हरियाणा के सरकारी कर्मचारी क्यों नहीं ले सकते थे संघ में हिस्सा, खट्टर सरकार ने बदला नियम?

 

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने अपनी स्थापना के बाद से सिर्फ राष्ट्र प्रेम किया और लोगों की सेवा की, यह बात भी किसी से छिपी नहीं है लेकिन इन सब के बाद भी कुछ राजनीतिक पार्टियों के निशाने पर संघ हमेशा रहा है। हरियाणा सरकार की तरफ से वर्ष 1967 और 1980 में दो आदेश पारित किए गये थे जिसमें यह कहा गया था कि कोई भी सरकारी कर्मचारी संघ की शाखा में नहीं जा सकता है। उपरोक्त आदेश यह दर्शाते हैं कि तत्कालीन सरकारों को संघ से पूरी तरह से चिढ़ थी इसलिए उन्होंने अपनी नाकामी को छुपाने के लिए सरकारी कर्मचारियों पर आदेश पारित कर दिया था। कोई भी व्यक्ति सरकार की नौकरी करता है लेकिन उसकी अपनी निजी जिंदगी, विचार और भाव होते है और उस पर किसी का भी दबाव नहीं होना चाहिए। 
हरियाणा की मनोहर लाल खट्टर सरकार ने वर्ष 1967 और 1980 के इन दोनों आदेशों को वापस ले लिया जिसके बाद अब हरियाणा का कोई भी सरकारी कर्मचारी अपनी मंशा से संघ के कार्यों में शामिल हो सकता है। सरकार के पास काम करने वाले ऐसे तमाम लोग हैं जो समाज सेवा और जनसेवा करना चाहते हैं ऐसे लोगों के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ एक बड़ी उपलब्धि है। 1967 में जारी आदेश के वापस लेने के साथ ही अब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ हरियाणा में प्रतिबंधित संगठन नहीं रह गया। संघ अब हरियाणा में भी अपनी समाज सेवा का कार्य आगे बढ़ा सकेगा और लोगों को देश और सनातन धर्म के लिए जागरूक कर सकेगा।   
 
हरियाणा के मुख्य सचिव कार्यालय से 11 जनवरी 1967 को एक आदेश जारी किया गया था और कहा गया था कि आरएसएस और जमात ए इस्लामी में कोई भी सरकारी कर्मचारी हिस्सा नहीं लेगा। ऐसा करने वालों पर सेवा नियमों के तहत कार्रवाई की जायेगी। इस आदेश के करीब 3 साल बाद 4 मार्च 1970 को हरियाणा सरकार ने इस आदेश पर रोक लगा दी क्योंकि संघ के कार्यकर्ताओं ने इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी जिसके बाद सरकार को झुकना पड़ा। इसके बाद सरकार ने इंतजार किया और फिर से 2 अप्रैल 1980 को यह आदेश जारी किया कि जितने भी सरकारी कर्मचारी संघ से जुड़े हैं उनके खिलाफ कार्रवाई की जायेगी और यह आदेश पिछले 5 दशक से चला आ रहा है। 
वहीं हरियाणा सरकार के इस फैसले के बाद कांग्रेस सहित कई दलों ने हमला बोला है और आरोप लगाया है कि हरियाणा की सरकार संघ की पाठशाला है। हालांकि यह कोई पहली बार नहीं है इससे पहले भी कांग्रेस की तरफ से ऐसे आरोप लाखों बार लगाए जा चुके हैं। हरियाणा में वर्ष 2014 में भाजपा भारी बहुमत से सत्ता में आयी और मनोहर लाल खट्टर को वहां का मुख्यमंत्री बनाया गया। हालांकि खट्टर सरकार को भी यह आदेश बदलने में करीब 7 साल का समय लग गया। 

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