दीपावली के परंपरागत मगर हटके पकवान

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दीपावली के शुभ अवसर पर घर-घर में मीठे नमकीन और चटाखेदार पकवान बनते है। जैसे लड्डू, बर्फी, गुझिया, सेव, चकली, चिवड़ा आदि। पारंपरिक पकवानों का अपना स्वाद है। मगर क्यों ना इस वर्ष परंपरागत पदार्थ कुछ अलग तरीक से बनाएं ठीक वैसे ही जैस बाजार में मिलते हैं, तो स्वाद भी बदलेगा, नयापन भी रहेगा। लोग तारीफ करगें सो अलग...

बदलती परंपराओं और त्यौहारों का नया स्वाद

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ट्रिंग... ट्रिंग... ट्रिंग... कॉलबेल बजी। उत्साह से नेहा ने दरवाजा खोला। अपनी चारों सहेलियों को देख नेहा का चेहरा खिल उठा। “कौन आया है बेटी?” मां भी कमरे से बाहर आ गई। नेहा ने गांव से आई अपनी मां का सभी सहेलियों से परिचय कराया। बातचीत चल निकली तो त्यौहारों पर आकर अटक गई कि…

हमारे त्यौहारों में छिपा गहन विज्ञान

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त्यौहारों को मनाने के पीछे गहन विज्ञान है। इसका उद्देश्य मौसम बदलने पर स्वास्थ्य की देखभाल, पर्यावरण को स्वच्छ रखना, लोगों के जीवन में खुशियां लाकर, मिलजुलकर भाईचारा बनाए रखना है। इनके वैज्ञानिक कारणों पर हमें गौर करना चाहिए।

चटपटा नाश्ता

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गर्मियों के दिन हैं। बच्चों की छुट्टियां चल रही हैं। उन्हें शाम को भूख लग जाती है। कई बार शाम को मेहमान भी आ जाते हैं। हमेशा वही पोहा, उपमा, इडली, समोसा, वडा किसी को नहीं सुहाता। क्यों ना ऐसा चटपटा नाश्ता बनाया जाए जो नया हो बच्चों के साथ-साथ बड़ों को पसंद आए।

गर्मी से बेहाल न हों नौनिहाल

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गर्मियों का मौसम चल रहा है, घर से बाहर झुलसानेवाली धूप तप रही है, बच्चो की गर्मी की छुटियां भी शुरू हो गई हैं। हर माता पिता बच्चों के प्रति जागरुक रहते हैं, उनकी देखभाल भी करते हैं, परंतु इतनी सर्तकता के बावजूद, बच्चों को गर्मी में होनेवाली बीमारियां घेर…

गर्मियों में पाएं चेहरे की चमक, रहें कूल

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धूप से न केवल त्वचा बदरंग हो सकती है, झुलस सकती है अथवा पसीने से दुर्गंध आ सकती है। इसीलिए आजमाइये इन नुस्खों को ताकि गर्मी में भी आपकी त्वचा दमकती रहे।

कचरे का करिश्मा

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घर में निकलने वाले गीले कचरे से घर में ही कम्पोस्ट बनाई जा सकती है| इससे न केवल घरेलू कचरे की समस्या दूर हो जाएगी, बल्कि बड़े पैमाने पर करें तो लाभ भी होगा|

संक्रांति पर्व

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संक्रांति का त्यौहार सामाजिक संबंध दृढ़ करने, आपस में मिलने जुलने, तनाव दूर कर, खुशियां फैलाने वाला त्यौहार है. यह पर्व केवल भारत ही नहीं, थाईलैंड, म्यांमार, कंबोडिया और श्रीलंका में भी पूरी श्रद्धा के साथ मनाया जाता है.

बदलती परंपराओं और त्यौहारों का नया स्वाद

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आज की युवा पीढ़ी, परंपराओं के साथ भले ही हाथों में हाथ डाल कर ना चल रही हो परंतु उन्हें जिंदा रखने की हसरत उनमें है। बस उनका देखने का नजरिया बदल गया है। बदलाव और नयापन हमेशा अच्छा होता है। इससे समाज उन्नति की ओर बढ़ता है। ट्रिंग... ट्रिंग... ट्रिंग... कॉलबेल बजी। उत्साह से नेहा ने दरवाजा खोला। अपनी चारों सहेलियों को देख नेहा का चेहरा खिल उठा। ‘‘कौन आया है बेटी?’’ मां भी कमरे से बाहर आ गई। नेहा ने गांव से आई अपनी मां का सभी सहेलियों से परिचय कराया। बातचीत चल निकली तो त्यौहारों पर आ

ऋतुओं की रानी बारिश

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सूर्यदेवता के कोप से धरती जली जा रही थी। सूर्यदेवता आसमान में चढ़ते ही जा रहे थे। घरों और सड़कों पर मानो आग बरस रही थी। बिजली भी चली गई थी। पंखा झलने वाले हाथ थकने लगे थे। दोपहर की झपकी आखों से कोसों दूर थी। लू चल रही थीं। सडकें तवे के समान तप रही

दो नावों पर सवार

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महिलाओं को सुपर वुमन बनने में और खुद को नजरअंदाज करने में महानता का अहसास होता है। यह सोच बदलनी होगी। कामकाजी महिला हो तो घर के सभी की मिलजुलकर काम करने की जिम्मेदारी बढ़ती है। इस नए परिवेश को अपनाए बगैर और कोई चारा नहीं है। प्रिया की सुबह की गहमागहमी, अफ

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