नेतृत्व का प्रेरणा केंद्र और उसका प्रभाव

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स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आत्मविश्वास से भरा सम्बोधन सुनने के बाद देश की जनता के मन में एक चैतन्यमय आत्मविश्वास निर्माण हुआ है। यह उद्बोधन ऐसे नेता का था जिसका अधिष्ठान राष्ट्र विचारों से जुड़ा है, इसलिए देश के जनमन में विचारों की लहरें उठना स्वाभाविक ही है।

अलविदा कप्तान

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महेन्द्र सिंह धोनी की इसी सफल कप्तानी के कारण क्रिकेट की ऐसी कोई ट्रॉफी नहीं है जो भारत के पास न हो। उनकी कप्तानी में भारत टेस्ट क्रिकेट में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहले क्रमांक पर रहा। 50 ओवर के विश्वकप और चैंपियंस ट्रॉफी पर भारत का कब्जा रहा। भारत को 20-20 विश्वकप का पहला विश्वविजेता बनाने का श्रेय भी धोनी को ही जाता है।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020

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स्वतंत्र भारत में शिक्षा को लेकर समय समय पर बदलाव आते रहे । नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020, पुरानी राष्ट्रीय शिक्षा नीति 1986 को प्रस्थापित करेगी।यह 1968 और 1986 के बाद स्वतंत्र भारत की तीसरी शिक्षा नीति है।

कांग्रेस बेचारी, अंदरूनी कलह की मारी

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कांग्रेस का वर्तमान नेतृत्व इतना लचर, अक्षम व कमजोर है कि अपने ही नेताओं के बीच उत्पन्न स्वार्थप्रेरित अंदरूनी कलह से पार नहीं हो पा रही है। ऐसे समय में जनता यह निश्चित जानती है कि देश की बागडोर कौन ठीक तरह से सम्हाल रहा है। अन्य बातें व्यर्थ की हवाबाजी हैं।

एकात्मता की नींव का शिलान्यास

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भारत की संसदीय प्रणाली में हिंदुत्व के प्रस्थापन के भय से चलाए जाते थे। क्योंकि तथाकथित सेक्युलर इस बात से डरे हुए थे कि अगर भारत का मुखिया हिंदू है, हिंदुत्व उसकी आस्था का विषय है, यह स्थापित हो गया तो विश्वभर में भारत की छवि हिंदू राष्ट्र के रूप में उभरेगी और सभी तथाकथित सेक्युलर लोगों को अपनी दूकानें बंद करनी होंगी

पितांबरी की ओर से अयोध्या श्रीराममंदिर के लिए आर्थिक दान

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दि. 5 अगस्त 2020 यह दिन समस्त हिंदू बांधवों के लिए अत्यंत आनंद का, उत्साह का पावन, मंगल दिन है। 492 वर्षों के संघर्ष के बाद सभी हिंदुओं के श्रध्दास्थान मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभुश्रीरामचंद्रजी की जन्मभूमी पर इस दिन भव्य मंदिर निर्माण के लिए भूमिपूजन किया गया।

राम मंदिर विश्व-बंधुत्व और मानवता के लिए वरदान

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 अयोध्या में भव्य श्री राम मंदिर के शिलान्यास के अवसर पर प्रसिद्ध साध्वी ॠतंभरा से ‘हिंदी विवेक’ ने विस्तृत बातचीत की। साध्वीजी ने श्री राम के जीवन मूल्यों, जन जन की आस्था, वैश्विक परिवार भाव आदि भारतीय संस्कृति के मूल मूल्यों पर समेत नई शिक्षा नीति पर भी अपने विचार प्रकट किए। प्रस्तुत है इसी के महत्वपूर्ण अंशः

रामो राजमणि सदा विजयते

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जिस प्रकार रावण जैसी दुष्ट प्रवृत्ति पर विजय प्राप्त कर भगवान श्रीराम अयोध्या वापस लौटे थे, उसी प्रकार आज भी समाज की दुष्ट प्रवृत्तियों का अंत कर प्रभु श्रीराम फिर एक बार अयोध्या लौट रहे हैं। मंदिर के शिलान्यास का दिन करोड़ों हिंदुओं के लिए गर्व और खुशी का दिन होगा।

बाबरी विध्वंस से पड़ी भव्य श्रीराम मंदिर की नींव

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“इसका मुझे बहुत आनंद है कि मैं उस समय कार सेवा में गया था। वह मेरे जीवन का अविस्मरणीय गौरवमय दिन था। मैं स्वयं को सौभाग्यशाली मानता हूं कि मुझे राम काज करने का मौका मिला। उस स्वर्णिम दिन को स्मरण कर गर्व की अनुभूति होती है।”

धारा 370 और 35A की समाप्ति की प्रथम वर्षगांठ

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जम्मू-कश्मीर में धारा 370 व 35-ए को खत्म होकर इस वर्ष 5 अगस्त को एक वर्ष हो जाएगा। इस अवसर पर प्रस्तुत है उसकी पृष्ठभूमि।

मर्यादा की हर कसौटि पर खरे उतरे राम

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’मर्यादा पुरुषोत्तम’ की उपाधि एक बहुत महान और कठिन कर्तव्य है, और प्रभु श्री राम जीवन के हर पड़ाव पर अपने इस कर्तव्य पर बिल्कुल खरे उतरे हैं।

राम मंदिर का निर्माण राष्ट्र के आत्मविश्वास का पुनर्जागरण

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अयोध्या में प्रस्तावित राम मंदिर, 5 अगस्त को होने वाले उसके शिलान्यास, राम जन्मभूमि आंदोलन, और राम मंदिर को लेकर राष्ट्रीय अस्मिता से जुड़े प्रश्नों पर राम जन्मभूमि न्यास के कोषाध्यक्ष गोविन्ददेव गिरी महाराज से ‘हिंदी विवेक’ से हुई प्रदीर्घ और सीधी बातचीत के कुछ महत्वपूर्ण प्रस्तुत है।

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