दधीचि परम्परा के संवाहक

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देह दान के द्वारा महर्षि दधीचि ने समाज कल्याण का अप्रतिम कार्य किया था। उन्हीं के वंशज डॉ. दुर्गा प्रसाद दधीचि ने वर्तमान समय में रोगियों की सेवा हेतु ‘महर्षि दधीचि हास्पिटल’ को ‘संकल्प’ ट्रस्ट को दान करके उसी ऋषि परम्परा को आगे बढ़ाया है। ट्रस्ट द्वारा संचालित ‘श्रीमती पानबाई डायलेसिस सेन्टर’ किडनी के रोगियों का जीवन रक्षक बना हुआ है।

भावरूप राम

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मानवीय चेतना की चरम अवस्था में ‘राम’ नाम की अनुभूति और प्रतीति शब्दातीत हो जाती है। राम के इस आध्यात्मिक भावनात्मक स्वरूप का आचमन करने हेतु किसी भी प्राणी के लिए तपबल से अर्जित पुण्य नितान्त आवश्यक है।

इतिहास-सत्य का अनावरण करती पुस्तक

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कन्नड़ के प्रसिद्ध उपन्यासकार डॉ. एस. एल. भैरप्पा ने ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर महत्वपूर्ण उपन्यास ‘आवरण’ की रचना की है। मूलत: कन्नड़ के इस उपन्यास के दो वर्षों में ही तेईस संस्करण प्रकाशित हो चुके हैं।

पितांबरी: एक कामयाब उद्योग समूह

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अपने गुणवत्ता पूर्ण उत्पादनों के माध्यम से ‘पितांबरी’ ने आज न केवल सम्पूर्ण भारत वर्ष में अपितु विदेशी बाजारों और ग्राहकों के मन में भी महत्वपूर्ण स्थान बना लिया है।

पाकिस्तान का समाज और उसकी संस्कृति

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भारत की स्वतन्त्रता के साथ ही पाकिस्तान का जन्म हुआ। विभाजन की एक बारीक रेखा के अतिरिक्त उस समय ऐसा और कुछ नहीं था, जो दोनों देशों को मौलिक रूप से अलग करता हो। दोनों देशों की एक साझी विरासत थी।

भारतीय मजदूर संघ

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देश हित, उद्योग हित और मजदूर हित- इस त्रिसूत्री उद्देश्य के साथ भारतीय मजदूर संघ की स्थापना राष्ट्रवादी विचारक स्व. दत्तोपंत ठेंगड़ी द्वारा 23 जुलाई, 1955 को भोपाल में की गयी।

कुरसी तू बड़भागिनी

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दी साहित्य में व्यंग्य विधा ने एक लंबा रास्ता तय करके अपना प्रमुख स्थान अर्जित किया है। हिंदी के विद्वान जब पद्य को ही साहित्य की मुख्य धारा मानते थे और गद्य साहित्य को दोयम दर्जा देते थे, उस भक्तिकाल से समाज की कुरीतियों पर जो प्रहार किया था, वह व्यंग्य ही था।

श्रावण मास के लोकप्रिय पर्व

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तपती हुई ग्रीष्म ऋतु के अवसान पर कृष्ण रंग के मेघों को आकाश में उमड़ते-घुमड़ते देखकर पावस ऋतु के प्रारंभ में वर्षा की फुहार से आप्लावित और आनंदित होकर भारतीय लोक जीवन झूम उठता है।

मनोवांछित फलदायी वट सावित्री व्रत

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भारत एक धर्मप्राण देश है। यहां के जनजीवन में व्रत-पर्वोत्सव का बड़ा महत्व है। वर्ष के आद्य मास चैत्र से शुरू होकर अंतिम मास फाल्गुन तक अनेक व्रत आते हैं, जिन्हें पूरा परिवार-समाज निष्ठा और आस्था के साथ मनाता है।

अण्णा का गांव

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महाराष्ट्र का पूरा खानदेश क्षेत्र आर्थिक दृष्टि से अन्य क्षेत्रों की अपेक्षा एक पिछड़ा क्षेत्र है । पानी के अभाव में खेती अच्छी तरह से नहीं हो पाती। उद्योग-धंधों का भी समुचित विकास नहीं हो पाया है।

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