हिंदी विवेक : WE WORK FOR A BETTER WORLD...

सिर्फ तस्वीरों में दिखेंगे भारत के शुतुरमुर्ग

Continue Reading

भारत से विलुप्त हो चुका चीता हो या फिर विलुप्ति की कगार पर पहुंचे स्याहगोश और गोडावण हो, ये तीनों ही शुष्क और झाड़ी व घसियाले मैदानों वाले जंगलों में रहा करते थे। इनके जीवन पर आए संकट से इस तरह के जंगलों का किस कदर खात्मा हो रहा है,…

हिमालय के वन और वन्य जीव संकट में

Continue Reading

हिमालयी राज्यों में चल रहे निर्माण कार्यों में जैसे-भवन, बांध, सड़कों का चौड़ीकरण, ऑलवेदर रोड, रेल लाइन आदि में कहीं भी भूकम्प व अन्य आपदाओं को सहन करने की क्षमता नहीं है। इसी कारण यहां चल रही बड़ी विकास परियोजनाएं विनाश का कारण बन सकती हैं। गंगोत्री के आगे 18…

वनों की आत्मकथा

Continue Reading

“आज जब मानव वन महोत्सव मनाता है, पर्यावरण दिवस मनाता है और वन्य जीवों को सुरक्षित रखने के अभियान चलाता है, तो हमें आशा की एक धुंधली किरण दिखाई देती है। हमें ऐसी अनुभूति होती है कि मनुष्य संभवतः सजग हो रहा है। कभी-कभी ऐसा भी लगता है कि वह…

वन तथा मानव का सहअस्तित्व आवश्यक

Continue Reading

  मानव के विकास की भूख की बहुत बड़ी कीमत आसपास के प्राणियों को चुकानी पड़ती है। पिछले 45 वर्षों में कोई साठ फीसदी भूतल प्राणी नष्ट हुए हैं। प्राणी और मानव के बीच उत्पन्न यह संघर्ष यहीं नहीं थमा, और पर्यावरण की बेहिसाब लूटखसोट होती रही तो निश्चित मानिए…

वृक्ष तपश्चर्या

Continue Reading

महाराष्ट्र के पश्चिमी घाट का महेन्द्र पर्वत वन क्षेत्र पौराणिक संदर्भों के अनुसार महर्षि परशुराम की  तपस्थली रहा था और उसके विकसित तथा संरक्षित करने का उन्होंने दीर्घकालीन कठिन कार्य किया था। इसको ही तत्कालीन समाज तपश्चर्या कहता था। हाल ही में सम्पन्न एक अपराध-अन्वेषण में यह स्पष्ट हुआ है…

मैं कटना नहीं चाहता…

Continue Reading

पेड़ सिसक कर कह रहा है, “ मनुष्य का अस्तित्व हमारे सह- अस्तित्व से ही है। अत: मुझ पर आश्रित पंछियों, कीटकों से लेकर मनुष्य तक के लिए मैं कटना नहीं चाहता...।” क्या आप हमारी बात सुनेंगे? अगर मैं आपसे पूछूं कि आज दुनिया में सब से तेज गति से…

जो भी करूंगा, पशुओं के लिए करूंगा… – गणेश नायक

Continue Reading

पर्यावरण, वन्य एवं अन्य प्राणियों की सेवा, सुरक्षा और चिकित्सा में अपना जीवन समर्पित करने वाले तथा जानवरों की संवेदना, पीड़ा व प्रेम की मूक भाषा समझने वाले  पशुप्रेमी श्री गणेश नायक ने ‘हिंदी विवेक’ को दिए विशेष साक्षात्कार में इस विषय के महत्वपूर्ण मुद्दों को रेखांकित किया है। पेश…

वेदों में पर्यावरण चिंतन

Continue Reading

वैदिक ॠषि कहते हैं है कि हम पृथ्वी वासी पर्यावरण को दूषित न करें, छिन्न न करें अन्यथा हमें उनसे दूषित अवगुण ही प्राप्त होंगे। यह एक ऐसा सत्य है जिसकी वर्तमान में अवहेलना कर हम पर्यावरण संतुलन को समाप्त करते जा रहे हैं। पर्यावरण का सीधा- सरल अर्थ है…

जैव विविधता भारत की धरोहर है

Continue Reading

जानवरों की घटती संख्या छठे महाविनाश का हिस्सा है। पहले 5 महाविनाश प्राकृतिक थे इसलिए उनकी भरपाई जल्द हो गई, छठा महाविनाश मानव निर्मित है, जिसकी भरपाई होना मुश्किल है। यदि मानव समय पर सतर्क नहीं हुआ तो मानवी जीवन ही संकट में पड़ जाएगा। जिस तरह से आज पूरी…

वन्य जीवों के नष्ट होते पर्यावास

Continue Reading

वन्य जीवों का विलोपन पृथ्वी पर जीवन के लिए एक आपातकाल जैसी स्थिति के समान है और इस प्रक्रिया पर लगाम नहीं लगने से मानव सभ्यता और अस्तित्व को खतरा है, क्योंकि मनुष्य सहित सभी जीवों से बना पारितंत्र पृथ्वी पर जीवन को संचालित करता है। मानव सभ्यता के विस्तार…

वन और जैवविविधता

Continue Reading

जैवविविधता के आसन्न खतरों के समाधान का सीधा सम्बंध वनों की सेहत से है। यदि वन स्वस्थ होंगे तो जैवविविधता भी संकट मुक्त रहेगी। जैवविविधता के आसन्न खतरों के समाधान के लिए और अधिक सकारात्मक कदम उठाने की जरूरत है। वनों की सेहत हकीकत में इस धरती पर जीवन के…

   मोहक शिकारी

Continue Reading

            प्रकृति का एक प्राथमिक नियम याने ‘जीवो जीवस्य जीवनम्’ अर्थात प्रकृति में एक जीव स्वत: का पोषण करने के लिये दूसरे जीव का भक्षण करता है। जैसे हिरन प्रजाति के प्राणी तृण (घास), पत्ते खाकर जीते हैं तो चीता बाघ, हिरन का शिकार करते हैं। मेंढक,…

End of content

No more pages to load

Close Menu