दीपावली और कालनेमि ..

बंधुओ, जैसे-जैसे हिंदुओं के त्यौहार समीप आते हैं, वैसे-वैसे ही कालनेमि नामक छद्म सेकुलर अपने बिलों से बाहर आकर हिंदू त्यौहारों के विरोध में अनाप-शनाप लिखना प्रारंभ कर देते हैं । होली में इनका पानी खत्म हो जाता है और दीपावली में पटाखों की आवाज से यह परेशान हो जाते हैं । दरअसल गत दो-तीन दशक से ये सेक्यूलर ऐसा षड्यंत्र क्यों रच रहे हैं, क्या कभी आपने इसका अध्ययन किया है ? आइए आज इस पर थोड़ा सा विचार-विमर्श अवश्य करें । भले ही हम आस्तिक या नास्तिक हों, हम होली दिवाली मनाते हों या नहीं मनाते हों, वह अलग बात है । वह हमारी श्रद्धा का विषय है । लेकिन इन षड्यंत्रकारियों का भंडाफोड़ करना भी हमारे लिए अत्यंत आवश्यक है ।

स्वतंत्रता के बाद जब भारत के सेकुलरों ने देखा कि 500 साल तक मुगलों के अत्याचार और 200 साल तक ईसाइयों के षड्यंत्रों के बाद भी भारत के हिंदू उसी उत्साह के साथ अपने सनातन जीवन को जी रहे हैं, तो इनका चिंतित होना स्वाभाविक था। क्योंकि मुगलों के अत्याचारों से अधिक तो ये कुछ कर सकते नहीं, तो फिर हिंदुओं को मानसिक रूप से इतना ही हीन-क्षीण कर दिया जाए कि ये लोग अपने धर्म व संस्कृति से विमुख हो जाएं । ये जान गए कि हिंदू धर्म व सनातन यदि न केवल जीवित है, बल्कि फल-फूल रहा है, तो उसके पीछे मूल कारण हमारी धार्मिक परंपराएं, आस्थाएं, मेले, पर्व और त्यौहार आदि हैं । इसके लिए सबसे बढ़िया उपाय है कि जो इनके श्रद्धा के केंद्र हैं, उसमें विज्ञान, पर्यावरण व संविधान आदि शब्दों को जोड़ते हुए, ऐसा षड्यंत्र रचा जाए कि हिंदू मूर्ख तो होते ही हैं और जो हिंदू जितना पढ़ा लिखा होता है, वह उतनी ही मूर्खता में जल्दी आ जाता है। तो फिर बजाए धर्म पर प्रहार करने के या होली, दिवाली की कमियां गिनने के उन विषयों को उठाइए, जिसके प्रभाव में यह बेवकूफ हिंदू जल्दी आ जाए ।

अब होली में कितना पानी व्यर्थ होता है ? आप 2 दिन अपने वाहन को मत धोइए या दो-तीन दिन अपने घर को मत धोइए । बस ! लेकिन यह चतुर सेकुलर ऐसा बबंडर मचाते हैं, जैसे कि हम होली में सातों समुद्रों को सोख देते हों। माना कि दीपावली में पटाखों के धमाकों से प्रदूषण पर असर पड़ता है, लेकिन भाई न्यू एअर या शादी विवाह या किसी मैच के जीतने या विवाद में पटाखे फोड़ने पर क्या प्रदूषण नहीं होता है ? कुछ वर्ष पहले प्रियंका चोपड़ा ने दीपावली में पटाखे नहीं फोड़ने की उपदेश दिया था और उसके बाद ही जयपुर में उसकै विवाह के रिसेप्शन में बताया जाता है कि दो-तीन किलोमीटर दूर तक पटाखों के धमाके होते रहे । आप अपनी दूषित मानसिकता के कारण हिंदुओं को कब तक और कितना बेवकूफ बनाओगे ? हाँ, कुछ लोग अपने को बुद्धिजीवी कहलाने के चक्कर में भी तोता रटंत लगाते हैं ।

आजकल दिल्ली में एक कालनेमि रोज टीवी पर आकर कहता है कि दीपावली में पटाखे न जलाएं, लेकिन पाकिस्तान से मैच हारने वाले दिन सीलमपुर में इसी कालनेमि के अनुयायियों ने पटाखे फोड़कर पाकिस्तान की जीत का जश्न मनाया । क्या इस कालनेमि या कथित सेकुलर या मीडिया ने इसका उल्लेख भी किया । अब काली शर्ट पहनकर दीपावली की शुभकामनाएँ देने वाले की हिंदुओं के प्रति असली मंशा क्या होगी ? कहने की आवश्यकता नहीं। बंधुओ, भारत में हम प्राचीनकाल से ही अपनी संस्कृति, सभ्यता, मानवता और गौरव का सम्मान करते रहे हैं । यदि दिल्ली में पराली के जलने से आजकल मौसम प्रदूषित हो रहा है, तो हम स्वयं इसका ध्यान रखते हैं, लेकिन हिंदुओं को उपदेश देने वाले ज्ञानचंदों व रायचंदों का जो मन प्रदूषित हो चुका है, उनको भी उनकी ही भाषा में जवाब देना अत्यंत आवश्यक है ।

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