किसान बिल विरोध के बीच सरकार ने जारी की नई MSP

सरकार ने जारी की नई MSP

किसान बिल को लेकर सरकार और विपक्ष आमने सामने आ चुका है। सरकार ने बहुमत से बिल को दोनों सदनों में पास कर दिया है लेकिन विपक्ष  लगातार इसका विरोध कर रहा है। वहीं पूरे देश में भी इस बिल का विरोध बढ़ता जा रहा है। जिसके बाद सरकार ने भी रिकवरी करनी शुरू कर दी है लगातार बढ़ते विरोध के बीच सरकार ने रबी फसलों की नई न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) जारी कर दिया। सरकार के इस फैसले से जहां किसानों को बड़ी राहत मिल सकती है वहीं विरोधी पक्षों के हमले भी कम हो सकते है।   
 
केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने मीडिया को जानकारी देते हुए नई MSP का ऐलान किया। कृषि मंत्री ने कुल 6 फसलों की बढ़ी हुई एमएसपी की जानकारी दी और कहा कि सरकार के इस फैसले से किसानों को बड़ी राहत होगी। कृषि मंत्री ने कहा कि किसानों के हित में मोदी सरकार ने एक और निर्णय लिया है जिसके तहत न्यूनतम समर्थन मूल्य पर ख़रीददारी जारी रहेगी और सरकार द्वारा लागू की गई नई दरो से किसानों को करीब 106% का लाभ होगा। 
 
सरकार की तरफ से जारी नई दर

केंद्र सरकार की तरफ से गेहूं का समर्थन मूल्य 1975 रुपए प्रति क्विंटल घोषित किया गया जिसमें ₹50 प्रति क्विंटल की वृद्धि की गई है। चना का समर्थन मूल्य 5100 प्रति क्विंटल घोषित किया गया इसमें ₹225 प्रति क्विंटल की वृद्धि हुई है। जौ का समर्थन मूल्य 1600 प्रति क्विंटल घोषित किया गया है इसमें ₹75 प्रति क्विंटल की वृद्धि की गई है। मसूर का समर्थन मूल्य ₹5100 घोषित किया गया जबकि सरसों का समर्थन मूल्य ₹4600 घोषित किया गया है।

इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी किसानों को मिनिमम सपोर्ट प्राइस को लेकर आश्वासन दिया था और कहा था कि मैंने पहले भी कहा था और एक बार फिर से कहता हूं की एमएसपी की व्यवस्था जारी रहेगी। नए बिल के लागू होने के बाद भी सरकार की तरफ से किसानों से अनाज ख़रीदा जाएगा। सरकार की तरफ से देश के अन्यदाताओं को किसी भी तरह की कठिनाई नहीं होगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विपक्ष पर भी हमला बोला और कहा देश के किसानों को गुमराह करना बंद करें। 


न्यूनतम समर्थन मूल्य


केंद्र सरकार कृषि लागत और मूल्य आयोग की सिफारिश पर कुछ फसलों की बुवाई सत्र से पहले ही न्यूनतम समर्थन मूल्य की घोषणा करती है जिससे किसान को यह निश्चित होता है कि बाजार में गिरावट के बाद भी उनके अनाज को सरकार द्वारा निर्धारित दाम जरुर मिलेगा। इसके जरिए सरकार उनका नुकसान कम करने की कोशिश करती है। इसके साथ ही न्यूनतम समर्थन मूल्य निर्धारित होने से किसान यह सुनिश्चित कर लेता है कि उसे अपनी फसल की लागत कम से कम निर्धारित दर से कम नहीं मिलेगी।   

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