आरएसएस की तालिबान से तुलना जावेद अख्तर को पहुंचाएगी जेल!

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सेवा कार्यों का जिक्र समाज में बहुत ही कम होता है, जबकि संघ को कट्टर हिंदुत्व के लिए हमेशा से निशाने पर लिया जाता है। क्या ऐसे लोगों को सेवा कार्य नजर नहीं आता या फिर वह जानबूझकर उसे नजर अंदाज करते है। यह जरुरी नहीं है कि हर कोई एक ही विचारधारा का हो लेकिन यह भी सही नहीं है कि आप किसी और विचारधारा के लोगों को गाली दें या फिर उसकी तुलना तालिबान जैसे आतंकी संगठन से करें। खासकर तब जब वह विचार धारा किसी धर्म से जुड़ी हो। 
 
जावेद अख्तर जैसे तमाम लोग हैं जो आरएसएस पर आसानी से बयान देते है और उसकी तुलना तालिबान से कर देते हैं लेकिन उन्हे यह भी समझना चाहिए कि अगर आरएसएस तालिबानी सोच रखता तो जावेद अख्तर के बयान के दूसरे दिन उनका गला शरीर से अलग कहीं और मिलता। यह संस्कार और संयम ही है जो इतनी बड़ी बात के बाद भी किसी तरह से उत्तर नहीं दे रहा है। फिलहाल आरएसएस की तुलना वाले बयान पर अब जावेद अख्तर की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं क्योंकि उनके खिलाफ मुंबई के मुलुंड पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज करा दी गयी है। वकील संतोष दुबे की तरफ से शिकायत दर्ज कराई गई है और यह कहा गया है कि जावेद अख्तर का बयान इंडियन पीनल कोड की धारा 499 और 500 के अंतर्गत आता है। जावेद अख्तर को एक लीगल नोटिस भी भेजा गया था जिसमें उनसे सात दिनों के अंदर जवाब मांगा गया था लेकिन उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया जिसके बाद मुलुंड पुलिस स्टेशन में उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई है।   
जावेद अख्तर के बयान से उन लोगों की धार्मिक भावना आहत हुई है जो संघ से ताल्लुक रखते हैं या जो लोग संघ के लिए कार्यरत हैं। हालांकि यह कोई पहली बार नहीं है इससे पहले भी जावेद अख्तर अपने बयानों को लेकर चर्चा में रहे हैं। उनके ज्यादातर बयान विवादित ही रहे है जिस पर उन्हें ट्रोल भी किया गया है। जावेद अख्तर ने एक इंटरव्यू के दौरान कहा था कि आरएसएस और तालिबानी लोगों की मानसिकता एक ही बराबर है इसलिए संघ का समर्थन करने वालों को आत्मचिंतन करना चाहिए क्योंकि आरएसएस और तालिबानी मानसिकता में कोई अंतर नहीं है। जावेद अख्तर के इस बयान के बाद उन्हें सोशल मीडिया पर जमकर ट्रोल किया गया।

आपकी प्रतिक्रिया...