चीनी शतरंज के नेपाली-पाकिस्तानी प्यादे

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एशिया महाद्वीप में चीन को टक्कर दे सकने वाला एक ही देश है भारत। चीन भारत से सीधा युद्ध बहुत कम करता है। वह हमेशा छुपकर वार करने की नीति अपनाता है। इस बार भी वह भारत को नुकसान पहुंचाने और वैश्विक स्तर पर भारत की प्रतिमा खराब करने की कोशिश कर रहा है। इसके लिए उसने अपने शतरंज के दो प्यादों नेपाल और पाकिस्तान को चुना है। इन देशों के माध्यम से वह ऐसे मुद्दे उठाने की कोशिश कर रहा है जिनका कभी अस्तित्व ही नहीं रहा है, चाहे वह भारत-नेपाल की विवादित भूमि का हो या इमरान खान के बयान का।

मजदूर : संवाहक या योद्धा

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अभी संम्पूर्ण देश एक तराजू की तरह है, जिसके एक पलड़े पर पंजाब, महाराष्ट्र, गुजरात जैसे विकसित राज्य हैं। ये राज्य खेती-किसानी या उद्योगों के कारण प्रगति कर रहे हैं। तराजू के दूसरे पलड़े पर वे राज्य हैं जो तुलनात्मक दृष्टि से पिछड़े माने जाते हैं। कालांतर में पिछड़े राज्य के मजदूर अपनी आजीविका और भविष्य संवारने के उद्देश्य से इन विकसित राज्यों में आते रहे तथा इस ओर के पलड़े को अधिक भारी करते गए। परिणाम यह हुआ कि एक पलड़ा जरूरत से ज्यादा झुक गया और दूसरा बिलकुल रीता हो गया। अब इस कोरोना की त्रासदी के कारण जबकि अधिकतर मजदूर अपने रीते पलड़े की ओर वापस लौट गए हैं तो आवश्यकता है कि उन्हें वहीं रोके रखने की जिससे तराजू के दोनों पलड़े फिर से समान हो जाएं।

 हुनर ही तारेगा भारत को

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कोविड-19 के लिए आज सारी दुनिया चीन को दोषी मान रही है। आर्थिक महाशक्ति बनने के लिए उसने तीसरा विश्वयुद्ध छेड़ दिया है।

हिंदू घटेगा देश बंटेगा

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इन राष्ट्रविरोधी ताकतों का कार्य और उनके षड्यंत्रों को सारे समाज के सामने लाना आवश्यक है। उनके चेहरों पर सेवा का जो मुखौटा लगा हुआ है जिसे उतारना होगा। वरना वे धीरे-धीरे हिंदुओं को ही हिंदुओं के विरुद्ध खड़ा करने में सफल हो जाएंगे।

महिलाओं पर निर्भर है महिलाओं का विकास

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एक ओर जहां नगरीकरण, औद्योगिकरण एवं सांस्कृतिक खुलापन बढ़ रहा है वही नारी अस्तित्व पर आक्रमण भी बढ़ रहे हैं। बलात्कार, भ्रूण हत्या, दहेज, हत्या व अन्य वारदातें समय-समय पर हमारे सामने उपस्थित हो रही हैं।

पर्यावरण या इंसान : किसका कद ऊंचा?

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सृष्टि के हर जीव को जीने का सुंदर वातावरण मिले, यही पर्यावरण की परिभाषा है। किंतु विकास की अति लालसा और औद्योगिकरण की तथाकथित प्रगति के लिए मनुष्य ने प्रकृति को ही गुलाम बनाने का संकल्प किया है। मनुष्य के मन में यह अहंकार पैदा हुआ है कि वह अपनी बुद्धि के बल पर प्रति-सृष्टि पैदा कर सकता है।

नया भारत- विश्वगुरु बनाने का उद्घोष

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पिछले 6 सालों से भारत देश अपने कर्तृत्व को विश्व के सामने लाने का प्रयास कर रहा है। और इस प्रयास को सारी दुनिया अत्यंत आश्चर्यचकित भाव से महसूस कर रही है। एक ऐसा देश निर्माण करना होगा जो हम भारतीयों के साथ पूरे विश्व को प्रेरणा दे सके।

सम्पादकीय २०१९ – एनपीए- देश के समक्ष आर्थिक संकट

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बड़े पूंजीपतियों की ओर बैंकों के भारी बकाया कर्ज देश के समक्ष चिंता का विषय है। आए दिन बैंकों के घोटाले उजागर हो रहे हैं। इससे साफ दिखाई देता है कि बैंकिंग क्षेत्र संकट में है। वित्तीय क्षेत्र में कार्यरत बैंकों, बीमा कम्पनियों में देश के लाखों लोगों का धन लगा हुआ है। देश की अर्थव्यवस्था सुचारू रूप से चलनी हो तो बैंकों, बीमा कम्पनियों का ठीक से चलना आवश्यक है।

खाड़ी युद्ध- वैश्विक अस्थिरता की बानगी

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अमेरिका और ईरान का टकराव दुनिया के लिए विनाशकारी सिद्ध हो सकता है। ईरान द्वारा परमाणु अस्त्र कार्यक्रम पुनः शुरू करने की चेतावनी से अमेरिका और आगबबूला हो गई हैै। अमेरिका ने कई तरह के आर्थिक प्रतिबंध याने इकोनॉमिक सैंक्शंस लाकर ईरान की व्यापारिक गतिविधियां रोकने का प्रयास किया है। भारत को इस पर अत्यंत संतुलित नजरिए से स्थिति से निपटना होगा। भारत को अमेरिका, अरब देश, इजराइल की भूमिका के साथ भी चलना है और ईरान के साथ व्यापार भी पूरी तरह से बंद नहीं करना है। भारत के नए विदेश मंत्री सुब्रमण्यम जयशंकर की यह परीक्षा की घड़ी है। ऐसे समय में भारत के लिए चिंता का विषय तेल संकट को लेकर है। लेकिन इससे भी चिंताजनक बात यह है कि ख़ाडी मुल्कों में लाखों भारतीय नौकरी के कारण रहते हैं। खाड़ी देशों में बनने वाली युद्ध जैसी स्थिति उनके जीवन को अस्त-व्यस्त कर देगी।

द ग्रेट ग्रेटा

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विश्व के जलवायु ढांचे में तीव्र गति से परिवर्तन हो रहा है। बेमौसम बरसात और आंधी-तूफान से करोड़ों लोक त्रस्त हैं। विभिन्न प्रकार के जीव-जंतु नष्ट होने के कगार पर हैं।

राष्ट्रद्रोही विचारों की पराजय निश्चित

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यह सम्पादकीय जब तक आप तक पहुंचेगा तब तक तीसरे या चौथे चरण का मतदान हो चुका होगा। भारत की सत्रहवीं लोकसभा के लिए प्रचार भी आधा रास्ता तय कर चुका होगा। हर राजनीतिक दल अपने प्रतिस्पर्धी की कमोबेशी उजागर कर चुका है। अब जनता परिणामों के प्रति उत्कंठा रखती है। ये परिणाम कैसे होंगे? कौन जीतेगा? अगली लोकसभा में बलाबल कैसे होगा? इस बारे में चर्चा धीरे-धीरे गर्म होती जाएगी।

देशहित में मतदान करें

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लोकसभा चुनाव के नगाड़े देशभर में गूंज रहे हैं। 11 अप्रैल से आरंभ होने वाला मतदान 19 मई तक चलने वाला है। चुनावों में पारदर्शिता के प्रति चुनाव आयोग भी अत्यंत सतर्क है। 2014 के चुनाव की तुलना में इस चुनाव में लगभग 8 करोड़ 43 लाख मतदाता बढ़े हैं। इस वर्ष कोई 90 करोड़ मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे।

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