भारतीय कपड़ा बाजार देशी से ग्लोबल

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भारत में आज भी जब कोई किसी दूसरे राज्य में पर्यटन के लिए जाता है तो उस यात्रा के स्मरण के रूप में वहां का कोई विशिष्ट व्यंजन और विशिष्ट कपड़ा जरूर लाता है। आप कश्मीर जाकर पश्मीना शॉल लिए बिना वापस नहीं आ सकते। इसलिए पर्यटन स्थलों पर भी बाजारों को विशिष्ट पद्धति से बसाया जाने लगा।

विश्व बाजार में उभरता भारतीय वस्त्र उद्योग

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सकारात्मक संकेत यह है कि मौजूदा सरकार वस्त्रोद्योग क्षेत्र में ढांचागत सुधार कर इसे फिर से पटरी पर लाकर तेज गति देने की दिशा में प्रयास कर रही है। ’मेक इन इंडिया’ कार्यक्रम के माध्यम से भारत को निर्माण तथा निर्यात का हब बनाने का अभियान चल ही रहा है।

वस्त्र कामगारों के लिए कल्याणकारी योजनाएं

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वस्त्र मंत्रालय समय-समय पर वस्त्र कामगारों को लाभान्वित करने वाली योजनाओं की निगरानी करता रहता है। कामगार और उनके लिए बनाई गई विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं की लगातार बेहतरी मंत्रालय की सर्वोच्च प्राथमिकता है। केंद्र सरकार ने वस्त्र उद्योग से हर क्षेत्र में ऐसी योजनाएं शुरू की हैं। 

भारतीय वस्त्र परंपरा में औद्योगिक हस्तक्षेप

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यह हमारा अज्ञान एवं भ्रम है कि विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में पश्चिम अग्रणी देशों में आते हैं, जबकि हकीकत यह थी कि हम पश्चिम में खासतौर से ब्रिटेन से बहुत आगे थे। जब ब्रिटेन हमारे कपड़ा उद्योग पर अतिक्रमण कर रहा था, तब हमारे यहां 2400 और 2500 काउंट के महीन धागे बनाने में जुलाहे निपुण थे, केवल एक ग्रेन में 29 गज लंबे धागे हमारे कारीगर बना लिया करते थे।

खादी : वस्त्र और विचार

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मनुष्य की जरूरत पूरी करने में खादी सक्षम है। आवश्यकता से अधिक अर्जन करने से आदमी की प्रकृति और प्रवृत्ति बदल जाती है। धीरे-धीरे शोषक बनने की श्रेणी में आ जाता है। जबकि चरखे में तो ईश्वर का वास है। यह गरीब से गरीब आदमी की क्षुधा तृप्त कर सकता है। उसको सम्मान दिला सकता है।

एमएसएमई इंडस्ट्रीज खतरे में…

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मार्च माह में ही हमने माल सप्लाई कर दिया था लेकिन लोक डाउन होने के बाद से अब तक हमें बकाया राशियों का भुगतान नहीं किया गया है। सरकार और प्राइवेट सेक्टर के पास पैसा होने के बावजूद हमें भुगतान नहीं कर रहे हैं। कोरोना संकट का बहाना बनाकर वह पैसा देने से इंकार कर रहे हैं। यह भी हमारे लिए एक समस्या बन चुकी है।

उम्मीदों पर खरा नहीं उतरा राहत पैकेज

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राहत पैकेज उम्मीदों पर खरा उतरता नजर नहीं आ रहा है। इसलिए झारखण्ड सरकार को चाहिए कि वे हमारे स्थिर खर्चों- मजदूरों पर व्यय, बिजली की दर और बैंक ब्याज- पर राहत दिलाए।

इमिटेशन ज्वेलरी पार्क बनाया जाए

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भारतीय इमिटेशन ज्वेलरी उद्योग चीन से आयातित माल व अंडरइनवायसिंग से संकट में पड़ गया है। इसलिए इसकी रोकथाम की जाए तथा इमिटेशन ज्वेलरी पार्क बनाया जाए तो 20 लाख से अधिक नए रोजगारों का सृजन हो सकता है।

…वरना महाराष्ट्र से चले जाएंगे उद्योग कारखाने

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महाराष्ट्र में भी गुजरात व उप्र की तर्ज पर श्रमिक कानूनों में सुधार किया जाना परम आवश्यक है, अन्यथा राज्य के उद्योग उन राज्यों में चले जाएंगे। इसी तरह केंद्र सरकार के राहत पैकेज को भी व्यावहारिक दिशा देने की आवश्यकता है।

कपड़ा उद्योग में संघर्ष की नौबत

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लॉकडाउन ने कपड़ा उद्योग को बेहाल कर दिया। मजदूरों को दो माह का वेतन तो दे दिया, लेकिन अब आगे ऐसा करना संभव नहीं है। इसलिए व्यापारियों और मजदूरों में संघर्ष की नौबत आ गई है। सरकार के किसी पैकेज की न एसोसिएशन के पास अधिकृत जानकारी है, न बैंकों के पास। इससे इस उद्योग को कोई लाभ नहीं मिल रहा है।

कोसिया इंडस्ट्रियल एसोसिएशन एमएसएमई को राहत पैकेज का लाभ नहीं मिलेगा

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सरकार एमएसएमई से जुड़े लोगों से बात नहीं करती, उनसे सलाह मशविरा नहीं करती, उनकी मांगों को वह नहीं सुनना चाहती। इसलिए राहत पैकेज का उसे लाभ नहीं मिलेगा। समय रहते यदि सरकार ने उचित कदम नहीं उठाए तो एमएसएमई क्षेत्र के 25 से 30 प्रतिशत उद्योग बंद हो जाएंगे।

कंस्ट्रक्शन उद्योग सबसे बुरी हालत में

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कंस्ट्रक्शन उद्योग नोटबंदी, जीएसटी, रेरा और आर्थिक मंदी के कारण सबसे बुरे वक्त से गुजर ही रहा था कि कोरोना ने उसकी कमर तोड़ दी। इस उद्योग को उबारने के लिए सरकार को फौरन कदम उठाने चाहिए।

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