मनुष्य जीवन में त्याग का महत्व

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एक समय की बात है। एक नगर में एक  सुरेन्द्र नामक कंजूस व्यक्ति रहता था। उसकी कंजूसी सर्वप्रसिद्ध थी। वह खाने, पहनने तक में भी कंजूस था। एक बात उसके घर से एक कटोरी गुम हो गई। इसी कटोरी के दुःख में कंजूस ने 3 दिन तक कुछ न खाया।…

जल्दबाजी कर पगडंडियों में न भटकें !!

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"जीवन" एक वन है, जिसमें "फूल" भी हैं और "काँटे" भी । जिसमें "हरी-भरी सुरम्य घाटियाँ" भी है और "ऊबड़-खाबड़ जमीन" भी । अधिकतर वनों में वन्य पशुओं और वनवासियों के आने_जाने से छोटी-मोटी "पगडंडियाँ" बन जाती हैं । सुव्यवस्थित दीखते हुए भी ये जंगलों में जाकर लुप्त हो जाती…

चिरस्थायी संपदा – “चरित्र-निष्ठा”‼️

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"चरित्र" ही जीवन की आधारशिला है । "भौतिक" एवं "आध्यात्मिक" सफलताओं का मूल भी यही है । "विश्वास भी लोग उन्हीं का करते हैं, जिनके पास "चरित्र" रूपी सम्पदा है ।" वस्तुतः "चरित्र" मनुष्य की मौलिक विशेषता एवं उसका निजी उत्पादन है । व्यक्ति इसे अपने बलबूते विनिर्मित करता है…

तेरा विश्वास शक्ति बने, याचना नही

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हे प्रभो! मेरी केवल एक ही कामना है कि मैं संकटों से डर कर भागूँ नहीं, उनका सामना करूँ। इसलिए मेरी यह प्रार्थना नहीं है कि संकट के समय तुम मेरी रक्षा करो बल्कि मैं तो इतना ही चाहता हूँ कि तुम उनसे जूझने का बल दो। मैं यह भी…

सदा प्रसन्न रहिए, ईश्वर को याद रखिए‼️

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आप संसार के कर्मनिष्ठ महापुरुषों से शिक्षा ग्रहण कीजिए, अपने को धैर्यवान बनाइए, काम को खेल की तरह करिए, कठिनाइयों को मनोरंजन का एक साधन बना लीजिए । अपने मन के स्वामी आप रहिए, अपने घर पर किसी दूसरे को मालिकी मत गाँठने दीजिए। चिंता, शोक आदि शत्रु आपके घर…

प्रभु बिराजते है भक्ति के भाव में

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एक साधु महाराज श्री रामायण कथा सुना रहे थे। लोग आते और आनंद विभोर होकर जाते। साधु महाराज का नियम था रोज कथा शुरू करने से पहले "आइए हनुमंत जी बिराजिए" कहकर हनुमान जी का आह्वान करते थे, फिर एक घण्टा प्रवचन करते थे। एक वकील साहब हर रोज कथा…

निर्गुण और सगुण में भेद होने के बावजूद ईश्वर एक है

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सुमेर की आशाओं पर पानी फिर गया। वह सोचकर आया था कि भगवान के साथ सेल्फी लेगा। परंतु मंदिर में मोबाइल फोन लेकर जाना मना था। उसने मंदिर कार्यालय में जाकर कोशिश की लेकिन अनुमति नहीं मिली। वह दर्शन करने के बाद अपना सा मुंह लेकर लौट रहा था कि…

ताकि आलोक की साधना हमारा संस्कार बने

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हमारी मान्यता है कि प्रभु श्रीराम लंका विजय के पश्चात् सीता, लक्ष्मण व वानर भालू योद्धाओं के साथ अयोध्या वापस लौटे तो अयोध्यावासियों ने पूरे नगर को दीपों से सजाकर अपनी प्रसन्नता उजागर की. तभी से उस अवसर की स्मृति में प्रतिवर्ष दीप-

सत्यसाई के कर्मयज्ञ का चमत्कार

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पुट्पर्ती के श्री सत्य साईबाबा अपने‡आप में एक चमत्कार थे। उन्होंने जनसेवा को जो विशाल रूप दिया उसकी कोई मिसाल नहीं है। स्वास्थ्य, शिक्षा, ग्राम विकास, पेयजल आपूर्ति आदि क्षेत्रों में हुआ कार्य चकित करने वाला है। इस सेवा का एकमात्र उद्देश्य केवल जनता कल्याण था।

आज भी राम-फ्रकल्फ के रंग में रंगे हैं सुहास बहुलकर

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वरिष्ठ चित्रकार सुहास बहुलकर से इन दिनों बात करें तो वे चित्रकूट और रामदर्शन-फ्रकल्फ की ही बात करेंगे। हालांकि उनका वह एसाइनमेंट कब का फूरा हो चुका है फर आज भी उनकी मन चित्रकूट और राम मेंं ही रमा हुआ है।

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