किसान बिल विरोध के बीच सरकार ने जारी की नई MSP

Continue Readingकिसान बिल विरोध के बीच सरकार ने जारी की नई MSP

सरकार ने जारी की नई MSP किसान बिल को लेकर सरकार और विपक्ष आमने सामने आ चुका है। सरकार ने बहुमत से बिल को दोनों सदनों में पास कर दिया है लेकिन विपक्ष  लगातार इसका विरोध कर रहा है। वहीं पूरे देश में भी इस बिल का विरोध बढ़ता जा…

आखिर क्यों हो रहा है कृषि बिल का विरोध ? NDA की एक मंत्री ने दिया पद से इस्तीफा

Continue Readingआखिर क्यों हो रहा है कृषि बिल का विरोध ? NDA की एक मंत्री ने दिया पद से इस्तीफा

कृषि बिल से एनडीए में फूट किसानों से से जुड़े दो बिल अब केंद्र सरकार के लिए मुसीबत बनने नजर आ रहे है क्योंकि इस बिल के लोक सभा में पारित होने के बाद एनडीए गठबंधन में ही फूट नजर आ रही है। एनडीए गठबंधन की कई पार्टियों ने इस…

सिक्किम में जैविक खेती एक भुलावा

Continue Readingसिक्किम में जैविक खेती एक भुलावा

जैविक खेती के प्रति अति मोह और राजनीतिक स्टंटबाजी के कारण सिक्किम में अनाज उत्पादन बहुत तेजी से घटता चला गया। राज्य को दूसरे राज्यों से बड़े पैमाने पर अनाज लाना पड़ता है। बढ़ती आबादी के संदर्भ में इस स्थिति पर गौर और पुनर्विचार किया जाना चाहिए।

खेती का सच

Continue Readingखेती का सच

वर्तमान समय में भारतीय कृषि हरित क्रांति के समय की अपेक्षा ढांचागत स्तर पर अलग तथा मजबूत है। यहां कुछ ऐसा है जो हमें भारतीय कृषि के प्रति आशान्वित करता है। जर्मनी की राजनीतिक विज्ञानी एलिजाबेथ नेवेल नुमानन ने ‘चुप्पी का वर्तुल‘ नामक सिद्धांत पेश किया है, जिसका माने है…

प्रकृति के अनुपम सौंदर्य से लदा असम

Continue Readingप्रकृति के अनुपम सौंदर्य से लदा असम

पूर्वोत्तर भारत प्रकृति के सौंदर्य से इतना लदाबदा है कि मन के कैनवास से वह चित्र कभी नहीं मिटेगा। पूर्वोत्तर के ये आठ राज्य हैं- असम, मेघालय, अरुणाचल, मणिपुर, नगालैण्ड, मिजोरम, त्रिपुरा और सिक्किम। हर राज्य की अपनी संस्कृति, अपना पेहराव और अपनी बोली-भाषाएं और खानपान है। इतनी विविधता तो अन्य किसी भी देश में नहीं मिलेगी। भीड़-भाड़ से दूर और प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर पूर्वोत्तर पर्यटकों को खूब पसंद आ रहा है तो इसकी ठोस वजह भी है। पूर्वोत्तर राज्यों का परिवेश, मौसम और आत्मीयता पर्यटकों को आकर्षित कर लेती ह

आजादी के ७० साल और खेती

Continue Readingआजादी के ७० साल और खेती

  देश इस समय अधिक कृषि उत्पादन और किसानों की बदतर होती जा रही माली हालत से जूझ रहा है। उत्तर प्रदेश में भी इससे जुदा हालत नहीं है। जाहिर है कि निर्धारित मूल्यों पर निजी या सरकारी किसी भी क्षेत्र में किसानों की जिंसों के विक्रय के लिए ईमानदार ढांचे

किसान अपनी जमीन फिर से तलाशें

Continue Readingकिसान अपनी जमीन फिर से तलाशें

जोत घटती जा रही है। जो है, उसमें रासायनिक खाद, कीटनाशकों की मात्रा लगातार बढ़ानी पड़ रही है। इससे खेत ऊसर हो रहे हैं। खेत की मिट्टी, उसके नीचे का पानी और उसमें से पैदा होनेवाली फसल में जहरीलापन आ गया है

End of content

No more pages to load