हरियाणा के सरकारी कर्मचारी क्यों नहीं ले सकते थे संघ में हिस्सा, खट्टर सरकार ने बदला नियम?

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  राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने अपनी स्थापना के बाद से सिर्फ राष्ट्र प्रेम किया और लोगों की सेवा की, यह बात भी किसी से छिपी नहीं है लेकिन इन सब के बाद भी कुछ राजनीतिक पार्टियों के निशाने पर संघ हमेशा रहा है। हरियाणा सरकार की तरफ से वर्ष…

जयप्रकाश नारायण जयंती विशेष – सवाल तो जेपी के चेलों से बनते ही है…!

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जेपी के महान व्यक्तित्व को लोग कैसे स्मरण में रखना चाहेंगे यह निर्धारित करने की जबाबदेही असल मे उनके राजनीतिक चेलों की भी थी। जेपी का मूल्यांकन उनके वारिसों के उत्तरावर्ती योगदान के साथ की जाए तो जेपी की वैचारिकी का हश्र घोर निराशा का अहसास कराता है। आजादी के…

विश्व-बंधुत्व की भावना को साकार करता एकात्म मानवदर्शन और पंडित दीनदयाल उपाध्याय

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सरलता और सादगी की प्रतिमूर्त्ति पंडित दीनदयाल उपाध्याय बहुमुखी एवं विलक्षण प्रतिभा के धनी थे। उनका जीवन परिश्रम और पुरुषार्थ का पर्याय था। वे कुशल संगठक एवं मौलिक चिंतक थे। सामाजिक सरोकार एवं संवेदना उनके संस्कारों में रची-बसी थी। उनकी वृत्ति एवं प्रेरणा सत्ताभिमुखी नहीं, समाजोन्मुखी थी। एक राजनेता होते…

भारतबोध के साथ वैश्विक कल्याण का पथ ‘एकात्म दर्शन’

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धरती के हर  मनुष्य के साथ  ठीक वैसा व्यवहार हो, जैसा हम दूसरों से अपने लिए चाहते हैं। परिवार, समाज,देश और यहां तक कि विश्व के सभी शासक अपने पर निर्भर लोगों के साथ उनके हित को ध्यान में रखते हुए एक जैसा व्यवहार करें को एकात्म मानव दर्शन का…

सिकुड़ती जा रही संसद में रचनात्मक बहस

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सत्रहवीं लोकसभा का 80% और राज्सभा का 74% स’ सदन के विभिन्न हिस्सों के प्रावधानों और हंगामें के कारण बर्बाद हो गा है। संसद की 1 दिन की कार्रवाई पर लगभग 2 करोड के आसपास रुपए खर्च होते हैं। जनता के टैक्स से जनता के लिए चलने वाली संसद को बाधित करना राष्ट्री अपराध जैसा है।

स्वतन्त्रता का मूल्य जानें : अपने दायित्व पहचानें

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नि:संदेह भारतीय संस्कृति विश्व की सबसे प्राचीन संस्कृति है किन्तु तमाम गुलामियों की पीड़ाओं को झेलने के बाद १५ अगस्त १९४७ को भारत एक आजाद राष्ट्र के रूप में विश्व फलक पर उभरा| जिन्होंने गुलामी के दंश को सहा है उनके लिए यह आजादी किसी उत्सव से कम न थी|…

भारत के राष्ट्रत्व का अनंत प्रवाह

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भारतीय दर्शन, भारत की राष्ट्र की अवधारणा अपने आप में समृद्ध और सम्पूर्ण है। इस प्रकार यह पुस्तक किसी भी राष्ट्र का भारतीय दर्शन समझाने वाले चिन्तक या जिज्ञासु के पुस्तकालय के लिए अत्यावश्यक है। मैं तो यहां तक कहूंगा कि यह पुस्तक सभी विभूषित विद्वानों और तथाकथित विद्वानों को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा भेंट की जानी चाहिए, ताकि उनकी आंखों और मस्तिष्क में जमी धूल कुछ तो साफ़ हो।

समान नागरिक संहिता की अनिवार्यता

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भाजपा ने अपने घोषणापत्र में वादा किया था कि ‘समान नागरिक संहिता’ का मसौदा सर्वोत्तम परंपराओं पर आधारित है और आधुनिक समय के साथ उनका सामंजस्य स्थापित करता है। यहां लैंगिक समानता तब तक नहीं हो सकती, जब तक भारत समान नागरिक संहिता नहीं अपनाता, जो सभी महिलाओं के अधिकारों की रक्षा करता है। बिल्कुल ऐसी ही बात न्यायमूर्ति प्रतिभा एम. सिंह ने हाल में मीणा याचिका की सुनवाई करते हुए कही है। उन्होंने कहा कि विवाह, तलाक, उत्तराधिकार आदि के कानून सबके लिए समान होने चाहिए।

नए विधेयकों पर पेगासस की छाया

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कांग्रेस सहित विपक्ष निहित राजनीतिक स्वार्थों के कारण जनसंख्या नियंत्रण विधेयक के विरोध में है और संसद के मानसून सत्र में उसका भूत निकलने का डर उसे सता ही रहा था कि दिल्ली उच्च न्यायालय ने देश में समान नागरिक संहिता की वकालत करते हुए केंद्र को इसे लागू करने के लिए समुचित कदम उठाने के लिए कह दिया।

चुनाव परिणाम के स्पष्ट संदेश

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जिला पंचायत चुनाव को भले हम आप विधानसभा चुनाव की पूर्वपीठिका न मानें, लेकिन, आत्मविश्वास का यह माहौल योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में भाजपा को पूरे उत्साह से विधानसभा चुनाव में काम करने को प्रेरित करेगा। किसी भी संघर्ष में, चाहे वह चुनावी हो या फिर युद्ध का मैदान, परिणाम निर्धारित करने में आत्मविश्वास और उत्साह की सर्वाधिक महत्वपूर्ण भूमिका होती है। यह स्थिति भविष्य की दृष्टि से भाजपा के पक्ष में जाती है और स्वाभाविक ही विपक्ष के विरुद्ध।

भारत की अर्थव्यवस्था और बेरोजगारी!

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भारत एक कृषि प्रधान देश! भारत एक कृषि प्रधान देश माना जाता है लेकिन अब यहां भी ऐसे हालात हो गये है कि अगर देश की जीडीपी गिरती है तो बेरोज़गारी भी तेजी से पैर पसारने लगती है। कोरोना वायरस महामारी के दौरान देश में महीनों तक पूर्ण रूप से…

रसातल की ओर जाती राजनीति

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इससे पहले पीएम मोदी और शरद पवार की अलग-अलग मुद्दों को लेकर कई बार मुलाकात भी हो चुकी है। जिसके बाद दोनों नेताओ एक दूसरे की तारीफ भी की थी लेकिन फिलहाल हवा का रुख बदला-बदला सा नजर आ रहा है

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