मिशन शक्ति- नई सुरक्षा नीति

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पाकिस्तान की भारत विरोधी मानसिकता से इन आंतरिक राष्ट्रद्रोहियों तथा भारतीय शत्रुओं की मानसिकता तथा विचारधारा ज्यादा खतरनाक है। इन पर हम मिसाइल या बम नहीं दाग सकते हैं, इनका सफाया हमें इनकी भारत विद्रोही मानसिकता को बदल कर ही करना होगा।

अटलजी से संवाद के दुर्लभ क्षण

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“जब स्कूल में था तब मैंने अटलजी का ‘सपनों के भारत’ पर बौद्धिक सुना था। बाद में एक फौजी अधिकारी के रूप में विभिन्न अवसरों पर उनसे संवाद करने या उन्हें सुनने के दुर्लभ अवसर प्राप्त हुए। इस अंतराल में मैंने उनमें एक राष्ट्रपुरुष के दर्शन किए।”

महाशक्तियों का शतरंज

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उत्तर कोरिया की मगरूरी वास्तव में चीन की मगरूरी है। अमेरिका तथा चीन के बीच शतरंज का एक खेल उत्तर कोरिया को प्यादा बनाकर खेला जा रहा है। उसी प्रकार चीन व भारत के बीच शतरंज का मोहरा चीन ने पाकिस्तान को बनाया है। राष्ट्रतंत्र का एक अकाट्य सिद्धांत है, यदि आप गलत जड़ों को पानी देंगे तो आपको अच्छे फल कहां से व कैसे मिलेंगे? आज कुछ राष्ट्र ऐसे हैं जो पूरे विश्व के लिए समस्या बन गए हैं। इनमें चीन, उत्तर कोरिया तथा पाकिस्तान प्रमुख हैं। पूरे विश्व में अराजकता, असुरक्षा तथा अव्यवस्था का वातावरण बन गया है। यहां त

आक्रमण का नया तरीका – घुसपैठ

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घुसपैठ कई तरह की है। सामाजिक, आर्थिक, धार्मिक जैसे उसके कई आयाम हो सकते हैं। इसके प्रति सरकार और जनता दोनों को सतर्क रहने की आवश्यकता है। हमारी ढिलाई भविष्य की एक बड़ी और न सुलझने वाली समस्या को न्योता दे रही है इसे नहीं भूलना चाहिए।  मानव इतिहास इस वास्तविकता का साक्षी है कि हमारे राष्ट्रीय, राजनैतिक, सामाजिक, धार्मिक, आर्थिक, शैक्षणिक, जीवन में उत्पन्न होने वाली समस्याओं का एकमात्र कारण घुसपैठ ही होता है। घुसपैठ का असर राष्ट्रीय, राजनैतिक, सामाजिक, धार्मिक व आर्थिक जीवन पर अवश्य ही पड़ता है। अनेक बार प

कश्मीर में पनपा आतंकवाद और पाकिस्तान

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  राष्ट्रजीवन तथा राजनैतिक जीवन का एक महत्वपूर्ण सिद्धांत है ‘यदि आपने जहरीली जड़ों को सींचा तो आपको अच्छे फल कैसे मिलेंगे’? कश्मीर में फैले आतंकवाद का अध्ययन तथा विश्लेषण करने पर यह कटु सत्य सामने आता है। १९६५ के पाकिस्तान-भारत युद्ध

सवाल पाकिस्तान के वजूद का

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पाकिस्तान के लिए इस समय सब से बड़ी आवश्यकता यह है कि अपने-आप को, अपनी युवा पीढ़ी को आने वाली पीढ़ियों को अमेरिका तथा पश्चिमी देशों के प्रकोप से बचाए। अमेरिका का नया नेतृत्व पाकिस्तान को अवश्य दंडित करेगा। तब चीन भी पाकिस्तान की रक्षा नहीं कर पाएगा। पाकिस्तान का एक और विघटन होगा। फिर पाकिस्तान को अपना वजूद बनाए रखने के लिए भारत के पास ही आना होगा।

समर्थ ग्राम, समर्थ भारत

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२१ वीं सदी में एक महत्वपूर्ण परिवर्तन देखने को मिल रहा है। स्मार्ट सिटी, स्मार्ट शहर की कल्पना जोर पकड़ रही है। शहरों का व्यवस्थापन, शासन व्यवस्था, राष्ट्रीय प्रगति, उन्नति का मार्ग बन रही है। यह तर्क संगत नहीं लगता है। भारत की सम्वन्नता, उद्योजकता यद्यप

पाकिस्तान कितने टुकड़ों में बंटेगा?

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आने वाले समय में पाकिस्तान चार भागों में विघटित हो सकता है- स्वतंत्र सिंध, बलोचिस्तान, खैबर प्रदेश तथा पाकिस्तान का पंजाब। पाक अधिकृत कश्मीर का विलय, भारत में अवश्य होगा। गिलगिट-बाल्टिस्तान एक स्वतंत्र राष्ट्र बनेगा। परन्तु भारतीय दूरगामी हितों की दृष्टि से पाकिस्तान का छोटे-छोटे टुकड़ों में विभाजन भारत के हित में होगा यह संदेहास्पद है।

कुशासन से सुशासन की ओर अग्रसर भारत

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राष्ट्रीय राजनीति में एक कहावत है - ‘यथा राजा तथा प्रजा’| जिस प्रकार की क्षमता, दक्षता, कार्यकुशलता, कर्तव्यपरायणता, राजा दिखाता है प्रजा भी उसी प्रकार व्यवहार करती है| एक और कहावत है- ‘राजा कालस्य कारणम्’| किसी भी राज्य में, किसी भी राष्ट्र में जो परिस्थिति निर्माण होती है

चाबहार समझौता विश्व शांति का भी मार्ग

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ईरान के चाबहार बंदरगाह के भारत द्वारा विकास के समझौते से इतिहास में एक नया अध्याय लिखा गया है। चीन द्वारा पाकिस्तान में विकसित किए जा रहे ग्वादर बंदरगाह की यह काट तो है ही, लेकिन इससे भारत के व्यापार में आने वाली समुद्री परिवहन दिक्कतें भी दूर होगी। चाबहार के विकास के साथ भारत, पाकिस्तान को टाल कर, सीधे भूमध्य सागर के देशों तक पहुंच सकेगा और इससे मध्यपूर्व व यूरोप के देशों में उसका दबदबा बढ़ जाएगा।

भ्रष्टाचार का फैलता कैंसर

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भ्रष्टाचार को राजनीतिक, शासकीय, संवैधानिक तथा अन्य प्रकार का संरक्षण व प्रोत्साहन प्राप्त होने के कारण ही, भ्रष्टाचार का कर्क रोग भारत भर में फैल गया है तथा भारत को दीमक की तरह चाट रहा है। फिर, अंदर से खोखले इस भारत की रक्षा कौन सी तोप, कौन सा युद्ध वायुयान ,कौन सा हेलिकॉप्टर करेगा?

आतंकवाद की नई चुनौती

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 पाकिस्तान की बागडोर तीन शक्तियों के हाथों में होती है- वहां की सेना, आई.एस.आई. तथा आतंकवादी संगठन। आतंकवादी संगठन तो पाकिस्तानी शासन का ही एक अंग है। अमेरिका और चीन जैसे बड़े राष्ट्र अपने राष्ट्रहितों के कारण पाकिस्तान की नकेल नहीं कसते हैं। भारत को अपनी लड़ाई खुद ही लड़नी होगी। कोई महाशक्ति या राष्ट्रसंघ आदि काम आएंगे इसकी कल्पना नहीं करनी चाहिए। दोनों मुल्कों में वार्ता तो होती रहनी चाहिए- दिल मिले न मिले, लेकिन हाथ मिलाते रहिए।

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