कंधा किसान का, बंदूक मोदी विरोध की

Continue Readingकंधा किसान का, बंदूक मोदी विरोध की

विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र में आंदोलन होना कोई नई बात नहीं है। स्वतंत्रता आंदोलन से शुरू हुआ यह सिलसिला अभी भी जारी है। शाहीन बाग के बाद दिल्ली में किसान आंदोलन की गूंज है।

संघ के विचारक माधव गोविंद वैद्य का निधन, कोरोना से भी थे संक्रमित

Continue Readingसंघ के विचारक माधव गोविंद वैद्य का निधन, कोरोना से भी थे संक्रमित

राष्ट्रीय स्वंय सेवक संघ के विचारक माधव गोविंद वैद्य का शनिवार को एक निजी अस्पताल में निधन हो गया। माधव गोविंद वैद्य के पोते विष्णु वैद्य ने इसकी जानकारी दी और बताया कि वह कोरोना से संक्रमित थे लेकिन इलाज के बाद वह पूरी तरह से ठीक हो गये और घर…

भारत-अमेरिका: नैचरल पार्टनर

Continue Readingभारत-अमेरिका: नैचरल पार्टनर

निष्पक्ष चुनाव मजबूत लोकतंत्र की आधारभूत आवश्यकता और पहला पायदान होते हैं। पिछले महीने में अमेरिका के राष्ट्रपति पद के लिए और भारत के बिहार राज्य में मुख्यमंत्री पद के लिए चुनाव हुए थे। दोनों ही चुनाव भारत की दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण थे।

वक्त हर जुर्म तुम्हें लौटा देगा

Continue Readingवक्त हर जुर्म तुम्हें लौटा देगा

पर्यावरण दो शब्दों के मेल से बना है। परि और आवरण। परि अर्थात अच्छी तरह और आवरण अर्थात संरक्षीत। दूसरे शब्दों मे हम यह कह सकते हैं कि पर्यावरण हमारी पृथ्वी का एक ऐसा आवरण या रक्षा कवच है जो हमारे समस्त जीवों को पहाड़ों, नदियों, सागरों और वनों की अनुकुल प्राकृतिक परिस्थितियां और वायु मण्डल में सांस लेने योग्य प्राणवायु की पर्याप्त उपस्थिती के योग से निर्मित होता है।

वस्त्रोद्योग पुन: अपना गौरव प्राप्त करेगा

Continue Readingवस्त्रोद्योग पुन: अपना गौरव प्राप्त करेगा

दीपावली तमस को मिटाकर जीवन में रौशनी लाने वाला त्यौहार है। सामाजिक जीवन में तमस का अर्थ निष्क्रीयता, आलस्य, नकारात्मकता और निराशा है, जिसे हम दीपावली के दिन अपने कर्मरूपी दिये के माध्यम से मिटाने का संकल्प लेते हैं। दीपावली के दिन जलाया हुआ प्रत्येक दीपक इस बात का संकेत होता है कि आने वाले सम्पूर्ण वर्ष में हम सभी सम्पूर्ण उत्साह के साथ अपने कार्यों और कर्तव्यों के प्रति समर्पित रहेंगे।

संघ स्थापना दिवस: राष्ट्र जागरण के अग्रिम मोर्चे पर राष्ट्रीय स्वंय सेवक संघ

Continue Readingसंघ स्थापना दिवस: राष्ट्र जागरण के अग्रिम मोर्चे पर राष्ट्रीय स्वंय सेवक संघ

वर्तमान राजनीतिक परिवर्तन के फलस्वरूप हमारा भारत नए भारत के गौरवशाली स्वरूप की ओर बढ़ रहा है। गत 1200 वर्षों की परतंत्रता के काल खंड में भारत और भारतीयता की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व अर्पण करने वाले करोड़ों भारतीयों का जीवनोद्देश्य साकार रूप में ले रहा है। भारत आज…

चीन के शह की काट भारत

Continue Readingचीन के शह की काट भारत

भारत और चीन के बीच तनाव की स्थिति निरंतर बढ़ती जा रही है। लद्दाख की ओर की सीमाओं का तय न होना दोनों देशों के विवाद का मुख्य कारण है। 2014 के पूर्व तक भारत की ओर से इस जनविहीन भूमि की ओर अधिक ध्यान न देने के कारण चीन ने धीरे-धीरे इस ओर से भारत की जमीन पर कब्जा करना शुरू कर दिया था।

बिन निज भाषा सब सून

Continue Readingबिन निज भाषा सब सून

भारतीय जीवन में हिंदी का स्थान केवल भाषा के रूप में नहीं रहा है; वरन् यह हमारी परंपरा और सभ्यता की पहचान रही है, हमारी भावना को मुखर करने का माध्यम रही है, हमारी अभिव्यक्ति का साधन रही है और संकट काल में हमारी शक्ति रही है। परस्पर संबंधों को अधिक मजबूत बनाने के लिए हिंदी संभाषण से अधिक प्रभावी माध्यम और कोई नहीं है।

आत्मनिर्भर भारत: घोषणा नहीं कृति आवश्यक

Continue Readingआत्मनिर्भर भारत: घोषणा नहीं कृति आवश्यक

देश के आत्मनिर्भर होने का अर्थ है जितना हम आयात करते है उससे कुछ गुना अधिक निर्यात अवश्य हो। जितना हम विदेशों से लें उससे अधिक उन्हें देने की क्षमता विकसित करें। आत्मनिर्भर बनने की दिशा की ओर बढ़ते समय यह अतिविश्वास भी न रखें कि हम सब कुछ कर सकते हैं और यह न्यूनगंड भी न पालें कि भारत में कुछ हो ही नहीं सकता। ये दोनों ही विचार हमारी राह का रोड़ा बन सकते हैं। हमें हमारे बलस्थान और कमजोर पक्ष दोनों पर अपना ध्यान केंद्रित करना होगा।

अलविदा कप्तान

Continue Readingअलविदा कप्तान

महेन्द्र सिंह धोनी की इसी सफल कप्तानी के कारण क्रिकेट की ऐसी कोई ट्रॉफी नहीं है जो भारत के पास न हो। उनकी कप्तानी में भारत टेस्ट क्रिकेट में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहले क्रमांक पर रहा। 50 ओवर के विश्वकप और चैंपियंस ट्रॉफी पर भारत का कब्जा रहा। भारत को 20-20 विश्वकप का पहला विश्वविजेता बनाने का श्रेय भी धोनी को ही जाता है।

एकात्मता की नींव का शिलान्यास

Continue Readingएकात्मता की नींव का शिलान्यास

भारत की संसदीय प्रणाली में हिंदुत्व के प्रस्थापन के भय से चलाए जाते थे। क्योंकि तथाकथित सेक्युलर इस बात से डरे हुए थे कि अगर भारत का मुखिया हिंदू है, हिंदुत्व उसकी आस्था का विषय है, यह स्थापित हो गया तो विश्वभर में भारत की छवि हिंदू राष्ट्र के रूप में उभरेगी और सभी तथाकथित सेक्युलर लोगों को अपनी दूकानें बंद करनी होंगी

हिंदुत्व के पुनर्जागरण का शक्तिकेंद्र

Continue Readingहिंदुत्व के पुनर्जागरण का शक्तिकेंद्र

इस माह की पांच तारीख भारतीय इतिहास का वह स्वर्णिम दिवस लेकर आ रही है जिसका स्वप्न भारत में और भारत के बाहर रहने वाले लाखों हिंदुओं की आंखों में था। विगत कई वर्षों की लम्बी लड़ाई के बाद अंतत: अयोध्या में श्रीराम की जन्मभूमि पर मंदिर बनने जा रहा है।

End of content

No more pages to load