मुंशी प्रेमचंद की गाय बनाम राष्ट्रीय पशु

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गौकशी के एक मामले की सुनवाई करते हुए इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण टिप्पणी की है कि गाय भारत की संस्कृति का अभिन्न अंग है, अतएव इसे राष्ट्रीय पशु घोषित किया जाना चाहिए। न्यायालय ने जावेद नामक व्यक्ति की जमानत याचिका खारिज करते हुए यह बात कही। जावेद पर…

विज्ञान और रोजगार में संस्कृत की बड़ी भागीदारी

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आमतौर से भारत ही नहीं दुनिया में अंग्रेजी को विज्ञानऔर रोजगार की भाषा माना जाता है। किंतु अब यहमिथक व्यापक स्तर पर टूटता दिख रहा है। नई शिक्षानीति का यदि निष्पक्षता और ईमानदारी से पालन होता हैतो वह दिन दूर नहीं जब हम संस्कृत समेत अन्यभारतीय भाषाओं को पूर्ण रूप…

शिक्षा का भारतीयकरण कितना जरुरी

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दरअसल अब नई शिक्षा नीति के अंतर्गत वास्तव में राष्ट्र की लुप्त कर दी गई सांस्कृतिक संपदा के महत्व को अंगीकार करते हुए ज्ञान, कर्म, संस्कार, भाषा, संस्कृति और कौशल दक्षता को विद्यार्थी में विकसित करने का काम मातृभाषाएं करेंगी। मानव को मानवीय बनाने के यही मानविकी विषय हैं। व्यक्तित्व निर्माण की यही परिकल्पना व्यक्ति में राष्ट्रबोध का प्रादुर्भाव करती है। मूल्य-बोध के इन संस्कारों से संपूर्ण राष्ट्र में सांस्कृतिक चेतना का लोकव्यापीकरण होगा और सनातन मानवीय मूल्यों की सुरक्षा होगी। यही मूल्य न केवल व्यक्ति को आत्मनिर्भर बनाएंगे, बल्कि देश को भी आत्मनिर्भता के शिखर पर पहुंचाएंगे।

बदलाव के वाहक बनते ग्रामीण आविष्कारक

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उद्यमिता विकास के लिए कार्य-संस्कृति, अंतर-संरचना और कानून-व्यवस्था में बड़े बदलाव लाने होंगे, बल्कि युवाओं को आरक्षण आंदोलन और सरकारी या कंपनियों की नौकरी का मोह भी छोड़ना होगा। तभी युवा उद्यमियों की सोचने-विचारने की मेधा प्रखर होगी और किसी आविष्कार को साकार रूप देने के लिए कल्पना-शक्ति विकसित होगी।

आसान होगा मृतको से वार्तालाप

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 'योग वशिष्ठ' में तो ब्रह्माण्ड के स्तरों को मनुष्य की अंतर्चेतना की परतों से जोड़कर राजा पद्म और रानी लीलावती की अत्यंत रोचक कहानी है। इसमें वशिष्ठ ने सूक्ष्म-अतिसूक्ष्म और भौतिक-अभौतिक शरीरों की लौकिक एवं पारलौकिक यात्राएं करते हुए मन की अनंत इच्छाओं के अनुसार जीवन की अनवरत यात्रा, मनुष्येतर योनियों में भ्रमण और समय तथा स्थान में निर्मित भ्रमण में चेतना के अभ्यृदय, अस्तित्व और प्राण विद्या के गूढ़ रहस्यों को प्रकट किया है।

हवा का भोजन कर जीवित रहीं अहल्या

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वाल्मिकी रामायण के अनुसार गौतम ऋषि पत्नी अहल्या के चरित्र पर शंका कर उसे हवा पीकर, अदृश्य रहने का श्राप देते हैं। केवल हवा पीकर जीवित रहने वाली इसी स्त्री को अन्य रामायणों में शिला की उपमा दी गई है। इस स्थिति में पुत्र शतानंद व चिरकारी तथा पुत्री अंजनी अहल्या की सेवा में रहते हैं। अर्थात हमारे ऋषि हवा से भोजन बनाने की तरकीब न केवल जानते थे, बल्कि विपरीत परिस्थितियों में उसका सेवन भी किया जाता था।

बना रहे लोकतंत्र

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संविधान में एक निश्चित संसदीय बहुमत से संशोधन का भी अधिकार दिया, जिससे परिवर्तित परिदृश्य में जनता को अधिकतम अधिकार दिए जा सकें। इसीलिए भारतीय संविधान लचीला होने के तत्पश्चात भी लोकतंत्र व संप्रभुता के लिए प्रासंगिक बना हुआ है।

चीन का हस्तक्षेप कमजोर होता नेपाल

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चीन और नेपाल के बीच तिब्बत के रास्ते रेलमार्ग बनाने पर भी संधि हुई है। चीन ने काठमांडू से करीब 200 किमी दूर पोखरा में क्षेत्रीय हवाई अड्डा निर्माण के लिए नेपाल को 21.6 डॉलर का सस्ती ब्याज दर पर ऋण दिया है। मुक्त व्यापार समझौते पर भी हस्ताक्षर हुए हैं। नेपाल में तेल और गैस की खोज करने पर भी चीन सहमत हुआ है। इसके लिए वह नेपाल को आर्थिक और तकनीकी मदद देने को राजी हो गया है।

भारतीय वस्त्र परंपरा में औद्योगिक हस्तक्षेप

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यह हमारा अज्ञान एवं भ्रम है कि विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में पश्चिम अग्रणी देशों में आते हैं, जबकि हकीकत यह थी कि हम पश्चिम में खासतौर से ब्रिटेन से बहुत आगे थे। जब ब्रिटेन हमारे कपड़ा उद्योग पर अतिक्रमण कर रहा था, तब हमारे यहां 2400 और 2500 काउंट के महीन धागे बनाने में जुलाहे निपुण थे, केवल एक ग्रेन में 29 गज लंबे धागे हमारे कारीगर बना लिया करते थे।

जनसंख्या वृद्धि पर सबके लिए समान नीति हो

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समाज का एक तबका परिवार नियोजन अपनाए और दूसरा तबका न अपनाए तो विवेकहीन जनसंख्या वृद्धि हो जाती है। अतः सभी के लिए समान जनसंख्या नीति व उसके लिए कानून बनाने की आवश्यकता है। यह धर्म का मुद्दा नहीं है। कोई भी धर्म परिवार नियोजन के खिलाफ नहीं है; यहां तक कि इस्लाम भी।

देर-सबेर जाएगी अशोक गहलोत सरकार

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राजस्थान में गहलोत सरकार गिर भी जाती है तो सचिन पायलट का मुख्यमंत्री बनना तो मुश्किल होगा ही; वसुंधरा भी कोई गुल खिला दें, ऐसा लगता नहीं है। ऐसे में अंततः राजस्थान में मध्यावध्धि चुनाव की ज्यादा उम्मीद लगती है।

वामपंथी चोले में सम्राज्यवादी आचरण

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पंचशील जैसी लोकतंत्रिक अवधारणाएं चीन के लिए उस सिंह की तरह हैं, जो गाय का मुखौटा ओढ़कर धूर्तता से दूसरे प्राणियों का शिकार करते हैं। चेकोस्लोवाकिया, तिब्बत और नेपाल को ऐसे ही मुखौटे लगाकर चीन जैसे साम्यवादी देशों ने बरबाद किया है। पाक आतंकियों को भी चीन, भारत के खिलाफ छायायुद्ध के लिए उकसाता है।

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