बिन निज भाषा सब सून

Continue Reading बिन निज भाषा सब सून

भारतीय जीवन में हिंदी का स्थान केवल भाषा के रूप में नहीं रहा है; वरन् यह हमारी परंपरा और सभ्यता की पहचान रही है, हमारी भावना को मुखर करने का माध्यम रही है, हमारी अभिव्यक्ति का साधन रही है और संकट काल में हमारी शक्ति रही है। परस्पर संबंधों को अधिक मजबूत बनाने के लिए हिंदी संभाषण से अधिक प्रभावी माध्यम और कोई नहीं है।

आत्मनिर्भर भारत: घोषणा नहीं कृति आवश्यक

Continue Reading आत्मनिर्भर भारत: घोषणा नहीं कृति आवश्यक

देश के आत्मनिर्भर होने का अर्थ है जितना हम आयात करते है उससे कुछ गुना अधिक निर्यात अवश्य हो। जितना हम विदेशों से लें उससे अधिक उन्हें देने की क्षमता विकसित करें। आत्मनिर्भर बनने की दिशा की ओर बढ़ते समय यह अतिविश्वास भी न रखें कि हम सब कुछ कर सकते हैं और यह न्यूनगंड भी न पालें कि भारत में कुछ हो ही नहीं सकता। ये दोनों ही विचार हमारी राह का रोड़ा बन सकते हैं। हमें हमारे बलस्थान और कमजोर पक्ष दोनों पर अपना ध्यान केंद्रित करना होगा।

अलविदा कप्तान

Continue Reading अलविदा कप्तान

महेन्द्र सिंह धोनी की इसी सफल कप्तानी के कारण क्रिकेट की ऐसी कोई ट्रॉफी नहीं है जो भारत के पास न हो। उनकी कप्तानी में भारत टेस्ट क्रिकेट में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहले क्रमांक पर रहा। 50 ओवर के विश्वकप और चैंपियंस ट्रॉफी पर भारत का कब्जा रहा। भारत को 20-20 विश्वकप का पहला विश्वविजेता बनाने का श्रेय भी धोनी को ही जाता है।

एकात्मता की नींव का शिलान्यास

Continue Reading एकात्मता की नींव का शिलान्यास

भारत की संसदीय प्रणाली में हिंदुत्व के प्रस्थापन के भय से चलाए जाते थे। क्योंकि तथाकथित सेक्युलर इस बात से डरे हुए थे कि अगर भारत का मुखिया हिंदू है, हिंदुत्व उसकी आस्था का विषय है, यह स्थापित हो गया तो विश्वभर में भारत की छवि हिंदू राष्ट्र के रूप में उभरेगी और सभी तथाकथित सेक्युलर लोगों को अपनी दूकानें बंद करनी होंगी

हिंदुत्व के पुनर्जागरण का शक्तिकेंद्र

Continue Reading हिंदुत्व के पुनर्जागरण का शक्तिकेंद्र

इस माह की पांच तारीख भारतीय इतिहास का वह स्वर्णिम दिवस लेकर आ रही है जिसका स्वप्न भारत में और भारत के बाहर रहने वाले लाखों हिंदुओं की आंखों में था। विगत कई वर्षों की लम्बी लड़ाई के बाद अंतत: अयोध्या में श्रीराम की जन्मभूमि पर मंदिर बनने जा रहा है।

आंखों से नहीं दिमाग से देखिए

Continue Reading आंखों से नहीं दिमाग से देखिए

भारतीय फिल्म जगत के इस पूरे ‘बे्रन वॉश’ के पीछे एक मजबूत लॉबी काम कर रही है। इंडस्ट ्री में जो अभिनेता इस लॉबी का काम करने से मना कर देता है, उनको खतम करने में यह लॉबी जुट जाती है। फिर या तो उस व्यिे का करियर खत्म हो जाता है या जीवन। सुशांत सिंह राजपूत इसका ताजा उदाहरण है।

नाम को सार्थक करता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ

Continue Reading नाम को सार्थक करता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ

घ की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि सेवा कार्यों को करने के दौरान संघ ने केवल सेवा की भावना को ही कायम रखा है। परंतु वह किसी एक प्रकार के ‘पैटर्न’ या ‘फॉर्मेट’ में कार्य नहीं करता और न ही इस सेवा के पीछे उसका कोई छिपा एजेंडा होता है। अत: संघ उस समय की परिस्थिति को देखते हुए आवश्यकता के अनुरूप बिना किसी भेदभाव के समाज को साथ लेकर समाज के प्रत्येक व्यक्ति तक सहायता पहुंचाने के लिए कटिबद्ध होता है।

न सुनवाई, न अपील, सीधे फैसला

Continue Reading न सुनवाई, न अपील, सीधे फैसला

देश में, विशेषकर उत्तर प्रदेश और बिहार में, गुंडाराज फैला हुआ था। गुंडों को राजनैतिक पार्टियों और पुलिस का आश्रय प्राप्त था। लोगों में डर फैलाने और अपना खौफ बनाने के लिए ये गुंडे कमर में तमंचे बांधे ऐसे घूमते थे, जैसे कोई बहुत बड़ा पराक्रम कर रहे हों। उनके इसी आतंक और दबदबे का फायदा राजनैतिक पार्टियां चुनावों तथा अन्य समय पर उठाती रहीं।

नए उत्साह से आगे बढ़ने का समय

Continue Reading नए उत्साह से आगे बढ़ने का समय

सकारात्मक घटनाओं पर चिंतन करना आवश्यक है। साथ ही स्वयं से भी यह प्रश्न पूछना आवश्यक है कि हमें विगत तीन महीनों में जो नहीं हुआ उसे ही लिए बैठे रहना है या आने वाले समय में जो आशा की किरण दिखाई दे रही है, जो अवसर दिखाई दे रहे हैं, उनकी ओर नए उत्साह से मार्गक्रमण करना है।

बिहार में विकास बनाम परिवारवाद

Continue Reading बिहार में विकास बनाम परिवारवाद

   बिहार में कोरोना संक्रमितों की संख्या 8000 को पार कर चुकी है। इस तरह बिहार में खतरनाक चीनी वायरस की चपेट में आ रहे लोगों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है। अब इस वर्ष के आखिर तक विधान सभा के चुनाव भी होने वाले हैं। कोरोना और चीनी वायरस बिहार के लोगों के सिर पर जिस तरह सवार है, उसी तरह विधान सभा चुनाव का बुखार भी आहिस्ता आहिस्ता बिहारियों के सिर चढ़कर बोल रहा है। इस चुनावी बुखार के लक्षण अबं नजर आने लगे हैं।

राष्ट्रहित में नकार भी आवश्यक

Continue Reading राष्ट्रहित में नकार भी आवश्यक

अब आम जनता ने घटनाओं का विश्लेषण करना शुरू कर दिया है, अत: यह आवश्यक है कि इस बात का भी विचार किया जाए कि जो घटनाएं घटित हो रही हैं उनमें हमारी क्या भूमिका हो सकती है। यह सही है कि देश का हर व्यक्ति सीमा पर जाकर युद्ध नहीं कर सकता और न ही बॉलीवुड में लॉबिंग कर रहे लोगों का गिरेबान पकड़कर यह नहीं पूछ सकता कि तुम्हें किसी की प्रतिभा को मारने का हक किसने दिया? परंतु आम नागरिक के पास सबसे अच्छा हथियार है, नकार।

शांतिदूतों को अब शांत रहना होगा

Continue Reading शांतिदूतों को अब शांत रहना होगा

हमारे यहां के तथाकथित कुछ बुद्धिजीवी नेता, राष्ट्रविरोधी मीडिया जिहादी आतंकवाद को समाप्त करने का रोना तो हर समय रोते हैं; परंतु स्वयं इस राष्ट्रविरोधी आतंकवाद के विरोध में कुछ ठोस कदम उठाने का साहस नहीं करते। यही क्यों, सदा पैंतरे बदलने वाले कुछ राजनीतिक नेता भी अपने स्वार्थ के कारण इस्लामीकरण को सहयोग देते नजर आते हैं।

End of content

No more pages to load