कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।

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भगवान श्रीकृष्ण का स्वयं का भी जीवन उतार-चढ़ाव से ओत-प्रोत है। वे जेल में पैदा हुए, महल में जिये और जंगल से विदा हुए। उनका यह मानना था कि व्यक्ति जन्म से नहीं कर्म से महान बनता है। उनके द्वारा कुरुक्षेत्र के मैदान में गीता-ज्ञान का ऐसा उपदेश दिया गया जो कर्तव्य से विमुख हो रहे हर व्यक्ति को दिशा व उर्जा प्रदान करने वाला है। वस्तुतः श्रीमद्भगवद्गीता उनके उपदेश का एक ऐसा दर्शन है जो हमें नश्वर जगत में अपना कर्तव्य निस्पृह भाव से निभाने के लिए प्रेरित करता है।

हिन्दुत्व व राष्ट्र के लिए राजनीति का किया बलिदान- कल्याण सिंह

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उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह का एक वीडियो वायरल हो रहा है जिसमें वह कह रहे है कि जब उनका निधन हो तब उन्हें भारतीय जनता पार्टी के झंडे में लपेटा जाए। उनकी यह मुराद भी आज पूरी हो रही है। दुनिया को अलविदा कर चुके कल्याण सिंह…

हिन्दू पंचांग : ‘रक्षा-सूत्र’ का त्यौहार

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आख़िर  ‘रक्षा-सूत्र’  प्रेम, शक्ति और सौहार्द्र का प्रतीक है। दुर्लभ समय में आपके प्रियजन की रक्षा और सुरक्षा के लिए यह सूत्र बांधा जाता है तो फिर ये केवल भाईयों की कलाई पर ही क्यों सजे! हर उस कलाई पर होना चाहिए जिसके सुख, समृद्धि, लंबी उम्र और सुरक्षा की कामना की जाती है।

पूर्णिया में दीदियां बना रहीं राखियां

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 रक्षाबंधन का त्योहार भाई-बहन के प्यार को दर्शाता है। ऐसे में हर बहन अपने भाई के लिए बेहद खास राखियां का चयन करती है। अभी लेटेस्ट ट्रेंड में इको फ्रेंडली और बायोडिग्रेडेबल राखियां काफी पसंद की जा रही है। रेशम के कीड़े कोकुन में रहते हैं और उनके निकाले जाने…

अघोषित विभाजन की ओर बढ़ती कांग्रेस !

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पूर्व  केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल कांग्रेस पार्टी के उन वरिष्ठ नेताओं के बीच बड़ी हस्ती रखते हैं जो पिछले एक साल से पार्टी में पूर्णकालिक अध्यक्ष के चुनाव की मांग कर रहे हैं। एक साल पूर्व इन नेताओं ने बाकायदा सामूहिक पत्र लिखकर अपनी आवाज बुलंद करने की कोशिश भी की थी परंतु उन्हें अपनी कोशिशों में कोई सफलता नहीं मिली ।

हर चुनौती से निपटने के लिए तैयार है भारतीय सेना

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 दुर्भाग्य से, भारत पाकिस्तान जैसे देश से, घिरा हुआ है जो आतंकवाद, सीमा पार से घुसपैठ और धार्मिक उग्रवाद में विश्वास करता है और चीन जो किसी भी तरह से अपने क्षेत्र के विस्तार में विश्वास करता है और नक्सलियों को प्रशिक्षण और हथियार और गोला-बारूद प्रदान करके सामाजिक अशांति पैदा करता है।

स्वतंत्रता के 75 साल बाद भी भारतीयकरण शेष है

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आजादी के 7 दशकों के बाद भी देश के तंत्र का भारतीयकरण करना शेष है। स्वदेशी, स्वभाषा और स्वाभिमान किसी भी राष्ट्र की स्वतंत्रता के मुख्य स्तंभ होते हैं। जब तक इनके आधार पर हम अपना शासन तंत्र नहीं बदलते तब तक तो राज्य को सुराज्य में बदलना संभव नहीं होगा। जब तक भारत स्वदेश, स्वभाषा और स्वाभिमान के साथ उठकर विश्व के सामने खड़ा नहीं हो जाता, तब तक स्वतंत्रता प्राप्ति का अर्थ और लक्ष्य अधूरा ही रहेगा।

राज्यसभा सीसीटीवी वीडियो से खुली विपक्ष की पोल!

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सदन की एक मर्यादा होती है जो अब शायद पूरी तरह से टूट चुकी है हालांकि यह किसने तोड़ी इस पर अभी सरकार और विपक्ष के बीच जंग जारी है। दोनों ही एक दूसरे पर आरोप लगा रहे है कि लोकतंत्र की हत्या हुई है और सदन की गरिमा को…

भयभीत न हों लेकिन सतर्क तो हो जाएं..

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पिछले कुछ महीनों से देश के वैज्ञानिक और चिकित्सा विशेषज्ञ लगातार यह आशंका व्यक्त कर रहे हैं कि अगस्त में कोरोना की तीसरी लहर देश के अनेक हिस्सों में अपना असर दिखा सकती है। केरल , कर्नाटक, तमिलनाडु सहित कुछ दक्षिणी राज्यों में कोरोना संक्रमण के मामलों में अचानक आई…

गोवंश आधारित शाश्वत खेती और अर्थव्यवस्था

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गोवंश आधारित अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए समस्त महाजन संस्था और भारत सरकार के जीव जंतु कल्याण बोर्ड देश भर में गोपालन और गोवंश के संरक्षण व संवर्धन के लिए विशेष तौर पर कार्यरत है और भारत के पूर्वजों की परम्परा व धरोहर को आगे बढ़ा रही है। समस्त महाजन संस्था के नेतृत्व में जैन धर्म से जुड़े बहुतायत लोग जीवदया मामले में उल्लेखनीय कार्य कार्य रहे है जो समाज के लिए अनुकरणीय है और एक आदर्श भी है।

विरासत के आधार पर स्वतंत्र भारत का विकास

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स्वतंत्रता के 75वें वर्ष में अगर हर भारतीय यह निश्चय कर ले कि वह अपनी हर कृति के केंद्र में अपने राष्ट्र को रखेगा, उस कृति का परिणाम अगर राष्ट्रहित में नहीं है तो वह कृति नहीं करेगा तो भारत को विकसित और सुखी राष्ट्र बनने से कोई नहीं रोक सकता।

भारी बारिश से बिगड़े महाराष्ट्र के हालात

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मुंबई अपनी भारी बारिश के लिए तो मशहूर है। कई लोग मुंबई में बारिश को एंजॉय करने के लिए आते है लेकिन कई बार यह भीगा भीगा मानसून मौत का बवंडर बन जाता है और कई लोगों को अपनी आगोश में ले लेता है। 26 जुलाई उसका सबसे बड़ा उदाहरण रहा…

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