हवन पर वैज्ञानिक रिसर्च और लाभ

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फ़्रांस के ट्रेले नामक वैज्ञानिक ने हवन पर रिसर्च की। जिसमें उन्हें पता चला की हवन मुख्यतः आम की लकड़ी पर किया जाता है। जब आम की लकड़ी जलती है तो फ़ॉर्मिक एल्डिहाइड नामक गैस उत्पन्न होती है।जो कि खतरनाक बैक्टीरिया और जीवाणुओं को मारती है ।तथा वातावरण को शुद्ध करती है। इस रिसर्च के बाद ही वैज्ञानिकों को इस गैस और इसे बनाने का तरीका पता चला।

सिलिकोन घाटी बैंगलुरु में बाढ़ की तबाही

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सिलिकान वैली के नाम से मशहूर बैंगलुरु जैसा हाईटेक शहर बारिश एवं बाढ़ की चपेट में हैं। आफत की बारिश के चलते डूब में आने वाले इस शहर ने संकेत दिया है कि तकनीकि रूप से स्मार्ट सिटी बनाने से पहले शहरों में वर्षा जल के निकासी का समुचित ढांचा खड़ा करने की जरूरत है। लेकिन हमारे नीति नियंता हैं कि जलवायु परिवर्तन से जुड़े  संकेतों पर ध्यान नहीं दे रहे हैं। नतीजतन बैंगलुरु की सड़कों और गलियों में कारों की जगह नावें और ट्रेक्टरों से जान बचाने की नौबत आई हुई है। इस स्थिति ने प्रशसन की अकर्मण्यता और अदुर्दार्शिता जताते हुए महानगरों के आवासीय नियोजन पर सवाल खड़े कर दिए है।

मंदिर में घंटे… हमारे दिमाग के लिए “एन्टीडोट्स”

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इस तरह... जब घंटे को बजाया जाता है तो.... उसकी ध्वनि हमारे .... दिमाग में दोनों भागों ( दाहिना और बांया अर्थात चेतन और अवचेतन) मस्तिष्क पर असर डालती है.  और... हमें तनावमुक्त कर देती है... साथ ही... इसके सात सेकेण्ड तक रहने वाली प्रतिध्वनि.... हमारे शरीर में मौजूद सातों चक्र को भी जागृत कर देती है.... जिससे हम तरोताजा महसूस करने लगते हैं. इस तरह... मंदिर में मौजूद घंटे.... हमारे दिमाग को तनाव रहित कर... शरीर को तरोताजा बनाती है. दूसरे शब्दों में... मंदिर में मौजूद घंटे... हमारे दिमाग के लिए ""एन्टीडोट्स"' का काम करती है.

समाज को साथ लेकर संघ कर रहा है पर्यावरण संरक्षण

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हम सभी भारतीयों के लिए हर्ष का विषय होना चाहिए कि हमारे देश में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ जैसे संगठन मौजूद हैं जो सदैव ही सामाजिक, धार्मिक, आर्थिक एवं सेवा कार्य करने वाले संगठनों को साथ लेकर, देश पर आने वाली किसी भी विपत्ति में आगे आकर, कार्य करना प्रारम्भ कर देते हैं। भारत के पर्यावरण में सुधार लाने की दृष्टि से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने तो बाकायदा एक नई पर्यावरण गतिविधि को ही प्रारम्भ कर दिया है। जिसके अंतर्गत समाज में विभिन्न क्षेत्रों में कार्य करने वाले संगठनों को साथ लेकर संघ द्वारा देश में प्लास्टिक का उपयोग बिल्कुल नहीं करने का अभियान प्रारम्भ किया गया है और देश में अधिक से अधिक पेड़ लगाने की मुहिम प्रारम्भ की गई है।

भीषण गर्मी और हीट वेव की चपेट में यूरोप

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इतिहास में पहली बार यूरोप में भीषण गर्मी , हीट वेव का होना और धरती के दोनों सिरों (अंटार्कटिक और आर्कटिक) पर एकसाथ तापमान में असंतुलन सामान्य घटना नहीं है । ये सब धरती के तापमान में असंतुलन और जलवायु परिवर्तन की वजह से हो रहा है ,जिसका दायरा अब वैश्विक हो गया है . भले ही कोई इस विनाशकारी स्तिथि को तात्कालिक घटना कहकर ख़ारिज कर दे लेकिन जमीनी सच्चाई यह है की बड़े पैमाने पर ग्लेशियर्स का पिघलना और यूरोप में हीट वेव बहुत बड़े वैश्विक खतरें की आहट है , जिसको अनदेखा नहीं किया जा सकता है। कथित विकास की बेहोशी से दुनियां को जागना पड़ेगा।

उत्तराखंड में वनों की कटाई से गहराता जलस्रोतों का संकट

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प्राकृतिक जल संसाधनों जैसे तालाब, पोखर, गधेरे, नदी, नहर, को जल से भरपूर बनाए रखने में जंगल और वृक्षों की अहम भूमिका रहती है.जलवायु की प्राकृतिक पारिस्थितिकी का संतुलन बनाए रखने और वर्तमान ग्लोबल वार्मिंग के प्रकोप को शांत करके आकाशगत जल और भूमिगत जल के नियामक भी वृक्ष और जंगल हैं.

पर्यावरण की रक्षा के लिए आगे आया संघ

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प्रकृति और मनुष्य के बीच बहुत गहरा संबंध है। मनुष्य के लिए प्रकृति से अच्छा गुरु नहीं है। पृथ्वी मां स्वरुप है। प्रकृति जीवन स्वरुप है। पृथ्वी जननी है। प्रकृति पोषक है। पृथ्वी का पोषण प्रकृति ही पूरा करती है। जिस प्रकार मां के आंचल में जीव जंतुओं का जीवन पनपता या बढ़ता है तो वहीँ प्रकृति के सानिध्य में जीवन का विकास करना सरल हो जाता है।

मानव नहीं प्रकृति केंद्रित हो विकास

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आज पूरा विश्व प्रकृति के अंधाधुंध दोहन से होने वाले पर्यावरण परिवर्तन से परेशान है। इसलिए आवश्यकता है कि वनों के संरक्षण में तेजी लाई जाए तथा ऊर्जा के हानिरहित विकल्पों के शोध को प्राथमिकता दी जाए।

पर्यावरण संरक्षण से बचेगा मानव जीवन

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मानव जाति के संरक्षण के लिए पर्यावरण की सुरक्षा अत्यंत आवश्यक है। दिन-प्रतिदिन दूषित होते पर्यावरण की रक्षा एवं इसके संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से प्रति वर्ष 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जाता है। संयुक्त राष्ट्र द्वारा 1972 में इसकी घोषणा की गई…

क्या भोजन का पर्यावरण पर प्रभाव पड़ता है ?

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पर्यावरण जैविक (जीवित जीवों और सूक्ष्मजीवों) और अजैविक (निर्जीव वस्तुओं) का संश्लेषण है। प्रदूषण को पर्यावरण में हानिकारक पदार्थों की मौजुदगी के रूप में परिभाषित किया गया है जो मनुष्यों और अन्य जीवित जीवों के लिए हानिकारक हैं।  प्रदूषक खतरनाक ठोस, तरल पदार्थ या गैस हैं जो सामान्य से अधिक…

जीवन में अमृत है पानी : जल है तो कल है

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मनुष्य का शरीर पंचभूत से निर्मित है। पंचभूत में पांच तत्त्व आकाश, वायु, अग्नि, जल एवं पृथ्वी सम्मिलित है।  सभी प्राणियों के लिए जल अति आवश्यक है। प्रत्येक प्राणी को जीवित रहने के लिए जल चाहिए। नि:संदेह जल ही जीवन है। जल के बिना जीवन की कल्पना करना असंभव है।…

मधुमक्खी से संचालित होता है प्रकृति का चक्र

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आज पांचवा विश्व मधुमक्खी दिवस है। पर्यावरण प्रणाली में मधुमक्खियों के महत्व और उनके संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से हर वर्ष 20 मई को विश्व मधुमक्खी दिवस के तौर पर मनाया जाता है। इसे मनाने का प्रस्ताव स्लोवेनिया के बीकीपर्स एसोसिएशन के नेतृत्व में 20 मई 2017 को संयुक्त राष्ट्र के सम्मुख रखा गया था, जबकि…

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