित प्रदेशों में उपराज्यपाल के रूप में राधाकृष्णन माथुर और गिरीश चंद्र मुर्मु ने शपथ - ग्रहण कर ली। इस अहम् पल के साथ ही अलग निशान और विधान का शासन खत्म हो...

समृद्धि की लोकमाता हैं लक्ष्मी

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लक्ष्मी की पूजा में उस अनजानी स्त्री की महिमा और समन्वय का गुणगाण है, जो एक अज्ञात घर में आकर उसे अपने संस्कार और समर्पण से संवारती है। हम सब जानते हैं कि लक्ष्मी का प्रादुर्भाव समुद्र-मंथन से हुआ है। क्षीर-सागर के इस मंथन से जब समुद्र में पड़े अनेक तत्वों का आलोड़न और इस रस का संचार नाना रूपों में

दुनिया के पहले चिकित्सा विज्ञानी धन्वन्तरि

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समुद्र-मंथन के अंत में आयुर्वेदाचार्य धन्वन्तरि देव और दानवों को हाथों में अमृत-कलश लिए मिले थे। दरअसल समुद्र-मंथन की इस वैश्विक घटना की जानकारी विश्व के उन सभी दूरांचलों में फैल गई थी, जिनकी अपनी सत्ता थी। उस समय धन्वन्तरि चिकित्सा क्षेत्र के बड़े अनुसंधित्सु और वैद्य के रूप में विख्यात हो चुके थे।

प्रकृति की ऊर्जा का प्रतीक हैं, देवी दुर्गा

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मनुष्य का जीवन भीतरी और बाहरी द्वंदों से भरा हुआ है। जब व्यक्तित्व ही अंतर्विरोधों से भरा है, तब किसी भी व्यक्ति या समाज का विरोधाभासी होना स्वाभाविक है।

गुलाम कश्मीर की आजादी जरूरी

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    केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने इंदौर में कहा है कि ‘जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद-370  हटाए जाने के बाद अब सरकार जल्दी ही पाक अधिकृत कश्मीर पर बड़ा कदम उठा सकती है। क्योंकि पीओके भारत का हिस्सा है और उसे भारत में मिलाना हमारा दायित्व है। इस विलय के संबंध में सर्वसम्मति से संसद में प्रस्ताव भी पारित होते रहे हैं।

कश्मीर में लौटेगा बहुलतावादी चरित्र

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दशकों से इस राज्य के भीतर जो लोग आतंक के साये में और घाटी से विस्थापित जो पंडित मातृभूमि से खदेड़े जाने का दंश झेलते हुए शिविरों में जी रहे थे, उन्हें राहत मिलने जा रही है। इन लोगों की पीड़ा को पूरा देश और केंद्र में रही सरकारें बखूबी जानती थीं, लेकिन इस यथास्थिति को तोड़ने की हिम्मत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह ही दिखा पाए

ईरान को लेकर दो हिस्सों में विभाजित दुनिया

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अमेरिका के ईरान के साथ हुए परमाणु समझौते से अलग हो जाने के बावजूद रूस, चीन, फ्रांस, ब्रिटेन और जर्मनी अभी भी इस समझौते से सहमत हैं। इसीलिए ईरान भी अमेरिका के खिलाफ तल्ख तेवर अपनाए हुए है। इसीलिए दुनिया को लग रहा है कि कहीं जंग का सिलसिला शुरू न हो जाए?

अनिवार्य मतदान पर नहीं बनी एक राय

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समाजसेवी संगठनों द्वारा सर्वोच्च न्यायालय में दायर की गई जनहित याचिकाओं के माध्यम से चुनाव सुधार की कई मांगे की गईं, लेकिन कोई भी मांग पूरी नहीं हुई।

मोदी और शाह का मिशन कश्मीर

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जम्मू-कश्मीर में सख्ती के चलते हालात तेजी से सुधर रहे हैं। आम जन-जीवन सामान्य हो रहा है और पत्थरबाजी की घटनाएं अप्रत्याशित ढंग से घट रही है, 2016 में जहां पत्थरबाजी की 2653 घटनाएं हुई, वहीं 2019 के बीते छह महीनों में दर्जनभर वरदातें ही सामने आई हैं। इन मामलों में शरारती तत्वों की गिरतारियां भी 10,571 से घटकर 100 के आंकड़े के इर्द-गिर्द सिमट गई है।

विदेशी छात्रों के लिए भारत में पढ़ाई की पहल

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  वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में साल 2019-20 का बही-खाता पेश करते हुए स्टडी इन इंडिया‘ यानी ‘भारत में शिक्षा‘  योजना शुरू करने का अहम् निर्णय लिया है। इस योजना का उद्देश्य भारत में उच्च विज्ञान व तकनीकि शिक्षा का ऐसा अंतरराष्ट्रीय माहौल बनाना है, जिससे विदेशी छात्र भारत में पढ़ने के लिए लालायित हों। इस गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए 400 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है।

ग्रामीण और शहरी भारत की असमानता दूर होगी

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इसमें कोई दो राय नही कि नरेंद्र मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल का पहला बही-खाता ग्रामीण भारत के चौतरफा विकास का स्पष्ट संकेत दे रहा है। इसमें सबसे अधिक घोषणाएं ग्राम, कृषि और किसान पर केंद्रित हैं। साफ है, देश की पहली महिला वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा संसद में प्रस्तुत किया गया यह वार्षिक लेखा-जोखा देश के धरातल को मजबूत करेगा।

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