आत्मनिर्भर भारत विशेषांक – सितंबर २०२०

कोरोना वैश्विक महामारी के बिच प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी ने राष्ट्र को अपने पैरों पर खड़ा होने का आह्वान करते हुए देश को आत्मनिर्भर बनाने का संकल्प लिया है. तेजी से बदलते दौर में देश का आत्मनिर्भर बनना कितना जरुरी है? विदेशों पर निर्भर होने के क्या जोखिम है? भारत अपना चहुंमुखी विकास और सभी क्षेत्रों में आत्मनिर्भर कैसे बन सकता है? इससे सम्बंधित विषयों को इस विशेषांक में प्रमुखता दी गई है. नई शिक्षा निति, विज्ञान, तकनीक, उर्जा, स्वास्थ्य, ग्रामीण, रक्षा, मातृशक्ति एवं युवाओं का योगदान, राज्यों की भूमिका, आत्मनिर्भर भारत का वैचारिक अधिष्ठान आदि अनेक विषयों पर प्रकाश डाला गया है. इसके अलावा आत्मनिर्भर भारत को लेकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह श्री भैया जी जोशी, प्रसिद्ध धर्म गुरु श्री रमेश भाई ओझा, वैज्ञानिक विजय भटकर, लद्दाख के सांसद जमयांग नामग्याल, संघ विचारक एवं लेखक रमेश पतंगे, कारुलकर प्रतिष्ठान के अध्यक्ष श्री प्रशांत कारुलकर, प्रसिद्ध गायक-संगीतकार श्री शंकर महादेवन का साक्षात्कार आकर्षण का केंद्र है. इस ‘आत्मनिर्भर भारत’ विशेषांक को पढ़कर पाठकों को गौरव की अनुभूति होगी. हमारा यह दृढ़ विश्वास है कि हिंदी विवेक द्वारा प्रकाशित आत्मनिर्भर भारत विशेषांक नागरिकों सहित देश को आत्मनिर्भर बनने के लिए सदैव प्रेरित करेगा. आइये हम संकल्प करें कि सर्वप्रथम हम स्वयं आत्मनिर्भर बनेंगे और देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए श्रम की पराकाष्ठा करेंगे.

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