जीवन के लिए जरूरी है पृथ्वी को संवारना

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आज समूची दुनिया विश्व पृथ्वी दिवस मना रही है और यह कहीं न कहीं उस दिवस की वर्षगांठ है। जिसे सुरक्षित रखने की आज के समय में महती जरूरत है। गौरतलब हो कि पृथ्वी दिवस मनाने की शुरुआत 22 अप्रैल 1970 में हुई थी और इस वर्ष पृथ्वी दिवस का…

प्रकृति बेचारी, विकास की मारी, हर चुनाव हारी!

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सच में प्रकृति की अनदेखी वो बड़ी भूल है जो पूरी मानवता के लिए जीवन, मरण का सवाल है। बस वैज्ञानिकों तक ज्वलंत विषय की सीमा सीमित कर कर्तव्यों की इतिश्री मान हमने वो बड़ी भूल या ढिठाई की है जिसका खामियाजा हमारी भावी पीढ़ी भुगतेगी। इसे हम जानते हैं,…

वीरमाता गौरादेवी : ‘चिपको आंदोलन’ की जननी

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आज पूरी दुनिया लगातार बढ़ रही वैश्विक गर्मी से चिन्तित है। पर्यावरण असंतुलन, कट रहे पेड़, बढ़ रहे सीमेंट और कंक्रीट के जंगल, बढ़ते वाहन, ए.सी, फ्रिज, सिकुड़ते ग्लेशियर तथा भोगवादी पश्चिमी जीवन शैली इसका प्रमुख कारण है।  हरे पेड़ों को काटने के विरोध में सबसे पहला आंदोलन पांच सितम्बर,…

हिमाचल प्रदेश की खूबसूरती और पूर्ण राज्य का दर्जा

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हिमाचल प्रदेश अपने पहाड़ी क्षेत्रों के लिए मशहूर है। हिमाचल का अर्थ होता है 'बर्फ से ढका हुआ क्षेत्र' और सर्दियों में यहां बर्फ की चादर देखने के लिए देश और विदेश से पर्यटक आते है। चार राज्यों की सीमाओं से घिरे हुए हिमाचल प्रदेश की राज्य बनने की अपनी एक कहानी…

जलवायु परिवर्तन परिषद परिणाम नेट जीरो ?

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  इस परिषद में पर्यावरणविदों को एक नया शब्द मिला है, नेट जीरो। इसकी संकल्प पूर्ति के लिए आधी सदी शेष है। यूरोप का ‘नेट जीरो’ लक्ष्य 2050 है तो चीन का 2060 अपेक्षित है। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सन 2070 तक ‘नेट जीरो’ के रूप में कार्बन मुक्त करने का उद्देश्य सामने रखा है। नेटजीरो की संकल्पना क्या वास्तविकता में परिवर्तित हो सकती है? या यह मात्र स्वप्न देखने जैसा ही रहेगा? इस पर भी चर्चा हो रही है। 

समस्त महाजन की आकाशगंगा का धु्रव तारा – परेश शाह

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भगवान की कृपा से समस्त महाजन संस्था में बड़ी संख्या में परोपकारी सज्जनों की लम्बी श्रृंखला है और उनमें से ही एक चमकता सितारा है समाजसेवी परेशभाई शाह, जो अपने सामाजिक कार्यों से पृथ्वी रूपी आकाशगंगा में ध्रुव तारे की तरह चमक-दमक रहे हैं।

हिमालय क्षेत्र में प्रकृति संरक्षण एवं आपदा प्रबंधन

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पहाड़ी क्षेत्रों में बादल का फटना एवं भूस्खलन एक साधारण घटना है, लेकिन केदारनाथ क्षेत्र में इतनी बड़ी आपदा पहली बार हुई है। इसी तरह से बादल का फटना, भूस्खलन, नदी की धारा बाधित होना, अल्पकालिक झील का निर्माण, झील का ध्वस्त होना एवं त्वरित बाढ़ का आना एवं अवसाद के अपवहित होने की घटना पर गंगोत्री हिमनदीय क्षेत्र में शोध अध्ययन किए गए हैं।

प्रकृति और अध्यात्म के सम्मोहन का सिद्ध मंत्र उत्तराखंड

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भारत देश विविधताओं से भरा है। अपने देश में भाषा, धर्म, जातियों-उपजातियों तथा रहन-सहन की विभिन्नता के कारण भारत के सामाजिक रंग-रूप में भी विविधता दिखाई देती हैं। भारत कि यह वैविध्यपूर्ण लोक संस्कृति ही भारतीय जीवन शैली की परिचायक है। रीति-रिवाज, वेशभूषा, खानपान, लोक-कथाएं, लोक-देवता, मेले, त्योहार, मनोरंजन के…

प्राकृतिक आपदा में ‘समस्त महाजन’ के राहत कार्य

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समस्त महाजन पिछले दो दशक से विभिन्न क्षेत्रों में कार्य कर रहा है। जैसे- जीव दया, पशु कल्याण, पर्यावरण संरक्षण, जल संरक्षण, मानव सेवा, गौ संरक्षण, ऑर्गेनिक खेती, संसाधन विकास, प्राकृतिक आपदा प्रबंधन एवं बचाव कार्य आज में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। संस्था के योगदान को देखते हुए उसे कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कारों से नवाजा भी जा चुका है।

भारी बारिश ने मचाया कहर, लोग पलायन करने को मजबूर

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देश में बारिश का कहर जारी है पिछले करीब 3 दिनों से लगातार बारिश हो रही है हालांकि इस बारिश से मुंबई और दिल्ली का हाल थोड़ा खराब है। दिल्ली में जहां जल जमाव से सड़कें रुक गयी है तो वहीं मुंबई में भी भारी बारिश की वजह से लोग अपने…

मोबाइल टावर ले रहा पक्षियों की बलि

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मोबाइल टावर से निकलने वाले हानिकारक रेडिएशन के दुष्परिणाम स्वरूप विभिन्न प्रकार के जीव-जंतु एवं अनेक पक्षियों की प्रजातियां लुप्त हो चली हैं और अब भारत में पक्षियों की 42 प्रजातियां लुप्त होने की कगार पर हैं। मोबाइल टावर से निकलने वाली हानिकारक रेडिएशन से जितना खतरा मानवों को है…

नौकरशाही में उलझे प्रदूषण के नियम

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केंद्र सरकार ने २०१५ के कड़े प्रदूषण नियमों को बदल कर उनमें ढील दे दी है. यह तो प्रदूषण पर आगे बढ़ने के बजाय पीछे लौटना हुआ. अतः २०१७ में संशोधित नियमावली को कचरे के डिब्बे में डाल कर २०१५ के मानकों को ही आदर्श के रूप में स्थापित कर उनका कड़ाई से पालन किया जाना चाहिए.

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