सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की छाया में गणतंत्र

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बदलाव की चेतना स्वतंत्रता संग्राम के दौरान भी देखने में आई थी। इसीलिए इसे भारतीय स्वाभिमान की जागृति का संग्राम भी कहा जाता है। राजनीतिक दमन और आर्थिक शोषण के विरुद्ध लोक-चेतना का यह प्रबुद्ध अभियान था। यह चेतना उत्तरोतर ऐसी विस्तृत हुई कि समूची दुनिया में उपनिवेशवाद के विरुद्ध मुक्ति का स्वर मुखर हो गया। परिणाम स्वरूप भारत की आजादी एशिया और अफ्रीका की भी आजादी लेकर आई।

प्राचीन मंदिरों में विज्ञान

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वैज्ञानिकों ने तकनीकी जांच में पाया कि इन पत्थरों को बनाने के लिए एक आयताकार खाई तैयार की गई, जिसमें ग्रेनाइट पत्थर का चूर्ण, गन्ने से निर्मित चीनी (केन शुगर), नदी की रेत और कुछ अन्य यौगिक डालकर एक मिश्रण तैयार किया। इस मिश्रण से नींव भरी गई और  विभिन्न आकार के छिद्रयुक्त पत्थर तैयार किए गए।

सहरिया जनजाति की गौरव गाथा

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ग्वालियर-चंबल अंचल में रहने वाली बहुसंख्यक जनजाति 'सहरिया' की गौरव एवं शौर्य गाथाओं का उल्लेख स्वतंत्रता संग्राम के संदर्भ में अपवादस्वरूप ही होता है। लेकिन इतिहास सम्मत तथ्य है कि जब झांसी की रानी लक्ष्मीबाई ने झांसी से निकलकर शिवपुरी जिले के गोपालपुर जागीर में पड़ाव डाला था, तब उन्होंने…

मिसाइल क्षेत्र में सफलता की महागाथा लिखता भारत

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भारत ने अपनी सैन्य-शक्ति में वृद्धि करते हुए मिसाइल निर्माण के क्षेत्र में अग्नि-पांच का सफल परीक्षण किया है। सटीक निशाना दागने में सक्षम इस मिसाइल की मारक क्षमता पांच हजार किमी है। ओड़ीसा के एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से इस प्रक्षेपास्त्र को एक निश्चित निशाने पर दागा गया। रक्षा…

क्या कश्मीर में लौट रहे हैं 1990 के हालात ?

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कश्मीर में आम नागरिकों की आतंकियों द्वारा हत्या ने खौफनाक हालात पैदा कर दिए हैं। यह स्थिति भारत सरकार और सुरक्षा बलों के लिए बड़ी चुनौती है। आतंकी संगठनों ने 18 दिन के भीतर बारह बेकसूर नागरिकों की निर्मम हत्याएं की हैं। इनमें दस गैर-मुस्लिम हैं। इनमें से ज्यादातर उत्तर-प्रदेश,…

कहाँ है दशानन रावण की सुवर्णमयी लंका

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विरोधाभास और मतभिन्नता भारतीय संस्कृति के मूल में रहे हैं। यही इसकी विशेषता भी है और कमजोरी भी। विशेषता इसलिए कि इन कालखंडों के रचनाकारों ने काल और व्यक्ति की सीमा से परे बस शाश्वत अनुभवों के रूप में अभिव्यक्त किया है। इसीलिए वर्तमान विद्वान रामायण और महाभारत के घटनाक्रमों,…

सावरकर को बदनाम करने की कड़ी आगे बढ़ सकती है?

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राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सरसंघचालक ने वीर सावरकर पर लिखी पुस्तक का विमोचन करते हुए एक बड़ी चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता के बाद से ही वीर विनायक दामोदर सावरकर को बदनाम करने की मुहिम चलाई गई है। संभव है, सावरकर के बाद स्वामी विवेकानंद, दयानंद सरस्वती…

दाह-क्रिया एवं श्राद्धकर्म का विज्ञान

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मादा कौवा सावन-भादों यानी अगस्त-सितंबर में अंडे देती है। इन्हीं माहों में श्राद्ध पक्ष पड़ता है इसलिए ऋषि-मुनियों ने कौवों को पौष्टिक आहार खिलाने की परंपरा श्राद्ध पक्ष से जोड़ दी, जो आज भी प्रचलन में है। दरअसल इस मान्यता की पृष्ठभूमि में बरगद और पीपल वृक्षों की सुरक्षा जुड़ी है, जिससे मनुष्य को 24 घंटे ऑक्सीजन मिलती रहे।

मुंशी प्रेमचंद की गाय बनाम राष्ट्रीय पशु

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गौकशी के एक मामले की सुनवाई करते हुए इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण टिप्पणी की है कि गाय भारत की संस्कृति का अभिन्न अंग है, अतएव इसे राष्ट्रीय पशु घोषित किया जाना चाहिए। न्यायालय ने जावेद नामक व्यक्ति की जमानत याचिका खारिज करते हुए यह बात कही। जावेद पर…

विज्ञान और रोजगार में संस्कृत की बड़ी भागीदारी

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आमतौर से भारत ही नहीं दुनिया में अंग्रेजी को विज्ञानऔर रोजगार की भाषा माना जाता है। किंतु अब यहमिथक व्यापक स्तर पर टूटता दिख रहा है। नई शिक्षानीति का यदि निष्पक्षता और ईमानदारी से पालन होता हैतो वह दिन दूर नहीं जब हम संस्कृत समेत अन्यभारतीय भाषाओं को पूर्ण रूप…

शिक्षा का भारतीयकरण कितना जरुरी

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दरअसल अब नई शिक्षा नीति के अंतर्गत वास्तव में राष्ट्र की लुप्त कर दी गई सांस्कृतिक संपदा के महत्व को अंगीकार करते हुए ज्ञान, कर्म, संस्कार, भाषा, संस्कृति और कौशल दक्षता को विद्यार्थी में विकसित करने का काम मातृभाषाएं करेंगी। मानव को मानवीय बनाने के यही मानविकी विषय हैं। व्यक्तित्व निर्माण की यही परिकल्पना व्यक्ति में राष्ट्रबोध का प्रादुर्भाव करती है। मूल्य-बोध के इन संस्कारों से संपूर्ण राष्ट्र में सांस्कृतिक चेतना का लोकव्यापीकरण होगा और सनातन मानवीय मूल्यों की सुरक्षा होगी। यही मूल्य न केवल व्यक्ति को आत्मनिर्भर बनाएंगे, बल्कि देश को भी आत्मनिर्भता के शिखर पर पहुंचाएंगे।

बदलाव के वाहक बनते ग्रामीण आविष्कारक

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उद्यमिता विकास के लिए कार्य-संस्कृति, अंतर-संरचना और कानून-व्यवस्था में बड़े बदलाव लाने होंगे, बल्कि युवाओं को आरक्षण आंदोलन और सरकारी या कंपनियों की नौकरी का मोह भी छोड़ना होगा। तभी युवा उद्यमियों की सोचने-विचारने की मेधा प्रखर होगी और किसी आविष्कार को साकार रूप देने के लिए कल्पना-शक्ति विकसित होगी।

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