विकास मजबूरी – संतुलन जरूरी

Continue Readingविकास मजबूरी – संतुलन जरूरी

कुछ न होने वाला, डराओ मत, हमेशा नकारात्मक ही क्यों सोचते व बोलते हो, प्रकृति के पास अपार संसाधन हैं इसलिए उनके उपयोग पर रोक टोक न लगाओ आदि आदि। प्रकृति प्रेमी और पर्यावरणविद् अधिकांश: इसी तरह के जुमले सुनने के आदि होते हैं। जब प्राकृतिक आपदाएं आती हैं और…

“बिन पानी सब सून” कहावत कहीं वास्तविकता न बन जाए

Continue Reading“बिन पानी सब सून” कहावत कहीं वास्तविकता न बन जाए

ऐसा कहा जा रहा है कि आगे आने वाले समय में विश्व में पानी को लेकर युद्ध छिड़ने की स्थितियां निर्मित हो सकती हैं, क्योंकि जब भूगर्भ में पानी की उपलब्धता यदि इसी रफ्तार से लगातार कम होती चली जाएगी तो वर्तमान स्थानों (शहरों एवं गावों में) पर निवास कर…

मानव नहीं प्रकृति केंद्रित हो विकास

Continue Readingमानव नहीं प्रकृति केंद्रित हो विकास

आज पूरा विश्व प्रकृति के अंधाधुंध दोहन से होने वाले पर्यावरण परिवर्तन से परेशान है। इसलिए आवश्यकता है कि वनों के संरक्षण में तेजी लाई जाए तथा ऊर्जा के हानिरहित विकल्पों के शोध को प्राथमिकता दी जाए।

पर्यावरण संरक्षण से बचेगा मानव जीवन

Continue Readingपर्यावरण संरक्षण से बचेगा मानव जीवन

मानव जाति के संरक्षण के लिए पर्यावरण की सुरक्षा अत्यंत आवश्यक है। दिन-प्रतिदिन दूषित होते पर्यावरण की रक्षा एवं इसके संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से प्रति वर्ष 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जाता है। संयुक्त राष्ट्र द्वारा 1972 में इसकी घोषणा की गई…

जीवन में अमृत है पानी : जल है तो कल है

Continue Readingजीवन में अमृत है पानी : जल है तो कल है

मनुष्य का शरीर पंचभूत से निर्मित है। पंचभूत में पांच तत्त्व आकाश, वायु, अग्नि, जल एवं पृथ्वी सम्मिलित है।  सभी प्राणियों के लिए जल अति आवश्यक है। प्रत्येक प्राणी को जीवित रहने के लिए जल चाहिए। नि:संदेह जल ही जीवन है। जल के बिना जीवन की कल्पना करना असंभव है।…

मधुमक्खी से संचालित होता है प्रकृति का चक्र

Continue Readingमधुमक्खी से संचालित होता है प्रकृति का चक्र

आज पांचवा विश्व मधुमक्खी दिवस है। पर्यावरण प्रणाली में मधुमक्खियों के महत्व और उनके संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से हर वर्ष 20 मई को विश्व मधुमक्खी दिवस के तौर पर मनाया जाता है। इसे मनाने का प्रस्ताव स्लोवेनिया के बीकीपर्स एसोसिएशन के नेतृत्व में 20 मई 2017 को संयुक्त राष्ट्र के सम्मुख रखा गया था, जबकि…

भारतवर्ष के पर्यावरण को कैसे बचायें ?

Read more about the article भारतवर्ष के पर्यावरण को कैसे बचायें ?
WINTER HAVEN, FL (July 7, 2011) -- Look how far we’ve come! With just 100 days until Grand Opening on October 15, LEGOLAND® Florida has released a new batch of photographs as rides begin to appear at the park. From The Royal Joust to LEGO® Technic Test Track Coaster, construction crews are hard at work transforming the property into the interactive theme park geared toward families with children ages 2-12. (PHOTO/LEGOLAND Florida, Merlin Entertainments Group, Chip Litherland)
Continue Readingभारतवर्ष के पर्यावरण को कैसे बचायें ?

भारत के पर्यावरण को बचने के लिए कौन से पेड़ लगाएं कि ज्यादा लाभ हो और मेहनत सही दिशा में हो ? स्कंदपुराण में एक सुंदर श्लोक है : अश्वत्थमेकम् पिचुमन्दमेकम् न्यग्रोधमेकम्  दश चिञ्चिणीकान्। कपित्थबिल्वाऽऽमलकत्रयञ्च पञ्चाऽऽम्रमुप्त्वा नरकन्न पश्येत्।। अश्वत्थः यानि पीपल (100% कार्बन डाइऑक्साइड सोखता है) पिचुमन्दः यानि नीम (80%…

जीवन के लिए जरूरी है पृथ्वी को संवारना

Continue Readingजीवन के लिए जरूरी है पृथ्वी को संवारना

आज समूची दुनिया विश्व पृथ्वी दिवस मना रही है और यह कहीं न कहीं उस दिवस की वर्षगांठ है। जिसे सुरक्षित रखने की आज के समय में महती जरूरत है। गौरतलब हो कि पृथ्वी दिवस मनाने की शुरुआत 22 अप्रैल 1970 में हुई थी और इस वर्ष पृथ्वी दिवस का…

विश्व में विचार पर विचारवाद का संकट

Continue Readingविश्व में विचार पर विचारवाद का संकट

  विचार वह ऊर्जा बिंदु है जो शक्ति का काम करता है। बिल्कुल चाकू की तरह। एक सर्जन की हाथ मे हो तो जान बचाने के काम आता है और अनाड़ी के हाथ मे हो तो मर्डर करने की दुश्चिंता बनी रहती है। दुनियाभर के महान सामाजिक चिंतकों ने मानव…

प्रकृति बेचारी, विकास की मारी, हर चुनाव हारी!

Continue Readingप्रकृति बेचारी, विकास की मारी, हर चुनाव हारी!

सच में प्रकृति की अनदेखी वो बड़ी भूल है जो पूरी मानवता के लिए जीवन, मरण का सवाल है। बस वैज्ञानिकों तक ज्वलंत विषय की सीमा सीमित कर कर्तव्यों की इतिश्री मान हमने वो बड़ी भूल या ढिठाई की है जिसका खामियाजा हमारी भावी पीढ़ी भुगतेगी। इसे हम जानते हैं,…

वीरमाता गौरादेवी : ‘चिपको आंदोलन’ की जननी

Continue Readingवीरमाता गौरादेवी : ‘चिपको आंदोलन’ की जननी

आज पूरी दुनिया लगातार बढ़ रही वैश्विक गर्मी से चिन्तित है। पर्यावरण असंतुलन, कट रहे पेड़, बढ़ रहे सीमेंट और कंक्रीट के जंगल, बढ़ते वाहन, ए.सी, फ्रिज, सिकुड़ते ग्लेशियर तथा भोगवादी पश्चिमी जीवन शैली इसका प्रमुख कारण है।  हरे पेड़ों को काटने के विरोध में सबसे पहला आंदोलन पांच सितम्बर,…

बड़े जल संकट की तरफ बढ़ रही है दुनिया

Continue Readingबड़े जल संकट की तरफ बढ़ रही है दुनिया

भारत मे सदियों से जल संरक्षण की महत्ता रही है। हमारे देश में तो नदी ,तालाब और कुँआ पूज्यनीय रहें हैं लेकिन पिछले 100 सालों में कथित विकास के नाम पर हमनें भूजल और जल के स्रोतों को इतना दोहन किया कि पूरी दुनियाँ पीने के पानी की किल्लत से…

End of content

No more pages to load