पर्यावरण की रक्षा और वैश्विक संस्थाएं

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पर्यावरण की रक्षा के लिए पूरे विश्व में विभिन्न सरकारी और गैर-सरकारी संस्थाएं कार्यरत हैं। यह एक तरह से जनता का संयुक्त अभियान है। इसलिए कि आने वाली भयावह स्थिति से निपटने के लिए अभी से सार्थक कदम उठाना जरूरी है।

समुद्र को स्वच्छ बनाने वाला प्रोजेक्ट ब्लू

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विवेकानंद युथ कनेक्ट फाउंडेशन द्वारा मुंबई के समुद्र और समुद्री तट को स्वच्छ, सुंदर और सुरक्षित बनाने के लिये केंद्र सरकार, राज्य सरकार और स्थानीय निकाय को जागृत कर उनसे इस कार्य हेतू संरचनात्मक, समन्वयपूर्व कार्य कराने हेतू प्रयास किये जा रहे है।

नदी का स्वास्थ्य

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जिस प्रकार सभ्य समाज में प्रत्येक मनुष्य के स्वास्थ्य का ध्यान रखा जाता है। उसके बीमार होने पर उपचार किया जाता है। बीमारी असाध्य न बने इस हेतु भगीरथ प्रयत्न किये जाते हैं वैसे ही प्रयत्नों की आवश्यकता नदी व जलग्रहण क्षेत्र में भी सतत् होती रहना चाहिए। इसकी पहली आवश्यकता है कि उसके स्वास्थ्य की निरंतर निगरानी होती रहे। अगर कहीं किसी भी रूप में कोई रोग ध्यान आए तो उसका तत्काल निदान किया जाना चाहिए।

प्लास्टिक प्रदूषण पर हो संगठित प्रहार

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विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी की दुनिया में ऐसे बहुत से आविष्कार किए गए, जो मनुष्य जीवन को सरल एवं बेहतर बनाने के उद्देश्य से किए गए लेकिन समय के साथ-साथ वही मानव जीवन के लिए एक बड़ा संकट बन गए।

तबाही और सवाल छोड़ गया है ‘फानी’

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चक्रवाती तूफानों के नाम रखने की भी एक दिलचस्प प्रक्रिया है। अलग-अलग देश तूफानों के नाम सुझा सकते हैं। बस शर्त यह होती है कि नाम छोटे, समझ में आने लायक और ऐसे हों जिन पर सांस्कृतिक रूप से कोई विवाद नहीं हो। फानी तूफान का नामकरण बांग्लादेश की ओर से किया गया है और बांग्ला में इसका उच्चारण फोनी होता है और इसका मतलब सांप है।

ग्रामीण समृद्धि  एवं पर्यावरण संरक्षण के लिए जीव जंतुओं का संरक्षण जरूरी है 

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गाय के दूध के साथ साथ गोबर एवं मूत्र की उपयोगिता का जितना बखान करें उतना ही कम है. आपको स्मरण दिलाना चाहते हैं कि गोमूत्र से कई प्रकार की औषधियां बन रही है. पंचगव्य की दवाएं आज अमेजॉन पर उपलब्ध है. भारतीय जीव जंतु कल्याण बोर्ड ने गौ संरक्षण की दिशा में अनेक महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं जिसमें गोचर विकास,  मानव संसाधन के लिए मानव जीव जंतु कल्याण अधिकारियों का प्रशिक्षण एवं उन्हें  क्रूरता निवारण के लिए अधिकारिता प्रदान करना,  पशु चिकित्सा संबंधी सुविधाएं प्रदान करना, गौशाला निर्माण के लिए मार्गदर्शन देना, नियम कानूनों के प्रति जानकारी देकर पशुओं पर होने वाले अत्याचार को नियंत्रित करना आदि कार्य किए जा रहे हैं.

कहां खो गए वे पशु-पक्षी?

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प्रकृति में हरेक जीव-जंतु का एक चक्र है, जैसे कि जंगल में यदि हिरण जरूरी है तो शेर भी। ...हर जानवर, कीट, पक्षी धरती पर इंसान के अस्तित्व के लिए अनिवार्य है। इसे हमारे पुरखे अच्छी तरह जानते थे, लेकिन आधुनिकता के चक्कर में हम इसे भूलते जा रहे हैं।…

सिर्फ तस्वीरों में दिखेंगे भारत के शुतुरमुर्ग

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भारत से विलुप्त हो चुका चीता हो या फिर विलुप्ति की कगार पर पहुंचे स्याहगोश और गोडावण हो, ये तीनों ही शुष्क और झाड़ी व घसियाले मैदानों वाले जंगलों में रहा करते थे। इनके जीवन पर आए संकट से इस तरह के जंगलों का किस कदर खात्मा हो रहा है,…

हिमालय के वन और वन्य जीव संकट में

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हिमालयी राज्यों में चल रहे निर्माण कार्यों में जैसे-भवन, बांध, सड़कों का चौड़ीकरण, ऑलवेदर रोड, रेल लाइन आदि में कहीं भी भूकम्प व अन्य आपदाओं को सहन करने की क्षमता नहीं है। इसी कारण यहां चल रही बड़ी विकास परियोजनाएं विनाश का कारण बन सकती हैं। गंगोत्री के आगे 18…

वनों की आत्मकथा

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“आज जब मानव वन महोत्सव मनाता है, पर्यावरण दिवस मनाता है और वन्य जीवों को सुरक्षित रखने के अभियान चलाता है, तो हमें आशा की एक धुंधली किरण दिखाई देती है। हमें ऐसी अनुभूति होती है कि मनुष्य संभवतः सजग हो रहा है। कभी-कभी ऐसा भी लगता है कि वह…

वन तथा मानव का सहअस्तित्व आवश्यक

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  मानव के विकास की भूख की बहुत बड़ी कीमत आसपास के प्राणियों को चुकानी पड़ती है। पिछले 45 वर्षों में कोई साठ फीसदी भूतल प्राणी नष्ट हुए हैं। प्राणी और मानव के बीच उत्पन्न यह संघर्ष यहीं नहीं थमा, और पर्यावरण की बेहिसाब लूटखसोट होती रही तो निश्चित मानिए…

वृक्ष तपश्चर्या

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महाराष्ट्र के पश्चिमी घाट का महेन्द्र पर्वत वन क्षेत्र पौराणिक संदर्भों के अनुसार महर्षि परशुराम की  तपस्थली रहा था और उसके विकसित तथा संरक्षित करने का उन्होंने दीर्घकालीन कठिन कार्य किया था। इसको ही तत्कालीन समाज तपश्चर्या कहता था। हाल ही में सम्पन्न एक अपराध-अन्वेषण में यह स्पष्ट हुआ है…

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