आखिर क्यों हो रहा है कृषि बिल का विरोध ? NDA की एक मंत्री ने दिया पद से इस्तीफा

krushi Bill

कृषि बिल से एनडीए में फूट

किसानों से से जुड़े दो बिल अब केंद्र सरकार के लिए मुसीबत बनने नजर आ रहे है क्योंकि इस बिल के लोक सभा में पारित होने के बाद एनडीए गठबंधन में ही फूट नजर आ रही है। एनडीए गठबंधन की कई पार्टियों ने इस बिल का विरोध किया और इसे किसानों के लिए हानिकारक बताया। किसानों से जुड़े बिल को लेकर विपक्ष लगातार सरकार पर हमलावर हुआ है और यह दावा कर रहा है कि सरकार ने यह बिल किसानों के फायदे के लिए नहीं बल्कि किसानों की सभी शक्तियों के समाप्त कर उनकी फसलों को कुछ चंद लोगों के हाथ सौपने के लिए लाया है। एनडीए की सहयोगी पार्टी अकाली दल ने खुलकर विरोध करना शुरु कर दिया है और कहा कि वह गठबंधन की चिंता नहीं करेंगे। 
 
किसान बिल से बदलेगी कृषि व्यवस्था
केंद्र सरकार की तरफ से लोकसभा में कृषि उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सरलीकरण) विधेयक 2020 और कृषक (सशक्तिकरण और संरक्षण) कीमत आश्वासन और कृषि सेवा पर करार विधेयक 2020 बिल को पेश किया गया। विपक्ष के तमाम विरोध के बाद भी यह बिल लोक सभा में आसानी से पास हो गया। केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि यह बिल किसानों के हित के लिए तैयार किया गया है इससे किसी को भी नुकसान नहीं होगा। वहीं बिल के पारित होने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर सभी को बधाई दी और कहा कि इस बिल के आने के बाद किसानों को बड़ा फायदा होगा और कृषि को भी टेक्नालिजी से जोड़ा जा सकेगा।
 
बिल पर सदन में हंगामा
किसानों के इस बिल को लेकर हंगामा जारी है विपक्ष लगातार यह आरोप लगा रहा है कि सरकार द्वारा लाया गया यह बिल किसान विरोधी है और इससे किसानों को उचित मूल्य नहीं मिलेगा। विपक्ष के मुताबिक अब किसान के मिनिमम मूल्य का अधिकार भी खत्म कर दिया गया है जिससे उसे अब कम कीमत पर अनाज बेचना होगा। किसान बिल को लेकर सरकार की तरफ से कहा गया कि अब मिनिमम मूल्य का नियम खत्म किया गया है जिससे अब किसान अपनी फसल को अपनी लागत के मुताबिक बेच सकता है इससे किसान को ज्यादा पैसे मिलेंगे। सरकार की तरफ से निर्धारित मिनिमम मूल्य की वजह से किसान को कम कीमत पर अपनी फसल बेचनी पड़ती थी जिससे किसानों का नुकसान होता था।
 
किसान का विरोध
सदन में बिल पास होने के साथ ही किसानों की तरफ से भी विरोध प्रदर्शन शुरु हो गया है। अलग अलग किसान संगठनों ने इसका विरोध शुरु कर दिया है और सड़कों पर उतरने लगे है। किसानों की तरफ से कहा गया है कि सरकार ने कुल 3 बिल किसानों के लिए लाए है जिसमें से पहला बिल किसानों के विरोध में है। अगर फसलों की न्यूनतम दर को समाप्त कर दिया जायेगा तो किसानों को अनाज का दाम नहीं मिलेगा और उसे कम से कम दाम पर बेचना होगा। यह सभी को पता है कि अब बड़ी बड़ी कंपनियां भी कृषि क्षेत्र में कदम बढ़ा रही है ऐसे में वह किसानों से कम दाम पर अनाज खरीदने का दबाब बनाएंगी। किसान संगठन का कहना है कि नये नियम के लागू होने के बाद अब कृषि क्षेत्र भी बड़े पूंजीपतियों के हाथ में चला जायेगा।

This Post Has 2 Comments

  1. aaryan

    jay shree ram

  2. Anonymous

    Kya kuch bhi ho yarr.. aisa lag rha hai ki paper nhi koi Facebook post dekh RHA hu.. msp hatane ki to abhi bat nhi hue

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