ज्ञान और श्रम का संयोग आवश्यक

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मनोबल का विकास ही  साहस, सूझबूझ, कुशलता, कलाकारिता, योग्यता का प्रतीक है, किंतु केवल बौद्धिक योग्यता ही मनुष्य को पूर्णतया संतुष्ट नहीं कर पाती । हृदय और उसके उद्गार ही ऐसे हैं, जिनकी आवश्यकता मनुष्य ही नहीं, साधारण जीवधारियों को भी होती है । प्रेम, स्नेह, वात्सल्य, श्रद्धा, निष्ठा, आस्था…

रिती या कुरिती ? पढ कर विचार करे…

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क्या नाचने गाने को विवाह कहते हैं? क्या दारू पीकर हुल्लड़ मचाने को विवाह कहते हैं? क्या रिश्तेदारों और दोस्तों को इकट्ठा करके दारु मीट की पार्टी को विवाह कहते हैं या डीजे बजाने को विवाह कहते हैं, नाचते हुए लोगों पर पैसा लुटाने को विवाह कहते हैं। घर मे…

भारतीय संस्कृति के कण कण में बसे है राम

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राम शब्द में दो अर्थ व्यंजित हैं। सुखद होना और ठहर जाना। अपने मार्ग से भटका हुआ कोई क्लांत पथिक किसी सुरम्य स्थान को देखकर ठहर जाता है। हमने सुखद ठहराव का अर्थ देने वाले जितने भी शब्द गढ़े, सभी में राम अंतर्निहित है, यथा आराम, विराम, विश्राम, अभिराम, उपराम,…

तेरा विश्वास शक्ति बने, याचना नही

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हे प्रभो! मेरी केवल एक ही कामना है कि मैं संकटों से डर कर भागूँ नहीं, उनका सामना करूँ। इसलिए मेरी यह प्रार्थना नहीं है कि संकट के समय तुम मेरी रक्षा करो बल्कि मैं तो इतना ही चाहता हूँ कि तुम उनसे जूझने का बल दो। मैं यह भी…

ज्ञानवापी परिसर में शिवलिंग!

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ज्ञानवापी में शिवलिंग मिलने की खबर ने देश की राजनीति को गरमा दिया है। हिन्दू पक्ष ने दावे की बात कही है वहीं कोर्ट ने भी शिवलिंग वाली जगह को सील करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने जिलाधिकारी, पुलिस कमिश्नर और सीआरपीएफ कमांडेंट को आदेश दिया है कि हर…

मनहूस दिन नहीं है अमावस

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Phases of the Moon: waxing crescent, first quarter, waxing gibbous, full moon, waning gibbous, third guarter, waning crescent, new moon. On a starry sky. The elements of this image furnished by NASA.
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धर्म को तोड़ मरोड़ कर पेश किये जाने की हम हमेशा बात करते हैं | अब जैसे एक वाक्य की कल्पना कीजिये “अमावस्या की काली रात थी !” इसकी कल्पना मात्र से ही किसी खतरे की घंटी दिमाग में बजने लगती है | अचानक मनहूस कुत्तों के रोने जैसी आवाज…

पंच महायोग का दुर्लभ अवसर 100 साल बाद

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अक्षय तृतीया पर्व को अखतीज और वैशाख तीज भी कहा जाता है। इस वर्ष यह पर्व 3 मई 2022  के दिन मनाया जाएगा। मूलतः इस पर्व को भारतवर्ष के खास त्यौहारों की श्रेणी में रखा जाता है। अक्षय तृतीया पर्व वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि के दिन…

वसई में भव्य रामनवमी शोभा यात्रा का आयोजन

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भये प्रगट कृपाला दीन दयाला कौसल्या हितकारी। हरषित महतारी मुनि मन हारी अद्भुत रूप बिचारी।। लोचन अभिरामा तनु घनस्यामा निज आयुध भुज चारी। भूषन वनमाला नयन बिसाला  सोभासिंधु खरारी।।  कह दुइ कर जोरी अस्तुति तोरी केहि बिधि करौ अनंता। माया गुन ग्यानातीत अमाना वेद पुरान भनंता।।  करुना सुख सागर सब गुन…

भारतबोध जागृत हो रहा है

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पिछले कुछ महीनों से भारतीय समाज में एक परिवर्तन दिखाई दे रहा है। इसे कुछ लोग सामाजिक ध्रुविकरण कह रहे हैं, कुछ लोग बंटवारे की राजनीति कह रहे हैं, कुछ लोग गंगा-जमुनी संस्कृति पर प्रहार मान रहे हैं। कर्नाटक में हिजाब प्रकरण के बाद हिंदू युवाओं द्वारा भगवा गमछे ओढ़ना,…

सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की छाया में गणतंत्र

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बदलाव की चेतना स्वतंत्रता संग्राम के दौरान भी देखने में आई थी। इसीलिए इसे भारतीय स्वाभिमान की जागृति का संग्राम भी कहा जाता है। राजनीतिक दमन और आर्थिक शोषण के विरुद्ध लोक-चेतना का यह प्रबुद्ध अभियान था। यह चेतना उत्तरोतर ऐसी विस्तृत हुई कि समूची दुनिया में उपनिवेशवाद के विरुद्ध मुक्ति का स्वर मुखर हो गया। परिणाम स्वरूप भारत की आजादी एशिया और अफ्रीका की भी आजादी लेकर आई।

एक अनवरत सांस्कृतिक प्रवाह है अखंड भारत

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कुल मिलाकर अगर हम अखंड भारत चाहते हैं तो भारतीय संस्कृति जो हिंदू संस्कृति है उसे अपना मानदंड बनाकर चलना होगा। दीनदयाल जी के अखंड भारत के स्वप्न् को साकार करने के आह्वान का आज पुन: स्मरण करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा था, ... हमें हिम्मत हारने की जरूरत नहीं। यदि पिछले सिपाही थके हैं तो नए आगे आएंगे।

काशी बना भारतीय संस्कृति के गौरव का प्रतीक

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के लोकार्पण के साथ इतिहास के एक महत्वपूर्ण अध्याय का निर्माण हुआ। प्रमुख संप्रदायों के संतों की मौजूदगी में महादेव का अनुष्ठान हुआ। गंगा घाटों के साथ शहर की प्रमुख भागों को सजाया गया था। काशी विश्वनाथ मंदिर के सात संपूर्ण कॉरिडोर के…

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