सम्पादकीय २०१९ – एनपीए- देश के समक्ष आर्थिक संकट

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बड़े पूंजीपतियों की ओर बैंकों के भारी बकाया कर्ज देश के समक्ष चिंता का विषय है। आए दिन बैंकों के घोटाले उजागर हो रहे हैं। इससे साफ दिखाई देता है कि बैंकिंग क्षेत्र संकट में है। वित्तीय क्षेत्र में कार्यरत बैंकों, बीमा कम्पनियों में देश के लाखों लोगों का धन लगा हुआ है। देश की अर्थव्यवस्था सुचारू रूप से चलनी हो तो बैंकों, बीमा कम्पनियों का ठीक से चलना आवश्यक है।

खाड़ी युद्ध- वैश्विक अस्थिरता की बानगी- सम्पादकीय- जुलाई २०१९

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अमेरिका और ईरान का टकराव दुनिया के लिए विनाशकारी सिद्ध हो सकता है। ईरान द्वारा परमाणु अस्त्र कार्यक्रम पुनः शुरू करने की चेतावनी से अमेरिका और आगबबूला हो गई हैै। अमेरिका ने कई तरह के आर्थिक प्रतिबंध याने इकोनॉमिक सैंक्शंस लाकर ईरान की व्यापारिक गतिविधियां रोकने का प्रयास किया है। भारत को इस पर अत्यंत संतुलित नजरिए से स्थिति से निपटना होगा। भारत को अमेरिका, अरब देश, इजराइल की भूमिका के साथ भी चलना है और ईरान के साथ व्यापार भी पूरी तरह से बंद नहीं करना है। भारत के नए विदेश मंत्री सुब्रमण्यम जयशंकर की यह परीक्षा की घड़ी है। ऐसे समय में भारत के लिए चिंता का विषय तेल संकट को लेकर है। लेकिन इससे भी चिंताजनक बात यह है कि ख़ाडी मुल्कों में लाखों भारतीय नौकरी के कारण रहते हैं। खाड़ी देशों में बनने वाली युद्ध जैसी स्थिति उनके जीवन को अस्त-व्यस्त कर देगी।

द ग्रेट ग्रेटा

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विश्व के जलवायु ढांचे में तीव्र गति से परिवर्तन हो रहा है। बेमौसम बरसात और आंधी-तूफान से करोड़ों लोक त्रस्त हैं। विभिन्न प्रकार के जीव-जंतु नष्ट होने के कगार पर हैं।

राष्ट्रद्रोही विचारों की पराजय निश्चित

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यह सम्पादकीय जब तक आप तक पहुंचेगा तब तक तीसरे या चौथे चरण का मतदान हो चुका होगा। भारत की सत्रहवीं लोकसभा के लिए प्रचार भी आधा रास्ता तय कर चुका होगा। हर राजनीतिक दल अपने प्रतिस्पर्धी की कमोबेशी उजागर कर चुका है। अब जनता परिणामों के प्रति उत्कंठा रखती है। ये परिणाम कैसे होंगे? कौन जीतेगा? अगली लोकसभा में बलाबल कैसे होगा? इस बारे में चर्चा धीरे-धीरे गर्म होती जाएगी।

देशहित में मतदान करें

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लोकसभा चुनाव के नगाड़े देशभर में गूंज रहे हैं। 11 अप्रैल से आरंभ होने वाला मतदान 19 मई तक चलने वाला है। चुनावों में पारदर्शिता के प्रति चुनाव आयोग भी अत्यंत सतर्क है। 2014 के चुनाव की तुलना में इस चुनाव में लगभग 8 करोड़ 43 लाख मतदाता बढ़े हैं। इस वर्ष कोई 90 करोड़ मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे।

धर्म और राष्ट्र चेतना की ललकारआर्य समाज

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1857 के  स्वतंत्रता संग्राम के बाद अनेक सामाजिक नेताओं एवं संतों ने राष्ट्र एवं समाज जागरण की चेतना पूरे देश में फिर से जगाने के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया। ब्रिटिश साम्राज्य और ईसाइयत के बढ़ते प्रभाव को रोकने के साथ-साथ हिंदू समाज की कुरीतियों को दूर करने के लिए एक शक्तिशाली संगठन तैयार करना यह भी इसके पीछे एक मुख्य उद्देश्य था।

परिवारवाद बनाम राष्ट्रवाद

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भारत में पूरे साल भर चुनाव का उत्सव कहीं ना कहीं होते ही रहता है। लेकिन, आम चुनाव को तो महाउत्सव के रूप में देखना होगा। इस महाउत्सव के नगाड़े अब बजने लगे हैं। लोकसभा का यह चुनाव भाजपा और कांग्रेस के साथ अन्य दलों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।…

  वन्य जीवों को भी जीने का अधिकार

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वन्य जीवों के बारे में उत्तराखंड न्यायालय ने एक बड़ा अनूठा और अहम फैसला दिया है। न्यायालय ने इन प्राणियों को व्यक्ति का दर्जा देकर मनुष्य को उनका अभिभावक घोषित किया है। न्यायालय का आशय यह है कि मानव अपने स्वार्थ के लिए पशुओं के साथ ज्यादति न करें।  आधुनिकता…

सेमीफाइनल से सबक ले भाजपा

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भारतीय लोकतंत्र की अत्यंत प्रभावी प्रक्रिया है, अपने विकास के लिए जनहित में कार्य करने वाली सरकार का चुनाव करना। लोकतंत्र के इस उत्सव को भारतीय जनता अत्यंत उत्साह के साथ मनाती है। विजेता हो या पराजित जो इससे सबक लेता है, उसका भविष्य कुछ आसान हो जाता है। पक्ष…

नेतृत्वहीन महागठबंधन का ढोल जनता बजाएगी

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2014 के बाद देश के राजनीतिक मंच पर मोदी लहर आई थी, जिसमें भाजपा विरोधियों का गठबंधन लगभग बह गया था। विरोधियों ने नरेंद्र मोदी के खिलाफ पूरी ताकत लगाई थी। संसद भवन से लेकर नुक्कड़ सभाओं तक यह परिलक्षित हो रहा था। लेकिन, 2019 के चुनाव का माहौल जैसे-जैसे…

फैशन : परंपरा और आधुनिकता का फ्यूजन

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आम तौर पर ‘फैशन’ कहने पर ग्लैमर ही हमारी आंखों के समक्ष आता है। केवल कलाकारों, उच्चस्तरीय लोगों तक ही फैशन सीमित होने के दिन अब लद चुके हैं। अपने रूप और अपनी प्रस्तुति के बारे में आम लोग भी जागरूक हो गए हैं। इसलिए फैशन के क्षेत्र का विस्तार खूब होता जा रहा है। अतः फैशन के क्षेत्र में कदम रखने को युवा अब बहुत उत्सुक हैं। इसमें असीमित अवसर दिखाई देते हैं। फैशन रोजमर्रे के जीवन का अनिवार्य अंग बन गई है। बढ़ती आय के साथ व्यक्ति की क्रय शक्ति भी बढ़ गई है। इसलिए फैशन के क्षेत्र में प्रशिक्षित लोगों की बड़े पैमाने पर आवश्यकता है। इससे रोजगार के असीमित अवसर उपलब्ध हो रहे हैं।

देश को आत्मविश्वास दिलाने वाला नेता

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  आज केंद्र और देश की 22 राज्यों में भी भाजपा की सरकार हैं। अटल जी कि अंतिम विदाई के समय भाजपा देश में सबसे बड़ी पार्टी बन गई है। भाजपा की विकास यात्रा पर गौर करें तो अटल जी का दृढ़ निश्चय याद आता है। दिल्ली के फीरोज शाह…

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