धर्म आधारित जनसंख्यात्मक घनत्व बिगड़ने की आशंका

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कश्मीर, केरल समेत अन्य सीमांत प्रदेशों में बिगड़ते जनसंख्यात्मक अनुपात के दुष्परिणाम कुछ समय से प्रत्यक्ष रूप में देखने में आ रहें हैं। कश्मीर में पुष्तैनी धरती से 5 लाख हिंदुओं का विस्थापन, बांग्लादेशी घुसपैठियों के चलते असम व अन्य पूर्वोत्तर राज्यों में बदलते जनसंख्यात्मक घनत्व के चलते जब चाहे तब दंगे के हालात उत्पन्न हो जाते हैं। यही हालात पश्चिम बंगाल में देखने में आ रहे हैं। जबरिया धर्मांतरण पूर्वोत्तर और केरल राज्यों में बढ़ता ईसाई वर्चस्व ऐसी बड़ी वजह बन रही हैं, जो देश के मौजूदा नक़्शे की शक्ल बदल सकती हैं ? लिहाजा परिवार नियोजन के एकांगी उपायों को खारिज करते हुए आबादी नियंत्रण के उपायों पर नए सिरे से सोचने की जरूरत है।

लीक से हटकर पढ़ाया जाएगा सोच का पाठ

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नए अविष्कार या अनुसंधानों की शुरुआत अकसर समस्या के समाधान से होती है, जिसमें उपलब्ध संसाधनों को परिकल्पना के अनुरुप ढालकर क्रियात्मक अथवा रचनात्मक रूप दिया जाता है। यही वैचारिक स्त्रोत अविष्कार के आधार बनते हैं। किंतु हमारी शिक्षा पद्धति से इन कल्पनाशील वैचारिक स्त्रोतों को तराशने का अध्यापकीय कौशल कमोबेश नदारद रहा है। लिहाजा सोच कुंठित होती रही है। अंग्रेजी का दबाव भी नैसर्गिक प्रतिभाओं को कुंठित कर रहा है। देर से ही सही आईआईटी मद्रास ने सोच का पाठयक्रम शुरू करके एक आवश्यक  पहल की है।

भारतीय कृषि सब्सिडी विकसित देश नाराज

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जेनेवा में सम्पन्न डब्ल्यूटीओ की बैठक में एक बार फिर अमेरिका समेत विकसित देशों ने भारत जैसे देशों द्वारा किसानों को दी जा रही सब्सिडी का विरोध किया लेकिन भारत अपने रुख पर अड़ा रहा और लगभग 80 देशों ने भारत की नीति का समर्थन किया। 

भूकंप से दहला अफगानिस्तान

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धरती पर पड़ने वाली सूरज की गर्मी प्रत्यावर्तित होने की बजाय, धरती में ही समाने लगी है। गोया, धरती का तापमान बढ़ने लगा, जो जलवायु परिवर्तन का कारण तो बना ही, प्राकृतिक आपदाओं का कारण भी बन रहा है। ऐसे में सिमेंट, लोहा और कंक्रीट के भवन जब गिरते हैं, तो मानव त्रासदी ज्यादा होती है।

चिकित्सा-शिक्षा में गुणवत्ता की कमी

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अपने बच्चों को हरहाल में मेडिकल और आर्इटी कॉलेजों में प्रवेश की यह महत्वाकांक्षा रखने वाले पालक यही तरीका अपनाते हैं। देश के सरकारी कॉलेजों की एक साल की शुल्क महज 4 लाख है, जबकि निजी विश्व-विद्यालय और महाविद्यालयों में यही शुल्क 64 लाख है। यही धांधली एनआरआर्इ और अल्पसंख्यक कोटे के छात्रों के साथ बरती जा रही है। एमडी में प्रवेश के लिए निजी संस्थानों में जो प्रबंधन के अधिकार क्षेत्र और अनुदान आधारित सीटें हैं, उनमें प्रवेश शुल्क की राशि 2 करोड़ से 5 करोड़ है। बावजूद सामान्य प्रतिभाशाली छात्र के लिए एमएमबीबीएस परीक्षा कठिन बनी हुर्इ है।

आतंक पर रोक के लिए सिंधु-जल संधि बने हथियार

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कश्मीर में आतंकी गैर-मुस्लिम पेशेवरों को निशाना बनाने की नई साजिश को अंजाम दे रहे हैं। जिस दौरान भारत-पाकिस्तान ने स्थाई सिंधु आयोग की रिपोर्ट को अंतिम रूप देकर हस्ताक्षर किए, उसी दौरान पाकिस्तान परस्त आतंकी घाटी में एक-एक कर हिंदू नौकरीपेशाओं की लक्षित हत्या में लगे थे। राहुल भट्ट,…

भारत के अनाज पर दुनिया की निगाहें

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एक समय वह था, जब यूरोप को ‘रोटी की टोकरी‘ की संज्ञा प्राप्त थी। स्वयं भारत ने आजादी के बाद लंबे समय तक आस्ट्रेलिया से गेहूं आयात करते हुए अपनी बड़ी आबादी का पेट भरा है। लेकिन आज भारत गेहूं ही नहीं अनेक आवष्यक खाद्य पदार्थों के उत्पादन में अग्रणी…

कश्मीर में हिंदुओं की लक्षित हत्याओं का सिलसिला

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कश्मीर में पाकिस्तान परस्त आतंकवादियों ने लक्षित हिंसा के तहत कश्मीरी हिंदुओं को निशाना बनाए जाने का सिलसिला तेज कर दिया है। कश्मीर में यह सिलसिला अक्टूबर 2021 से शुरू हुआ और 31 मई को दलित स्कूल शिक्षिका रजनी बाला की हत्या के साथ यह संख्या 18 हो गई है।…

युद्ध के बीच विश्व को चाहिए बुद्ध का ज्ञान

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वर्तमान में जिस तरह से रूस और यूक्रेन युद्धरत हैं और इस कारण पूरा विश्व किसी न किसी प्रकार से त्रस्त है, ऐसे में हमें बुद्ध के संदेश को समझना और उसे आत्मसात करना चाहिए विश्व की सभ्यताओं का विकास उन क्रूर परिस्थितियों से संघर्ष करते हुए हुआ, जिनसे पीछा…

सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की छाया में गणतंत्र

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बदलाव की चेतना स्वतंत्रता संग्राम के दौरान भी देखने में आई थी। इसीलिए इसे भारतीय स्वाभिमान की जागृति का संग्राम भी कहा जाता है। राजनीतिक दमन और आर्थिक शोषण के विरुद्ध लोक-चेतना का यह प्रबुद्ध अभियान था। यह चेतना उत्तरोतर ऐसी विस्तृत हुई कि समूची दुनिया में उपनिवेशवाद के विरुद्ध मुक्ति का स्वर मुखर हो गया। परिणाम स्वरूप भारत की आजादी एशिया और अफ्रीका की भी आजादी लेकर आई।

प्राचीन मंदिरों में विज्ञान

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वैज्ञानिकों ने तकनीकी जांच में पाया कि इन पत्थरों को बनाने के लिए एक आयताकार खाई तैयार की गई, जिसमें ग्रेनाइट पत्थर का चूर्ण, गन्ने से निर्मित चीनी (केन शुगर), नदी की रेत और कुछ अन्य यौगिक डालकर एक मिश्रण तैयार किया। इस मिश्रण से नींव भरी गई और  विभिन्न आकार के छिद्रयुक्त पत्थर तैयार किए गए।

सहरिया जनजाति की गौरव गाथा

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ग्वालियर-चंबल अंचल में रहने वाली बहुसंख्यक जनजाति 'सहरिया' की गौरव एवं शौर्य गाथाओं का उल्लेख स्वतंत्रता संग्राम के संदर्भ में अपवादस्वरूप ही होता है। लेकिन इतिहास सम्मत तथ्य है कि जब झांसी की रानी लक्ष्मीबाई ने झांसी से निकलकर शिवपुरी जिले के गोपालपुर जागीर में पड़ाव डाला था, तब उन्होंने…

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