जिहादी तालीम, जन्नत और 72 हुर

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श्रद्धा के 35 टुकड़े करने वाला कातिल आफताब यह बोल रहा है कि अगर फांसी भी चढ़ा तो भी जन्नत में जाऊंगा और वहां मुझे हूरे मिलेंगी। दैनिक जागरण में यह खबर भी प्रकाशित हुई थी कि आफताब ने पुलिस के सामने यह कहा कि श्रद्धा के साथ लिव-इन में रहते हुए भी उसके 20 हिंदू लड़कियों से रिश्ते बने थे। 2 अक्टूबर 2022 के दैनिक जागरण के राष्ट्रीय संस्करण में एक और समाचार छपा था। इंदौर में एक गर्भवती लड़की का गैंगरेप नौकरी दिलाने के बहाने किया गया। रेप करने के आरोप में सभी 4 मुसलमानों को अरेस्ट किया गया था। इसमें से एक मुसलमान जिसका नाम प्रिंस था वह लड़की से बलात्कार कर रहा था। लड़की ने उससे कहा कि वह गर्भवती है तो इस पर प्रिंस ने जवाब दिया कि हमारे समाज में यह सब चलता है और हिंदू लड़की से बलात्कार करने पर जन्नत नसीब होती है।

एनडीटीवी का पूर्वाग्रह और पत्रकारिता का पतन

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"एकोsहं द्वितीयो नास्ति" की अहंकारपूर्ण भावना से प्रेरित होकर उन्होंने सुनिश्चित किया कि चैनल पर केवल उन्हीं का चेहरा चमके। अन्य कोई चेहरा न बचे। धीरे-धीरे एनडीटीवी का न केवल संपादकीय विभाग पंगु हो गया, बल्कि स्क्रीन भी चेहरा-विहीन बन गया। चैनल के प्रबंधन की बुद्धि को भी ऐसा लकवा मार गया कि अपने पूर्वाग्रह-पूर्ण राजनीतिक एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए उसने उन्हें ही अपना हथियार बना लिया। फिर इस राह पर चलते-चलते एनडीटीवी प्रबंधन धीरे-धीरे इतना पंगु हो गया कि विभिन्न अर्थिक गवनों के मामलों में छापों से बचने के लिए भी उसे उसी का इस्तेमाल करना पड़ा। अपनी सारी शक्तियां लगाकर लॉबिंग करके उस व्यक्ति को एक अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार दिलवाया गया, ताकि यदि जांच एजेंसियों का शिकंजा और अधिक कसता है, तो इसे एक अंतरराष्ट्रीय मुद्दा बनाया जा सके कि भारत में सरकार मीडिया की आवाज़ को दबाने की कोशिश कर रही है। यह तरकीब कुछ हद तक काम भी आई और जांच एजेंसियों की कार्रवाइयों में ठहराव आता दिखा। लेकिन राजनीति में "तू डाल डाल मैं पात पात" का खेल चलता ही रहता है। आखिरकार एनडीटीवी को बिकने के लिए मजबूर होना पड़ा और यहां से डॉ. प्रणय रॉय और डॉ. राधिका रॉय को जाना पड़ा है। 

ऑपरेशन पीओके के लिए तैयार भारतीय सेना

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अगर राजनीतिक दृष्टि से देखा जाए तो पाकिस्तान के ऊपर कार्रवाई करने का यह सबसे उम्दा समय है क्योंकि तालिबान और पाकिस्तान के बीच अफगानिस्तान के बॉर्डर पर तनाव का माहौल चल रहा है अफगानिस्तान की तालिबान आर्मी पाकिस्तान के कई सैनिकों को बॉर्डर पर कत्ल कर चुकी है और इसी हफ्ते तालिबान ने खुली फायरिंग करके पाकिस्तान के एक शहर के लोगों को मौत के घाट उतार दिया था। ऐसे समय में जब पाकिस्तान अपनी पश्चिमी सीमा पर भयंकर दबाव झेल रहा है पूर्वी सीमा पर भारत को दबाव बनाने की रणनीति पर काम करना चाहिए और एक समय सीमा तय करनी चाहिए ताकि पीओके को वापस लिया जा सके क्योंकि तभी पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में मौजूद शारदा पीठ के दर्शनों का सौभाग्य हिंदुओं को प्राप्त होगा।

ऋषि सुनक एवं उनसे पूर्व के राष्ट्र प्रमुख

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ऋषि सुनक का इंग्लैंड का प्रधान मंत्री बनना तो एक बानगी मात्र है। इससे पहले समय-समय पर विश्व के हर कोने में भारतवंशी राष्ट्र प्रमुख होते रहे हैं परंतु ऋषि का इस पद तक पहुंचना इसलिए बहुत अर्थ रखता है कि वे उस ग्रेट ब्रिटेन की सत्ता के शिखर पर पहुंचे हैं जिसने भारत पर 200 वर्षों तक राज किया था।

अराजकता से घिरा पाकिस्तान

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पाकिस्तान की राजनीति में हिंसा हमेशा से ही बड़ा रोल निभाती रही है। प्रशासन के सभी अंगों के बीच की तनातनी के कारण वहां विकास की लहर कायदे से पहुंच ही नहीं पाई। वहां की आंतरिक उथल-पुथल उनके द्वारा पोषित आतंकवाद की छाया भी हम पर हमेशा पड़ती रही है, परंतु वर्तमान भारत सरकार ने पाकिस्तान को हर मोर्चे पर शिकस्त देने की तैयारी कर ली है।

विश्व में बजता भारतवंशियों का डंका

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एक भारतवंशी का किसी यूरोपीय देश, खासकर ब्रिटेन का प्रधान मंत्री बनना बड़े गर्व की बात है। भारतवंशियों की विशेषता है कि वे जहां भी गए वहां पर भारतीय मूल्यों के विस्तार के साथ ही साथ उस स्थान के विकास में अपना पूर्ण योगदान दिया। प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी जी का प्रयास है कि उन भारतीयों का मौलिक योगदान भारत की श्री में वृद्धि करे तथा भारत की प्रतिभा का पलायन रुके।

नृशंस हत्या के पीछे की संस्कृति

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पूर्वनियोजित योजना और समाज के सहयोग से हिंदू लड़कियों को बरगलाकर आबादी बढ़ाने की परम्परा मुस्लिम समाज की सहज प्रवृत्ति बन चुकी है। इसी कड़ी में एक पैंतरा जुड़ गया है, शादी की बात करने वाली लड़की की नृशंस हत्या कर देना। इस तरह के मामलों में चाहे लड़का हो या लड़की, शिकार हिंदू ही होता है।

यह प्रेम नहीं, लव जिहाद है

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श्रद्धा के साथ हुई बर्बर घटना ने समूचे देश को झकझोर कर रख दिया है। अब समय आ गया है कि पूरा हिंदू समाज लव जिहाद के विरुद्ध खड़ा हो ताकि किसी भी लड़की के इस प्रकार के झुकाव के शुरुआती दौर में ही लगाम लगाया जा सके। उससे भी पहले एकजुट होकर ऐसा सार्थक प्रयास किया जाए कि लड़कियों का झुकाव ही इस तरफ न हो सके।

संविधान, लोकतंत्र और अमृत महोत्सव

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निश्चित रूप से दुनिया में हमारी साख के पीछे हमारा मजबूत संविधान और विश्व का सबसे बड़ा एवं सशक्त लोकतंत्र ही हैं, जो दुनिया के लिए आश्चर्य, विश्वास के साथ स्वीकार्यता की कसौटी पर खरा उतर कर भारत को विश्व गुरू की ओर अग्रसर कर रहा है।

मुंबई संकल्प २०२२ : न भूलेंगे, न माफ करेंगे

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आतंकियों का प्रयास था कि भारत की आर्थिक राजधानी मुंबई को आतंकित कर देश की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाया जाए तथा ताज होटल और लियोपोल्ड होटल जैसी जगहों को हमले का केंद्र बनाने का प्रमुख मकसद था कि दुनिया भर के देशों की नजर में भारत को एक असुरक्षित राष्ट्र साबित करवाया जाए. पर इसमें उनकी करारी हार हुई तथा उनके आकाओं के चेहरे से नकाब भी हट गया. उक्त बातें महाराष्ट्र के उप मुख्य मंत्री देवेन्द्र फडणवीस ने मुंबई के कोलाबा में स्थित ताज होटल के बॉलरूम में पांचजन्य द्वारा आयोजित कॉन्क्लेव में कहीं. उसी  कार्यक्रम के एक सत्र में केंद्रीय मंत्री जनरल वी. के. सिंह ने बताया कि 2008 में सतर्कता विभाग ने 12 सिमकार्ड की जानकारी दी थी. उनमें से 4 सिम 26/11 के हमले में प्रयोग किये गए थे. अगर उस जानकारी को हलके में न लिया गया होता को इतने बड़े हादसे को रोकने की सम्भावना बढ़ जाती.

संविधान के प्रति आरएसएस का दृष्टिकोण

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हमारा संविधान, हमारे देश की चेतना है। इसलिए उस संविधान के अनुशासन का पालन करना, यह सबका कर्तव्य है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ इसको पहले से मानता है”। संघ के इतिहास में यह पहली व्याख्यानमाला थी, जिसमें सभी प्रकार की विचारधाराओं के प्रमुख लोगों को आमंत्रित किया गया था और उनके समक्ष संघ के सर्वोच्च अधिकारी ने अपना दृष्टिकोण रखा था। सरसंघचालक डॉ. भागवत न केवल यह बता रहे हैं कि संविधान के अनुशासन का पालन संघ पहले से करता आया है अपितु वे अन्य से भी आग्रह कर रहे हैं कि संविधान का पालन करना सभी अपना कर्तव्य समझें। नागरिक अपने संविधान के मर्म को जानें, इसके लिए सरसंघचालक आग्रह करते हैं कि हमें अपने बच्चों को जीवन के प्रारंभिक चरण में ही संविधान पढ़ाना चाहिए। (हिन्दी मासिक पत्रिका -विवेक के साथ साक्षात्कार– 9 अक्टूबर, 2020)

वामपंथी वैचारिक लड़ाई का व्यापक रणक्षेत्र

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वामपंथियों ने समूचे भारतवर्ष को एक वैचारिक युद्ध क्षेत्र में बदल दिया है। वे संघ की सनातन संस्कृति को आगे ले जाने वाली नीतियों को लेकर हमेशा मुखर रहते हैं तथा उन्हें देश का लोकतंत्र खतरे में नजर आने लगता है। इन देश विरोधी प्रवृत्तियों का पोषण नेहरू और इंदिरा के राज में ही शुरू हो गया था।

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