एमएसएमई इंडस्ट्रीज खतरे में…

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मार्च माह में ही हमने माल सप्लाई कर दिया था लेकिन लोक डाउन होने के बाद से अब तक हमें बकाया राशियों का भुगतान नहीं किया गया है। सरकार और प्राइवेट सेक्टर के पास पैसा होने के बावजूद हमें भुगतान नहीं कर रहे हैं। कोरोना संकट का बहाना बनाकर वह पैसा देने से इंकार कर रहे हैं। यह भी हमारे लिए एक समस्या बन चुकी है।

उम्मीदों पर खरा नहीं उतरा राहत पैकेज

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राहत पैकेज उम्मीदों पर खरा उतरता नजर नहीं आ रहा है। इसलिए झारखण्ड सरकार को चाहिए कि वे हमारे स्थिर खर्चों- मजदूरों पर व्यय, बिजली की दर और बैंक ब्याज- पर राहत दिलाए।

उद्योग जगत के लिए चुनौती भरा सफ़र

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महाड इंडस्ट्रियल एसोसिएशन में कुल मिलाकर लगभग 150 यूनिट हैं, लेकिन मजदूरों के पलायन के कारण बहुत कम उत्पादन हो पा रहा है। आने वाले 5-6 माह उद्योगों के लिए संकट भरे होंगे। केंद्र सरकार ने जो पैकेज जारी किया है उसकी उद्योगों तक ठीक से जानकारी नहीं पहुंची है। इस दिशा में कदम उठाना जरूरी है।

इमिटेशन ज्वेलरी पार्क बनाया जाए

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भारतीय इमिटेशन ज्वेलरी उद्योग चीन से आयातित माल व अंडरइनवायसिंग से संकट में पड़ गया है। इसलिए इसकी रोकथाम की जाए तथा इमिटेशन ज्वेलरी पार्क बनाया जाए तो 20 लाख से अधिक नए रोजगारों का सृजन हो सकता है।

…वरना महाराष्ट्र से चले जाएंगे उद्योग कारखाने

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महाराष्ट्र में भी गुजरात व उप्र की तर्ज पर श्रमिक कानूनों में सुधार किया जाना परम आवश्यक है, अन्यथा राज्य के उद्योग उन राज्यों में चले जाएंगे। इसी तरह केंद्र सरकार के राहत पैकेज को भी व्यावहारिक दिशा देने की आवश्यकता है।

कपड़ा उद्योग में संघर्ष की नौबत

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लॉकडाउन ने कपड़ा उद्योग को बेहाल कर दिया। मजदूरों को दो माह का वेतन तो दे दिया, लेकिन अब आगे ऐसा करना संभव नहीं है। इसलिए व्यापारियों और मजदूरों में संघर्ष की नौबत आ गई है। सरकार के किसी पैकेज की न एसोसिएशन के पास अधिकृत जानकारी है, न बैंकों के पास। इससे इस उद्योग को कोई लाभ नहीं मिल रहा है।

कोसिया इंडस्ट्रियल एसोसिएशन एमएसएमई को राहत पैकेज का लाभ नहीं मिलेगा

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सरकार एमएसएमई से जुड़े लोगों से बात नहीं करती, उनसे सलाह मशविरा नहीं करती, उनकी मांगों को वह नहीं सुनना चाहती। इसलिए राहत पैकेज का उसे लाभ नहीं मिलेगा। समय रहते यदि सरकार ने उचित कदम नहीं उठाए तो एमएसएमई क्षेत्र के 25 से 30 प्रतिशत उद्योग बंद हो जाएंगे।

कंस्ट्रक्शन उद्योग सबसे बुरी हालत में

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कंस्ट्रक्शन उद्योग नोटबंदी, जीएसटी, रेरा और आर्थिक मंदी के कारण सबसे बुरे वक्त से गुजर ही रहा था कि कोरोना ने उसकी कमर तोड़ दी। इस उद्योग को उबारने के लिए सरकार को फौरन कदम उठाने चाहिए।

भव्य दिव्य भारत का होगा नवनिर्माण

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सरकार को व्यापार-उद्योग का जमीनी स्तर पर आकर विचार करना चाहिए तथा यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि 20 लाख करोड़ के पैकेज को किस तरह अमल में लाया जाएगा। इसके अलावा और भी कुछ रियायतें फौरन दी जा सकती हैं। इससे भारत के नवनिर्माण में सहायता मिलेगी।

उद्योगों को सीधा लाभ पहुंचाए सरकार

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राहत पैकेज में बैंकों से भारी ब्याज पर ॠण मुहैया करने के बजाय सरकार यदि उद्योगों को सीधे लाभ देती तो वह अधिक उपयोगी होता और अर्थव्यवस्था के उठने में सहयोग मिलता। उद्योगों पर पहले से कई तरह के ॠण होते हैं, वे और ॠण लेकर संकट में क्यों पड़ना चाहेंगे।

कारोबारी जगत को सीधी मदद समय का तकाजा

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सरकार को तत्काल ऐसे उपाय करने चाहिए जिससे कारोबारी को ‘तरल’ धन सीधे व आसानी से उपलब्ध हो, ताकि वह देश को वर्तमान संकट से उबारने में जी-जान लगा दे। इससे सरकार को करों के रूप में राजस्व बढ़कर मिलेगा ही, रोजगार मिलने से लोगों में हताशा भी नहीं आएगी।

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