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भारत दुनिया के बाजारों पर काबिज हो -सतीश मराठे

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भारत 130 करोड़ की आबादी वाला देश है और दुनिया का बहुत बड़ा बाजार है। यदि हम सकारात्मक दृष्टिकोण रखते हुए कोरोना संकट के बीच स्वयं को बचाए रखते हैं तो भारत का बाजार हमारी अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने में सक्षम है।

जरूरी सावधानियों के साथ उद्योग शुरू हो – डॉ. श्रीकांत पाटील केमिकल टेक्नॉलॉजिस्ट, इनडिपेंडंट कन्सल्टंट, केमिकल इंडस्ट-

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हम सिंथेटिक मार्बल्स, फायबर ग्लास व टाइल्स के उद्योग से जुड़े हुए हैं। जैसे - जैसे शहरीकरण बढ़ता है, कॉलोनियां बढ़ती हैं, घरों का निर्माण होता है तो उसमें बड़ी संख्या में टाइल्स का इस्तेमाल होता है। भारत में शहरों के विकास कार्य इतने तेज गति से नही चल रहे…

लालफीताशाही टूटे तो चमत्कार हो जाएगा- यशवंत सिंह

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हम अभी 2.5 ट्रिलियन की इकोनॉमी है और हम 15 ट्रिलियन की इकोनॉमी से तुलना नहीं कर सकते। दुनिया भारत को एक व्हाईट इलेफंट के रूप में देखती है उनका मानना है कि एक बार यह व्हाईट इलेफंट चल देता है तो इसको रोकना किसी के बस में नहीं है।

तकनीक आधारित शिक्षा प्रणाली को बढ़ावा दें सरकार – करुणाशंकर उपाध्याय

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हमारे मार्ग में चाहे किसी भी प्रकार की बाधा आए लेकिन हमें रुकना नहीं है, थकना नहीं है बस राष्ट्र विजय की कामना लेकर आगे ही बढ़ते जाना है। आगामी समय तकनीक आधारित और तकनीक केंद्रित व्यवस्था रहने वाली है।

दुनिया का औद्योगिक केंद्र बनेगा भारत – अजित मनियाल

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पहले की अपेक्षा अब हमारा मनोबल और अधिक मजबूत हुआ है। राष्ट्र के आर्थिक पहिये को गति देने के लिए हम भी अपना पूर्ण योगदान देंगे, ताकि देश जल्द से जल्द आर्थिक नुकसान से उबर जाए।

भारत और मजबूती से उभरेगा – वेदप्रकाश गर्ग

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जब-जब भारत पर संकट आया है तब-तब भारत ने पूरी ताकत से उसका मुकाबला किया है और संकटों पर मात करते हुए अखिल विेश को मार्ग दिखाया है।

सहकारी बैंकों के लिए पैकेज बेहद जरूरी

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बैंकों के 2019 - 2020 के तुलन-पत्र (बैलेंस शीट) बहुत ही नुकसानदेह दिखाई देंगे। आगामी जुलाई माह तक बैंकों का कामकाज पूरी तरह से शुरू होने की कोई संभावना दिखाई नहीं दे रही है।

केजरीवाल की जिद ने विपदा और बढ़ा दी

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केजरीवाल की दिल्ली को खोलने की जिद इस विपदा को और बढ़ाएगी। ऐसे में दिल्लीवासियों को अपनी सुरक्षा का दायित्व खुद उठाना होगा।

बहाना

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पियक्कडों को देश की अर्थव्यवस्था ने आज उन्हें पुकारा है। देश ने पुकारा है तो जाना ही पड़ेगा।...राज्य का राजस्व बढ़ाने के लिए खुद का खजाना खाली करना पड़े तो क्या गम है? उनकी पत्नियों की आंखों से खुशी के आंसू बहने लगे। वे अपने पतियों की कल्पना सैनिकों की वर्दी में करने लगे।

जैविक विश्व युद्ध और भारत

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सरकारें आती-जाती रहेंगी, लेकिन राष्ट्र की यह दिशा नहीं बदलनी चाहिए। वैभवशाली भारत का यही मूलमंत्र है। इसलिए कि जो शक्तिशाली होगा वही वजूद पाएगा जैसे कि डार्विन का सिद्धांत है

चीन के प्रति भारतीय हित साधने की नीति हो

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अमेरिका और चीन के बीच में अपने भी वैकल्पिक संबंध बनाने अत्यंत जरूरी है। अमेरिका और चीन इन दो महाशक्तियों के बीच में हम पीसे न जाए, या उनके दास न बने इस प्रकार की योजना भारत की होनी चाहिए।

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