संवेदनाएं अपनी-अपनी

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अचानक स्टेशन का शोर सुनाई देने लगा था। न्यू दिल्ली स्टेशन आ चुका था। सभी यात्री अपना सामान लेकर दरवाजे की ओर बढ़ने लगे। नितिन और भव्या भी मालती को लेकर सामान के साथ नीचे उतर आए। सबको मालती के बेटे अरुण का इंतजार था। भव्या और नितिन की निगाहें मालती की ओर थीं, कि कब वह संकेत देगी कि मेरा बेटा अरुण आ गया।

कालचक्र

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“बियानी जी की आंखों से गंगा -जमुना बह रही थीं। वे बोले, भगवान अच्छे कर्मों का फल कैसे, कहां देंगे, यह तो हमें पता नहीं चलता। बेटा, कालचक्र में क्या कुछ निहित है कोई नहीं जानता...”

कर्मफल

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कन्याकुमारी मंदिर के पीछे चबूतरे पर अनेक यात्री सूर्योदय देखने के लिए एकत्रित थे। सब कुछ बड़ा ही रोमांचक था। अपने सप्तअश्व रथ पर सवार हो बाल सूर्य के आने की घड़ी आ गई थी।

प्यार का भूत

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प्रेम करना कोई गुनाह नहीं है, प्रेम में जाति-धर्म, ऊंच-नीच का भी बंधन नहीं है, पर जीवन भर के साथ के लिए जिंदगी में सही निर्णय लेना बहुत जरूरी है, जो तुम्हें लेना है। सच्चा प्यार, विश्वास, संस्कार, परिवार, रीति-रिवाज आदि ये सब वैवाहिक जीवन के आधार हैं।

जंग जिंदगी की

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“कुछ दिन बाद डॉ. अनूप स्वयं को थोड़ा स्वस्थ महसूस करने लगे। उन्हें अपने मरीज याद आने लगे थे। वे कोरोना वायरस के दुष्प्रभाव को खुद भुगतचुके थे। उन्होंने कोरोना के रोगियों को बचाने की मन में ठान ली और पुन... मरीजों की सेवा करने हेतु अपना रक्षा- कवच पहन कर, योद्धा बन हॉस्पीटल पहुंच गए। जिंदगी की जंग फिर शुरू हो गई थी!”

कैसे बढ़ाएं परिवारों में आपसी मेल मिलाप

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परिवारों के बीच प्रेम बनाए रखने के लिए आवश्यक है कि हम एक दूसरे के सुख-दुःख में भागीदार बनें। बिना किसी अपेक्षा के एक दूसरे की सहायता करें। अपने ही अपनों के काम आते हैं। पर यदि अपने अपनों के काम नहीं आते तो वे गैर बन जाते हैं। दूरी बनाने से रिश्तों में कटुता स्वाभाविक रूप से आ जाती है। यह कटुता फिर मिटाए नहीं मिटती।

एक नज़र चांद पर

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गोरा चिट्टा, गोल-मटोल चंद्रमा सम्पूर्ण सृष्टि को प्रकाश, शीतलता, अमृत तत्व आदि प्रदान करके सबका उपकार करता है। यही कारण है कि चांद को लेकर न जाने कितने मिथक, कितनी कहानियां, कितने गीत और कल्प कथाएं इस सृष्टि में प्रचलित हैं।

छुट्टियों में बच्चों को व्यस्त और मस्त रखने के कुछ सुझाव

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बचपन जीवन की नींव है , अतः नींव को मजबूत बनाने के लिए माता- पिता की भूमिका बहुत ही अहम है। माता-पिता को अनुशासन और कठोर अनुशासन के बीच के रेखा को बनाए रखते हुए बच्चों को व्यस्त रखना अति आवश्यक है जिससे उनकी शक्तियों, योग्यताओं, क्षमताओं का सही विकास हो सके।

ममता की डोर

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“जब रिश्तों में स्वार्थ की भावना निहित हो जाती है और अहंकार की तूती बजने लगती है तो रिश्तों की डोर ऐसी टूटती है, कि स्नेह के मोती लाख समेटने पर भी नहीं सिमट पाते।”

वनों की आत्मकथा

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“आज जब मानव वन महोत्सव मनाता है, पर्यावरण दिवस मनाता है और वन्य जीवों को सुरक्षित रखने के अभियान चलाता है, तो हमें आशा की एक धुंधली किरण दिखाई देती है। हमें ऐसी अनुभूति होती है कि मनुष्य संभवतः सजग हो रहा है। कभी-कभी ऐसा भी लगता है कि वह…

रिश्तों के नए नाम

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“उस दिन गरिमा का स्त्रीत्व सार्थक हो गया था। उसकी ममता का सागर फूट पड़ा और दूध की धारा से आंचल भीग गया था। उसने अपनी बेटी को जोर से सीने से चिपका लिया... ममता के मोती उसके गालों से लुढ़क कर बेटी के गालों पर आ गिरे थे।” गरिमा…

विश्वास के पंख

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रमाशंकर जी से सराहना के शब्द सुन कर नैना का मनमयूर विश्वास के रंगीन पंख लगा खुशी से नाचने लगा था। एक परम्परागत साड़ी उद्योग को नैना ने एक आधुनिक फैशन उद्योग में जो बदल दिया था...

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