नए शीर्ष पर दूरसंचार

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मानव सभ्यता जिस प्रकार तरक्की कर रही है, 5जी तकनीक का होना भविष्य के लिए अति आवश्यक है। भविष्य की कई बड़ी योजनाएं इसके आधार पर अपनी बुनियाद को जमीनी आकार दे सकती हैं। हालांकि इसके विकिरण से होने वाले नुकसानों को लेकर लोगों के मन में चिंता होना जायज है। अतः यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि मानव सहित पशु-पक्षियों पर रेडिएशन का दुष्प्रभाव न हों।

आप करामाती ऍप करिश्माई

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बीते डेढ़ वर्ष में कोरोना काल के दौरान जब लोग घरों में कैद रहने को विवश हो गए, तो ये ऐप उनका बड़ा सहारा बने और दुनिया को इसका एहसास हुआ कि अगर इंटरनेट न होता, वेबसाइट्स न होती और ये मोबाइल एप्स न होते, तो सच में दुनिया की चाल एकदम से थम जाती।

डिजिटल खुफियागिरी का नया दांव

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भारत सरकार ने चीनी मोबाइल कंपनियों को कारोबार के नाम पर जासूसी करने के सिलसिले में बाहर का रास्ता दिखाया है। उम्मीद करें कि इससे जासूसी के जरिए जो अहम सूचनाएं देश से बाहर जा रही थीं, उन पर प्रभावी रोक लग सकेगी।

डिजिटल रनवे से एक नई उड़ान

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने जिस तरह से डिजिटल इंडिया कार्यक्रम को आगे बढ़ाया है और पोर्ट ब्लेयर ही नहीं, देश की ढाई लाख ग्राम पंचायतों को इंटरनेट के ब्रॉडबैंड कनेक्शन से जोड़ने के लक्ष्य के मद्देनजर काम हो रहा है, उससे उम्मीद है कि देश के समग्र विकास की राह निश्चित ही खुलेगी।

सारे आकाश के ‘विक्रम’

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लैंडर विक्रम की हार्ड लैडिंग की घटना भारत के चंद्र मिशन पर नाकामी की एक हल्की सी छाया अवश्य छोड़ती है, लेकिन अब तक के अंतरिक्ष अभियानों के बल पर भारत ने जो मुकाम हासिल किया है वह हमें भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के संस्थापक डॉ. विक्रम साराभाई की अवश्य याद दिलाता है।

तकनीकें, जो बदल देंगी जिंदगी

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तकनीक की दुनिया बहुत तेजी से बदल रही है। वाईफाई से कई गुना तेज लाईफाई, सूर्य प्रकाश को ऊर्जा में बदलने वाले सेंसर, बिग डाटा का चमत्कार, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, इंटरनेट ऑफ थिंग्स, आईओटी जैसी प्रौद्योगिकी ऐसी बाजीगरी दिखाएंगी कि जिसकी सपनों में भी हमने कल्पना नहीं की थी।

देश की थाली में उतरता चांद

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भारत बेशक अभी इंसान को सिर्फ अंतरिक्ष में भेजने का ख्वाब देख रहा है, उसकी आंखों से चंद्रमा पर इंसान को उतारने का सपना अभी दूर है, लेकिन उसका दूसरा चंद्रयान पृथ्वी के इकलौते प्राकृतिक उपग्रह यानी चंद्रमा की नई खोज के मिशन पर 22 जुलाई, 2019 को रवाना हो चुका है। एक दशक बाद ही दूसरा चंद्रयान भेजने के लिए भी कलेजा चाहिए। खास तौर से तब, जबकि हर कोई गरीबी का हवाला देकर हमारे स्पेस प्रोग्राम पर सवाल उठाता हो और खुद अमेरिका चांद पर दोबारा जाने की योजनाओं को लंबे अरसे तक स्थगित रख चुका हो।

देश को नई ताकत देता मिशन शक्ति

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आने वाले समय में जरूरी नहीं कि कोई जंग धरती पर लड़ी जाए, बल्कि उसका मैदान स्पेस (अंतरिक्ष) भी हो सकता है। इस लिहाज से भारत को अंतरिक्ष में भी सैन्य या युद्धक क्षमता से लैस होना होगा, जिसकी एक ठोस शुरुआत मिशन शक्ति से हो गई है। आने वाले वक्त में अंतरिक्ष में चुनौतियां कितनी बढ़ने वाली हैं,

विज्ञान-तकनीक के नए आसमान पर भारत

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   वर्तमान केंद्र सरकार के कार्यकाल में खास तौर से विज्ञान और तकनीक के मामले में देश ने जो कुछ हासिल किया है, वह उल्लेखनीय है। अंतरिक्ष बाजार में देश ने अपनी ताकत दिखा दी है। कैशलेस लेनदेन में भारी इजाफा हुआ है। अब देश आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस की मदद से हथियारों के विकास में भी कदम रख रहा है।

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