राहुल आखिर क्यों लेते है आरएसएस का नाम?

शायद ही कभी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के किसी पदाधिकारी ने कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी का नाम लिया होगा और अगर लिया होगा तो उनको नसीहत ही दी होगी लेकिन राहुल गांधी अक्सर ही RSS नाम लेते फिरते रहते है। अब उनके पास कोई और मुद्दा नहीं है इसलिए, या फिर वह संघ के नाम पर अपने वोट बैंक की राजनीति को धार देना चाहते है। राहुल गांधी को अक्सर राजनीतिक रैलियों में आरएसएस का नाम लेते हुए सुना जाता है वह पिछले 2 दशक से अपने हर बयान में यह बताने की कोशिश करते है कि बीजेपी और आरएसएस देश के लिए खतरा है लेकिन देश की जनता को उनकी बात शायद समझ नहीं आ रही है क्योंकि देश की जनता जो देख रही है उस पर उसे कहीं ज्यादा यकीन हो रहा है। 
 
बीजेपी का देश की राजनीति में कार्यकाल बहुत ही कम रहा है पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल को सभी ने देखा था और उसकी जमकर सराहना हुई थी। एक कवि होने के बाद भी उन्होंने परमाणु परीक्षण किया और अमेरिका तक की धमकी को नजरअंदाज कर दिया। प्रधानमंत्री मोदी ने भी बहुत समय से परेशान कर रहे पाकिस्तान को सर्जिकल स्ट्राइक और एयर स्ट्राइक कर उसे उसी की भाषा में समझा दिया और तभी से वह शांत है। आप यह सोच सकते है कि पिछले करीब 8 सालों में एक भी आतंकी घटनाएं नहीं हुई। 
 
केंद्र में 2014 से मोदी सरकार है यह उसका दूसरा कार्यकाल चल रहा है इस करीब 7 साल की राजनीति में अभी तक कोई ऐसा काम केंद्र की तरफ से नहीं किया गया जिससे विपक्ष उसका फायदा ले सके और लोगों को सरकार के खिलाफ भड़का सके लेकिन अब विपक्ष है तो वह तो अपना काम करेगा ही, अगर कुछ बड़ा ना सही तो क्या हुआ किसी भी मुद्दे पर सरकार को घेर सकते है। 
 
कांग्रेस की तरफ से विपक्ष को एक साथ ले चलने का यह कोई पहला प्रयास नहीं है इससे पहले भी अलग अलग राज्यों के विधानसभा चुनाव में  यह फायदे की राजनीति का षड्यंत्र देखने को मिला था लेकिन हार के बाद यह फिर से बिखर गया क्योंकि यह एकजुटता सिर्फ और सिर्फ अपना विकास करने के लिए होती है और जब खुद का विकास नजर नहीं आता तो इसे फिर से खत्म कर दिया जाता है। राहुल गांधी ने मंगलवार को कुछ राजनीतिक दलों के साथ नाश्ता किया और फिर विपक्ष की एकजुटता का राग अलापा और साइकिल से संसद भवन पहुंचे हालांकि कांग्रेस को सभी दलों का समर्थन नहीं मिला और कुछ लोगों ने कांग्रेस के इस नाश्ते को कड़वा कह उसे खाने से इंकार कर दिया। 

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