आखिर विपक्ष क्यों करता है सभी बिल का विरोध?

संसद का शीतकालीन सत्र सोमवार को हंगामे के बीच शुरु हुआ और 12 सांसदों के निलंबन के साथ खत्म हुआ। विपक्षी दलों के 12 राज्य सभा सांसदों को पूरे सत्र के लिए निलंबित कर दिया गया है। इन सभी सांसदों पर सदन में हंगामा करने का आरोप लगा है। मानसून सत्र के दौरान कांग्रेस, टीएमसी और शिवसेना के 12 सांसदों ने जमकर हंगामा किया था जिसके बाद सभी को शीतकालीन के पूरे सत्र के लिए निलंबित कर दिया गया। वहीं निलंबन के बाद अब विपक्षी दल इसका विरोध कर रहे हैं और इस सत्र के बहिष्कार करने की धमकी भी दे चुके हैं। हिन्दी में एक कहावत है कि पहले चोरी और फिर सीनाजोरी, पहले तो विपक्षी दलों ने जमकर संसद की गरिमा को तार तार किया और स्पीकर के बेल तक घुस गये और अब निलंबन के बाद संसद के बहिष्कार की धमकी दे रहे हैं। 

मोदी सरकार के कार्यकाल में जितने भी सदन चले उन सभी में कांग्रेस सहित तमाम विपक्षी दलों ने हंगामा किया और सभी बिल का विरोध किया। आखिर विपक्ष की रणनीति क्या है? वह किस को आधार बना कर राजनीति कर रही है, सरकार में विपक्ष का रोल बहुत अहम होता है वह सरकार को हमेशा गलत कार्यों के लिए रोकती है और जनता के अधिकारों की रक्षा करती है लेकिन इस बार का विपक्ष कुछ अलग ही धारा के साथ बहता जा रहा है यह ना तो देशहित की बात करता है और ना ही जनता के अधिकारों की बात करता है। यह सिर्फ सरकार की बुराई करने का काम कर रहा है और सभी बिल का विरोध कर रहा है। हद तो तब हो गयी जब सरकार ने पाकिस्तान पर सर्जिकल स्ट्राइक किया तब भी विपक्ष विरोध कर रहा था जबकि पाकिस्तान ने कितने आतंकी हमले देश पर कराए हैं यह सभी को पता है। 
आखिर विपक्ष की रणनीति क्या है? सरकार ने जब किसानों के हित में 3 कृषि कानून बिल रखा तब विरोध किया और अंत तक किसानों को भड़काते रहे और जब सरकार ने सभी की बात मानते हुए बिल वापस लेने का काम किया तब सदन में बिल वापसी का भी विरोध किया। सरकार और विपक्ष का काम होता है देश का विकास करना। सरकार देश और जनता के लिए काम करती है जबकि विपक्ष इस बात पर ध्यान देता है कि सरकार किसी भी तरह की मनमानी ना करे लेकिन अब यह बीते दिनों की बात हो चुकी है। अब हर कोई सिर्फ सत्ता के लिए काम करता है और अगर कोई भी ईमानदारी से काम करना चाहता है तो उसे करने नहीं दिया जाता है। यह हाल सिर्फ सरकार का नहीं है बल्कि प्रशासनिक स्तर पर भी ऐसे ही हालात है अगर कोई भी अफसर ईमानदारी के साथ काम करना चाहता है तो उसे वहां से हटा दिया जाता है क्योंकि उसकी ईमानदारी की वजह से तमाम लोगों की दुकानदारी बंद होने लगती है। 
 
उप राष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने मंगलवार को राज्यसभा में कहा कि सभी सांसदों का निलंबन नियमों के तहत किया गया है। सिर्फ चेयरमैन का फैसला नहीं है बल्कि यह पूरे सदन का फैसला है। निलंबित सांसदों ने सदन की गरिमा का ध्यान नहीं रखा इसलिए उन्हें सदन से बाहर किया गया है और अगर वह अपने इस कार्य के लिए माफी मांगते हैं तो उनका निलंबन वापस हो सकता है। वहीं विपक्ष की तरफ से माफी से इंकार कर दिया गया है। राहुल गांधी ने एक ट्वीट कर कहा कि आखिर किस बात के लिए माफी मांगनी चाहिए जबकि निलंबित सांसद जनता के सवाल उठा रहे थे। अब राहुल गांधी से कोई यह सवाल करे कि आखिर यह सवाल पूछने का कैसा तरीका है? जिन सांसदों को जनता चुनकर भेजती है वह टेबल पर खड़े होकर सवाल क्यों पूछते हैं? वह स्पीकर बेल में जाकर पेपर क्यों फाड़ते है? संविधान में तो आरक्षित सीट पर बैठकर सवाल पूछने की बात कही गयी है।     

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