ब्रिटिशकालीन मुंबई के गांव

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वैश्वीकरण के आधुनिक युग में रहने वाले मुंबईवासियों को शनिवार-रविवार की लगातार दो दिन की छुट्टियों में बरसात के मौसम में हरी चादर ओढ़े पर्वतों और उनमें कलकल बहते जलप्रवाहों और प्रपातों में विचरण करने की इच्छा होती है। शहरी वातावरण से परेशान जीवन ग्रामीण म

चीन के शह की काट भारत

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भारत और चीन के बीच तनाव की स्थिति निरंतर बढ़ती जा रही है। लद्दाख की ओर की सीमाओं का तय न होना दोनों देशों के विवाद का मुख्य कारण है। 2014 के पूर्व तक भारत की ओर से इस जनविहीन भूमि की ओर अधिक ध्यान न देने के कारण चीन ने धीरे-धीरे इस ओर से भारत की जमीन पर कब्जा करना शुरू कर दिया था।

जी हां, गांधी को समझना हो तो संघ की शाखा में आइए

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गांधी को आज के समय में समझना हो तो संघ के स्वयंसेवक के साथ सेवा बस्तियों में जाइए, शाखा में देशभक्ति के गीत गाइए, संघ प्रेरित गौशालाओं में गौ सेवा करिए, विद्या भारती के विद्यालयों में राष्ट्रभक्ति के उपक्रम देखिए, वनवासी कल्याण आश्रम के कार्यकर्ताओं के साथ रहिए, तब गांधी समझ में आ जाएंगे।

सामंती सोच से विस्मृत एक महान शख्सियत

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लाल बहादुर शास्त्री के बहाने हमें उस सामंती सोच का विश्लेषण करने की भी आवश्यकता है जिसने कांग्रेस जैसी ऐतिहासिक पार्टी को एक परिवार का बंधक बनाकर भारतीय लोकतंत्र का भी गहरा नुकसान किया है। क्या आज कांग्रेस में उस कांग्रेस का अक्स हमें भूल से भी नजर आता है जो औपनिवेशिक मुक्ति का सबसे सशक्त मंच था?

छोटी-छोटी बातों से हमारे सिद्धांतों की परीक्षा होती है

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गांधी जी के विचारों और यशस्वी जीवन को हम समझें तो पता चलेगा कि जीवन से जुड़ी छोटी छोटी बातें हमें परिपूर्ण बनाती हैं और परिपूर्णता कोई छोटी बात नहीं है। इन्हीं से हमारे सिद्धांतों की परीक्षा होती है। ऐसा करने से बहुत बड़े सकारात्मक परिवर्तन की ओर हम जा सकते हैं।

आत्मनिर्भर भारत का वैचारिक अधिष्ठान

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हमें पश्चिमी प्रतिमानों या उदाहरणों का गहराई से अध्ययन विश्लेषण करना चाहिए और यदि संभव हो तो उनसे लाभ भी उठाना चाहिए। लेकिन उन्हें अपने भावी विकास का आदर्श प्रतिमान मानने की गलती नहीं करनी चाहिए। आत्मनिर्भरता का वैचारिक अधिष्ठान यही है।

संगीत है तो मैं हूं और मैं हूं तो संगीत है- शंकर महादेवन

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‘हिंदी विवेक’ द्वारा आरंभ आत्मनिर्भर भारत वीड़ियो सीरिज के अंतर्गत इस बार खास वेब-भेंटवार्ता हैं प्रसिद्ध गायक-संगीतकार शंकर महादेवन से। उनसे संगीत की दुनिया के अलावा, उनके परिवार, आने वाले युवा गायकों, उनकी गीता पर महत्वाकांक्षी संगीत परियोजना आदि संगीत क्षेत्र के विभिन्न विषयों पर हुई अंतरंग बातचीत के कुछ सम्पादित महत्वपूर्ण अंश यहां प्रस्तुत हैं-

भारतीय नजरिया ही संविधान की मौलिकता

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प्रसिद्ध संघ विचारक और लेखक श्री रमेश पतंगे ने वेब पर ‘हिंदी विवेक’ की आत्मनिर्भर भारत भेंटवार्ता शृंखला के दौरान जो सबसे मार्के की बात कही वह यह कि देश के संविधान को भारतीय नजरिये से देखना चाहिए, न कि पश्चिम के नजरिये से। तभी हमारे संविधान की मौलिकता का पता चल जाएगा। हमारा संविधान समानता और न्याय की बात करता है। इस पर ठीक से अमल हो तो भारत आत्मनिर्भरता की ओर तेजी से बढ़ेगा। प्रस्तुत है इस प्रदीर्घ मुलाकात के कुछ महत्वपूर्ण सम्पादित अंशः-

रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की भरसक पहल

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रक्षा के क्षेत्र में पहली बार स्वदेश में साजोसामान के उत्पादन पर बल दिया जा रहा है और जहां संभव है उन आयातों को रोक दिया गया है। रक्षा उत्पादन निरंतर विकसित होने वाला क्षेत्र है। इसलिए हमें भी नित नए प्रयोग कर व निजी क्षेत्र को भी साथ लेकर चलना होगा, तभी इस क्षेत्र में कुछ हद तक आत्मनिर्भरता प्राप्त हो सकेगी।

ग्रामीण भारत को वास्तविक भारत में बदलने की जरूरत

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हमारा नेतृत्व दुनिया को दिशा देने में सक्षम है और हमारे आत्मसम्मान और आत्मनिर्भरता को स्थायित्व देने में भी। पहल तो हमें ही करनी होगी। ग्रामों को रोजगार अनुकूल बनाकर ही देश को उन्नत किया जा सकता है।

विदेशी भाषा अधिगम – आत्मनिर्भरता की सौगात

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छठी पीढ़ी का युद्ध परमाणु युद्ध न होकर साइबर, मेडिकल या आर्थिक युद्ध होना है। इसलिए हमारे युवकों को विश्व के लगभग सभी विकसित देशों की भाषाओं का सामान्य परिचय कराना बहुता जरूरी है। विदेशी की भाषा का यह अधिगम हमारे लिए आत्मनिर्भरता की सौगात ही होगा।

युवाओं को ‘कंफर्ट जोन’ से बाहर निकलना चाहिए

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‘हिंदी विवेक’ द्वारा आरंभ आत्मनिर्भर भारत वेब-भेंटवार्ता की शृंखला में लद्दाख के एकमात्र युवा सांसद श्री जमयांग सेरिंग नामग्याल से युवा शक्ति और लद्दाख में अनुच्छेद 370 हटने के बाद आए बदलावों पर व्यापक बातचीत हुई। इस बातचीत के कुछ सम्पादित महत्वपूर्ण अंश यहां प्रस्तुत हैं-

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