भारत की अर्थव्यवस्था और बेरोजगारी!


भारत एक कृषि प्रधान देश!

भारत एक कृषि प्रधान देश माना जाता है लेकिन अब यहां भी ऐसे हालात हो गये है कि अगर देश की जीडीपी गिरती है तो बेरोज़गारी भी तेजी से पैर पसारने लगती है। कोरोना वायरस महामारी के दौरान देश में महीनों तक पूर्ण रूप से लॉकडाउन लगा रहा जिससे संक्रमण पर तो तेजी से विराम लगा लेकिन उतनी ही तेजी से अर्थव्यवस्था गिरने लगी। सरकार के सामने अब अर्थव्यवस्था बचाने की भी चुनौती खड़ी थी तो सरकार ने अनलॉक की प्रक्रिया भी शुरु कर दी और लोगों को कड़े नियमों के साथ बाहर निकलने की आजादी मिलने लगी और लोग बाहर भी निकलने लगे। सरकार के इस फैसले से बाजार को राहत तो जरुर मिली लेकिन बावजूद इसके जीडीपी में 23 प्रतिशत की गिरावट देखने को मिली। इतनी बड़ी गिरावट पिछले 40 सालों में पहली बार देखने को मिल रही है। 

 
कोरोना ने बढ़ायी बेरोज़गारी
कोरोना महामारी की वजह से देश में बेरोज़गारी भी तेजी से बढ़ी है और देश का युवा वर्ग पूरी तरह से इस परेशानी से जूझ रहा है। लॉकडाउन के दौरान सभी कारखाने और कंपनियां पूरी तरह से बंद हो गयी जिसके बाद कंपनियों ने लोगों को निकालना शुरु किया और तब से बेरोज़गारी का सिलसिला जारी है। देश के बेरोज़गारी के आंकड़ों पर नजर डालें तो सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकॉनामी के आंकड़ों के मुताबिक सितंबर के पहले सप्ताह में शहरी बेरोज़गारी की दर 8.32 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है। लॉकडाउन की वजह से अभी तक करीब 12 करोड़ लोगों की नौकरी जा चुकी है जबकि कई लाख लोगों का खुद का रोज़गार भी बंद हो चुका है इसमें खासकर छोटे उद्योग जगत के लोग शामिल है।


बाजार में सुधार के संकेत- शक्तिकांत दास
भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने हाल ही में एक बैठक के दौरान कहा कि जिस तरह के हालात बन रहे है उससे तो यही लगता है कि जल्द ही भारत के बाजार में रौनक लौट सकती है लेकिन इस पर पूरी तरह से विश्वास भी नहीं किया जा सकता है। शक्तिकांत दास ने कहा कि बाजार में मजबूती आयेगी लेकिन इसमें थोड़ा समय लगेगा। शक्तिकांत दास ने कहा कि जिस तरह से बाजारों में सुधार हो रहा है उससे यह साफ होता है कि बाजार में जल्द सुधार दिखने लगेगा लेकिन लगातार देश में बढ़ते संक्रमण इस सुधार में बाधा बन रहे है। बाजार की गतिविधियों पर नजर डालें तो यह सकारात्मक दिख रहा है लेकिन दुनिया के बाकी बाजार भी संक्रमण से ग्रसित है जिससे भारतीय बाजार भी उभरने में नाकाम हो रहा है।
 
बेरोज़गारी एक चिंता या चुनावी मुद्दा?
विपक्ष की तरफ से लगातार गिरती अर्थव्यवस्था और बेरोज़गारी के लिए केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है जबकि यह सभी को मालूम है कि वर्तमान हालात के लिए किसी एक व्यक्ति को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता है। कोरोना महामारी के चलते भारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया के बाजार इससे परेशान है और लगातार अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर गिरावट देखने को मिल रही है। महाशक्तिशाली कहा जाने वाला अमेरिका भी इससे अछूता नही है वहीं पर भी सरकार ने लोगों को कम से कम ब्याजदर पर लोन दिया बावजूद इसके कई लाख लोग बेरोज़गार हो गये है। वैसे यह कोई पहली बार नहीं है जब देश में बेरोज़गारी बढ़ी है इससे पहले भी तमाम सरकारों ने इस मुद्दे पर चुनाव लड़ा है और कई बार विपक्षी दलों ने सरकार को घेरा है।

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