ईसाई धर्मप्रचारकों की विकृतियां

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मदर टेरेसा द्वारा स्थापित ‘मिशनरीज ऑफ चैरिटी’ से 280 नवजात शिशुओं के लापता होने की सनसनीखेज खबर कुछ दिनों पूर्व सामने आई थी। रांची में इस संस्था के द्वारा संचालित ‘निर्मल हृदय’ संस्था से हुई बच्चों की बिक्री के तार देशव्यापी मानव तस्करी से जुडे होने का अनुमान लगाया जा रहा है।

विकास के मुद्दे को जनआंदोलन का रूप

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स्वामी विवेकानंद से किसी ने पूछा था, ”स्वामी जी आपने आज तक क्या किया है?” जवाब में स्वामी विवेकानंद ने अपने जीवन के अंतिम दिनों की व्याख्या करते हुए कहा था, “एक और विवेकनंद चाहिए, यह समझने के लिए कि इस विवेकनंद ने अब तक क्या किया है।”

राष्ट्रविरोधियों की बिसात पर दलित प्यादे?

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  भारतीय राजनीति में चुनाव पूर्व की कालावधि हमेशा ही अस्वस्थता निर्माण करनेवाली रही है और इस अस्वस्थता में जाति आधारित संघर्ष का उपयोग करना अपने देश की राजनीति का कटु सत्य है। फिलहाल भारत में दलित समाज के रोष का आधार लेकर जातिगत राजनीति की जा रही है। क्या…

इच्छा मृत्यु: मृत्यु का सम्मान

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जीवन से त्रस्त हो चुके या समृद्ध जीवन जीने के उपरांत मृत्यु की प्रतीक्षा करने वाले लोग हम अपने आस-पास देखते हैं। कई घरों में अस्सी-पचासी वर्ष के बीमार वृद्ध केवल मृत्यु नहीं होती इसलिए जीवित दिखाई देते हैं। सर्वोच्च न्यायालय ने व्यक्ति के जीवित रहने का व्यापक अर्थ बताते हुए इच्छा मृत्यु के संदर्भ में भले ही सशर्त मान्यता दी हो परंतु यह विषय यहीं खत्म नहीं होता।

‘सेवा संस्कार’ समाज मन में अवतीर्ण हो!

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समाज के सब से अंतिम स्तर तक उन्नति का प्रभाव पहुंचाना ही सेवा कार्य का प्रमुख उद्देश्य है। इसी कर्तव्य भावना से ओतप्रोत होकर आज समाज के विभिन्न क्षेत्रों में हजारों व्यक्ति सेवा कार्य कर रहे हैं। समाज की उन्नति की आकांक्षा अपने अंतःकरण में जगा कर, उसके लिए अविश्रांत परिश्रम करने की ध्येय निष्ठा से ‘सेवा’ एक शक्ति के रूप में देश में फैली है। अपना समाज अनेक प्रकार की विकृतियों और कुरीतियों से पीड़ित है। सामाजिक-आर्थिक विषमताओं से ग्रस्त है। लाखों लोग न्यूनतम शिक्षा, सामान्य चिकित्सा से आज भी वंचित हैं। दु:ख, द

‘सेवा संस्कार’ समाज मन में अवतीर्ण हो!

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समाज के सब से अंतिम स्तर तक उन्नति का प्रभाव पहुंचाना ही सेवा कार्य का प्रमुख उद्देश्य है। इसी कर्तव्य भावना से ओतप्रोत होकर आज समाज के विभिन्न क्षेत्रों में हजारों व्यक्ति सेवा कार्य कर रहे हैं। समाज की उन्नति की आकांक्षा अपने अंतःकरण में जगा कर, उसके लिए अविश्रांत परिश्रम करने की ध्येय निष्ठा से ‘सेवा’ एक शक्ति के रूप में देश में फैली है। अपना समाज अनेक प्रकार की विकृतियों और कुरीतियों से पीड़ित है। सामाजिक-आर्थिक विषमताओं से ग्रस्त है। लाखों लोग न्यूनतम शिक्षा, सामान्य चिकित्सा से आज भी वंचित हैं। दु:ख, द

अभियान में जन भागीदारी आवश्यक

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हम समस्याएं खड़ी करने के विशेषज्ञ हैं; लेकिन उन समस्याओं के प्रभाव के प्रति हमारी स्थिति मूकदर्शक जैसी होती है। मुंबई के साथ ही देश के सभी प्रमुख शहरों में वाहनों की भीड़ से सड़कें तंग हो चली हैं। मिनटों का सफर घंटों में तय होना अब रोजमर्रा की बात हो गई है। विकास के नारों के बीच ज्यादातर नदियां दयनीय और रसायन मिश्रित हो चुकी हैं। देश की सभी नदियां मैला ढोने वाली गटर बन गई हैं। अनेक शहरों में कूड़ों के पहाड़ हो गए हैं जो जहरीली गैस से जनता का जीना बेहाल कर रहे हैं।

चिंता और चिंतन की जरूरत

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लोकतंत्र में चुनाव का विशेष महत्व है. इन चुनावों के माध्यम से जनता अपने भविष्य के सपने को पंख देने की कोशिश करती है. हाल में हुए गुजरात और हिमाचल प्रदेश के चुनावों को इसी दृष्टि से महत्व प्राप्त हो गया था. चुनावों के दौरान हिमाचल की अपेक्षा गुजरात के चुनाव विशेष चर्चित रहे. चुनावी माहौल आरोप-प्रत्यारोपों से उफनता रहा. इसमें एक बात तीव्रता से अनुभव की जा रही थी कि गुजरात के चुनाव देश में भविष्य के राजनीतिक समीकरण बदलने वाले सिद्ध होंगे. नरेंद्र मोदी गुजरात के भूमिपुत्र हैं. इसलिए आरंभ में ऐसा लग रहा था कि यह

कल क्या होगा, किसको पता?

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पिछले कुछ दशकों में विज्ञान ने आदमी को कहां से कहां पहुंचा दिया इस पर गौर करें तो पता चलेगा कि विज्ञान ने तो आदमी की पूरी जीवनशैली ही बदल दी है। इसी पृष्ठभूमि में सऊदी अरब ने सारी दुनिया को चौंका दिया है। उसने २५ अक्टूबर को एक रोबोट (यंत्र मानव) को ही अपनी नागरिकता प्रदान कर दी है। ‘सोफिया’ नामक इस रोबोट को नागरिकता दिए जाने से विश्व की भौहें तन जाना स्वाभाविक है। इसलिए भी कि, मामला यहीं नहीं रुका। सऊदी युवराज ने तो घोषणा कर दी कि वे ‘नियोम’ नाम से मक्का के निकट एक रोबोट नगरी ही बसा

सामाजिक लोकतंत्र स्थापित करने वाली राजनीति हो

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राष्ट्रपति पद के लिए श्री रामनाथ कोविंद के नाम की घोषणा होते ही उनके दलित होने का बार-बार जिक्र किया गया। दूसरी ओर, कांग्रेस ने अपने मित्र दलों के साथ मिल कर अपना उम्मीदवार तय करते समय जन्म से दलित उम्मीदवार चुनने की भी राजनीतिक चाल चली। फलस्वरूप, देश में

एक भारत, श्रेष्ठ भारत, विकसित भारत

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‘राष्ट्र महज जमीन का टुकड़ा या भौगोलिक सीमा का नाम नहीं है, ‘राष्ट्र’ तो एक सशक्त भावना है। इस भावना का ‘राष्ट्र विकास’ से सीधा सम्बंध है। यदि देश में सुशासन होगा तो राष्ट्र भावना प्रबल होगी और इसी राष्ट्रभाव से अपेक्षित विक

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