कोर्ट से किसान संगठन को फटकार, गाजीपुर बार्डर से किसानों के तंबू हटाए गए

किसान आंदोलन को लेकर गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई जहां कोर्ट ने किसान संगठन को फटकार लगाते हुए सड़कों को जल्द से जल्द खाली करने के लिए कहा है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि किसानों को विरोध करने का अधिकार है लेकिन वह सड़क या परिवहन को बंद नहीं कर सकते हैं। वहीं किसान संगठन की तरफ से पेश हुए वकील ने कहा कि किसानों की तरफ से सड़क नहीं रोकी गयी है बल्कि पुलिस प्रशासन ने सड़क को बंद किया हुआ है। कोर्ट ने आज की सुनवाई में यह साफ किया कि सड़कों को खाली किया जाना चाहिए लेकिन इसकी अगली सुनवाई 7 दिसंबर को फिर से की जायेगी। 
कोर्ट के इस आदेश के बाद गाजीपुर बॉर्डर से किसानों के तम्बू हटाए जा रहे है जिससे फिर से सड़क पर आवागमन चालू हो जाएगा। हालांकि किसानों की तरफ से यह कहा जा रहा है कि सड़कों को पुलिस ने बंद किया था और अब वही खाली कर रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट की तरफ से यह साफ किया गया कि विरोध करना आपका अधिकार है लेकिन इसके लिए आप सड़कों को जाम नहीं कर सकते है। कोर्ट ने फटकार लगाते हुए कहा कि कानून को लेकर सब कुछ साफ है फिर भी यह विरोध क्यों जारी है। दरअसल कोर्ट में सड़कों को खाली करने के लिए एक याचिका दायर की गयी थी जिसमें कहा गया था कि आंदोलन के नाम पर सड़कों को जाम किया जा रहा है जिस पर कोर्ट की तरफ से कुल 43 किसान संगठनों को नोटिस जारी किया गया था लेकिन सुनवाई के दौरान सिर्फ कुछ ही किसान संगठन पहुंचे। 
 
सरकार की तरफ से पेश वकील तुषार मेहता ने कोर्ट में दलील देते हुए कहा कि कृषि कानून पर पूरी तरह से रोक लगा दी गयी है लेकिन किसान संगठन अभी भी इस पर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं और इसका राजनीतिकरण कर रहे हैं। तुषार मेहता ने लाल किला हिंसा का भी जिक्र किया और  कहा कि किसान संगठन के द्वारा हिंसा को बढ़ावा दिया गया और कानून हाथ में लिया गया है। 

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