पर्यावरण की रक्षा और वैश्विक संस्थाएं

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पर्यावरण की रक्षा के लिए पूरे विश्व में विभिन्न सरकारी और गैर-सरकारी संस्थाएं कार्यरत हैं। यह एक तरह से जनता का संयुक्त अभियान है। इसलिए कि आने वाली भयावह स्थिति से निपटने के लिए अभी से सार्थक कदम उठाना जरूरी है।

हिंदी के विकास में गैर हिंदी भाषियों का योगदान

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भारत में विभिन्न बोलियों के रूप में लगभग सात सौ अस्सी भाषाएं प्रचलित हैं। इनको छियासठ लिपियों के द्वारा लिखा जाता है। भारत के संविधान द्वारा बाईस भाषाओं को मान्यता प्राप्त है। इनमें जनसंख्या, क्षेत्रीय विस्तार और बोलियों की संख्या की दृष्टि से हिंदी सब से

सिंहस्थ मेला ऐतिहासिकता एवं उपादेयता

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धर्मप्राण भारत के जनजीवन में कुम्भ, अर्धकुम्भ तथा सिंहस्थ का एक विशिष्ट स्थान है। ये पर्वहमें हजारों साल प्ाुरानी स्मृति और परम्परा से जोड़ते हैं। विविध विशेषताओं से तथा पौराणिक गाथाओं से संबंधित और श्रीमद्भागवत, विष्णु प्ा

पर्यावरण परिवर्तन एक वैश्विक संकट

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पृथ्वी के चारों ओर कई सौ किलोमीटर की मोटाई में व्याप्त गैसीय आवरण को ‘वायुमण्डल’ कहा जाता है। पृथ्वी की आकर्षण शक्ति के कारण ही यह वायुमण्डल उसके साथ टिका हुआ है।

बोलियां

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भारत एक बहुभाषा-भाषी देश है। स्वतंत्रता के उपरान्त भाषा के आधार पर ही राज्यों का गठन किया गया। भाषाओं को एक भौगोलिक सीमा में बांधने का कार्य किया गया।

विश्व सम्मेलनों से नहीं सुलझेगी पर्यावरण समस्या

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भौतिक उन्नति और भोगवादी प्रवृत्ति के कारण इस समय समूचा भूमण्डल पर्यावरण के संकट में घिर गया है। दुनिया भर के पर्यावरण शास्त्री, विशेषज्ञ, वैज्ञानिक और जनप्रतिनिधि जलवायु में हो रहे परिवर्तन से चिन्तित हैं। वैश्विक सम्मेलनों में विविध स्तरों पर इस संकट से निकलने की चर्चाएं हो रही हैं। किन्तु सबसे बड़ी विडम्बना यह है कि बड़े पैमाने पर पूरे विश्व को पर्यावरण संकट में डालने वाले धनी और सुविधाभोगी देश अपनी जिम्मेदारी से भाग रहे हैं।

भारत के समृद्धि की कहानी कहती पुस्तक

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भारत एक धर्मप्राण देश है। यहाँ का सम्पूर्ण जीवनचक्र धर्म के चतुर्दिक घूमता रहता है। धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष को पुरुषार्थ माना गया है। धर्म पूर्वक जीवन-यापन करते हुए अर्थ का उपार्जन करना और उसका त्यागपूर्ण उपभोग करते हुए मोक्ष के पथ पर अग्रसर होना ही नीति के अनुकूल माना गया है। धनोपार्जन के अनेक उपादानों का विवरण भारतीय वांङ्मय में बताया गया है।

विवाह का छल

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कोठीनुमा बंगले के बड़े हाल में सुमधुर कर्णप्रिय भारतीय संगीत बज रहा था। तबले और सितार के बीच बांसुरी की धुन मन को मोह रही थी।

मुंबई की लोकल गाड़ियों में गाना लोक गायकी का अनोखा अंदाज

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मुंबई की लोकल गाड़ियों में अनेक भजन मंडलियां वर्षों से यात्रा करती आ रही हैं। मध्य रेलवे के कसारा और टिटवाला तथा कर्जत और नेरल स्टेशनों एवं पश्चिम रेलवे के विरार और वसई आदि स्टेशनों से लोकल में चढ़ने वाली भजन मंडलियों के समूह गाड़ी में अपने आराध्य की प्रतिमा स्थापित करते हैं,

मजदुरों के विषय में सरकार उदासीन -उदय पटवर्धन

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भारतीय मजदूर संघ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्री उदयराव पटवर्धन अन्तरराष्ट्रीय श्रम संगठन- आई.एस.ओ.की वार्षिक महासभा में भाग लेकर जेनेवा से लौटे हैं। भारतीय मजदूरों के प्रतिनिधि के रूप में उन्होंने विश्वमंच पर देश के मजदूरों के विभिन्न मुद्दों को उठाया हैं। देश के मजदूरों की समस्याओं, सरकारी नीतियों और भारतीय मजदूर संघ के कार्यों पर उनसे विस्तार से की गयी दिनेश प्रताप सिंह की बातचीत

चिकित्सा के माध्यम से समाज सेवा सर्वोपरी – डॉ. विवेक देशपाण्डे

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भारतीय जनता पाटी, मुंबई द्वारा महानगर के चिकित्सकों का प्रकोष्ठ बनाया गया है। इसमें अस्पतालों, दवाखानों और ईएसआई के चिकित्सक शामिल हैं। इस प्रकोष्ठ के संयोजक डॉ. विवेक देशपाण्डेजी हैं।

राष्ट्रवाद से ओत-प्रोत भारतीय सिनेमा के सौ साल

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इसी महीने भारतीय सिनेमा के सौ साल पूरे हो रहे हैं। सन् 1912 ई. में दादा साहब फालके ने ‘राजा हरिश्चन्द्र’ फिल्म बनाकर भारत में फिल्म निर्माण की नींव रखी। यद्यपि उस समय की फिल्म मूक होती थी, किन्तु उनके विषय राष्ट्रवाद से ओत-प्रोत होते थे।

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