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अध्यात्म और सेवा का अद्भुत संगम क्रियायोग फाउंडेशन

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गीता के क्रियायोग को जनता तक पहुंचाने का कार्य पिछले ५० वर्षों से सद्गुरु मंगेशदा क्रियायोग फाउंडेशन निरंतर कर रहा है। मानवी मन के इस तरह उपचार के साथ समाज के दीनदुखियों की सेवा का कार्य भी चल रहा है। इस तरह मन और शरीर दोनों की सेवा का अद्भुत कार्य फाउंडेशन कर रहा है। उसके कार्यों के बारे में पल्लवी अनवेकर से हुई बातचीत के महत्वपूर्ण अंश प्रस्तुत है।

‘रुग्ण नारायण’ का बसेरा सेवाधाम आश्रम

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’‘मानव तन खासकर रुग्ण, वंचित, बहिष्कृत, संक्रामक रोगों से ग्रसित जन की सेवा ही सर्वोपरि कही जा सकती है; क्योंकि सेवक और सेवित दोनों के संतुष्ट होने पर ही सेवा सार्थक मानी जा सकती है। ईश्‍वर भी आपसे तभी प्रसन्न होगा जबकि आप प्राणी सेवा के प्रति सजग हैं।

सेवा कार्य स्वयंसेवक करते हैं, संघ नहीं

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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना के बाद से ही सेवा कार्यों के प्रति विशेष जोर दिया गया। डॉ. हेडगेवारजी के जन्मशती वर्ष १९९० में सेवा क्षेत्र को एक कार्य विभाग के रूप में नया आयाम दिया गया। आगे चलकर ‘सेवाभारती’ ने मानव सेवा के नए मूल्य स्थापित किए। संस्था के अब तक के प्रवास एवं उतार-चढ़ाव को लेकर संघ के पूर्व अखिल भारतीय सेवा प्रमुख सुहासराव हिरेमठ ने अमोल पेडणेकर के साथ लम्बी बातचीत की। प्रस्तुत हैं उसी लम्बी बातचीत के संपादित अंश:

यूपीएल का स्वास्थ्य, कृषि और पशुपालन में अनूठा योगदान

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यूपीएल वापी के वनवासी क्षेत्र में न केवल कीटनाशकों का उत्पादन कर रही है, अपितु कम्पनी सामाजिक जिम्मेदारी (सीएसआर) के तहत इलाके में शिक्षा, पशुपालन और कृषि के क्षेत्र में बेहतरीन काम भी कर रही है। वैसे नियमानुसार सीएसआर के लिए मुनाफे के महज २ फीसदी रखने का प्रावधान है, लेकिन कम्पनी ने यह खर्च अपनी ओर से तिगुने से अधिक कर दिया है। कम्पनी के चेयरमैन श्री रज्जूभाई श्रॉफ से इन सेवा कार्यों के बारे में हुई बातचीत के महत्वपूर्ण अंश प्रस्तुत हैं-

सेवा कार्य स्वयंसेवक करते हैं, संघ नहीं

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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना के बाद से ही सेवा कार्यों के प्रति विशेष जोर दिया गया। डॉ. हेडगेवारजी के जन्मशती वर्ष १९९० में सेवा क्षेत्र को एक कार्य विभाग के रूप में नया आयाम दिया गया। आगे चलकर ‘सेवाभारती’ ने मानव सेवा के नए मूल्य स्थापित किए। संस्था के अब तक के प्रवास एवं उतार-चढ़ाव को लेकर संघ के पूर्व अखिल भारतीय सेवा प्रमुख सुहासराव हिरेमठ ने अमोल पेडणेकर के साथ लम्बी बातचीत की। प्रस्तुत हैं उसी लम्बी बातचीत के संपादित अंश:

सैकड़ों निराधार बेटियों के ‘पापा’ महेश सवाणी

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सैकड़ों निराधार बेटियों के ‘पापा’ बने सूरत के पी.पी.सवानी समूह के श्री महेश सवानी जी! उतही उनके दामादों की संख्या हो गई। उनके इस सेवा कार्य को देख कर अचरज होता है। उनके पिताश्री से आरंभ बेटियों को सम्बल देने का यह यज्ञ अविरत चल रहा है। यही नहीं, बेटियों और दामादों की दिक्कतों को वे उसी तरह हल करते हैं जैसे उनके अपने पापा कर सकते थे। बेटियों और दामादों से उनका यह रिश्ता जीवनभर का और अनूठा है।

‘माय होम इंडिया’ का पूर्वोत्तर में अलख

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पूर्वोत्तर में, विशेष रूप से त्रिपुरा में, आई राजनीतिक बयार ने वहां भाजपा और राष्ट्रवादी विचारों को बल प्रदान करने वाला माहौल पैदा किया है. केंद्र में श्री नरेंद्र मोदी की नई सरकार आने के बाद वहां लोगों का आत्मविश्वास बढ़ा है. प्रस्तुत है, त्रिपुरा की जमीनी हकीकत और समग्र पूर्वोत्तर के लिए समर्पित रूप से काम कर रही ‘माय होम इंडिया’ के श्री सुनील देवधर से हुई विशेष बातचीत के महत्वपूर्ण अंशः

समाज को समर्पित समस्त महाजन

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‘समस्त महाजन’ केवल जीवदया को ही समर्पित नहीं है, वह मूल्यों पर आधारित शिक्षा तथा विपदा की स्थिति में फंसे मानव की सेवा को भी समर्पित है। इसलिए जल, जंगल, जानवर और जमीन इन चार बातों के संवर्धन के लिए कार्य करना हमारा मिशन है। संस्था के इन कार्यों की रूपरेखा को विशद किया संस्था के अध्यक्ष गिरीशभाई शाह ने एक विशेष भेंटवार्ता में। प्रस्तुत है उसके महत्वपूर्ण अंश-   समस्त महाजन संस्था की स्थापना का मूल उद्देश्य क्या है? संपूर्ण विश्व में कोई भी जीव भूखा न सोए और भूख की वजह से न मर जाए। मनुष्

समस्याएं उलझी नहीं, काबू में आईं – हंसराज अहीर

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कांग्रेसी सरकारों ने कश्मीर, नकसलवाद या उत्तर पूर्व के उग्रवाद को लेकर जो समस्याएं पैदा की थीं उन्हें कम करने में हमने भारी सफलता प्राप्त की है। विश्वास रखें कि आंतरिक सुरक्षा के मामले में हम महिलाओं तथा आम नागरिकों को भयमुक्त समाज दिलाने में सफल होंगे। यह विश्वास व्यक्त किया है केंद्रीय गृह राज्यमंत्री श्री हंसराज अहीर ने एक विशेष साक्षात्कार में। प्रस्तुत है उनसे देश की राजनीति, सुरक्षा, नक्सलवाद, रोहिंग्या, घुसपैठ, चीन-पाक से रिश्तें जैसी समस्याओं पर हुई प्रदीर्घ बातचीत के चुनिंदा अंश-  देश से जु़ड़े

विवेकानंद ही युवाओं के तारणहार

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अन्ना हजारे के आंदोलन की विफलता के बाद देश के युवाओं में आई हताशा को दूर करना और उनकी उम्मीदों को सकारात्मकता से जोड़कर उन्हें राष्ट्रीय और सामाजिक कार्यों से जोड़ना बहुत आवश्यक था। इस विशाल कार्य को करने के लिए प्रेरणा देने की स्वामी विवेकानंद के विचारों में ही अद्भुत क्षमता है। इन्हीं विचारों को लेकर डॉ. राजेश सर्वज्ञ ने विवेकानंद यूथ कनेक्ट की स्थापना की। प्रस्तुत है उनकी संस्था और कार्यों के बारे में उनसे हुई बातचीत के महत्वपूर्ण अंश-   अपनी संस्था व उसके निर्माण की प्रक्रिया के बारे में बताएं।अ

संतोष है! खुद पर विश्वास रखने का – प्रशांत कारुलकर

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प्रशांत कारुलकर कंस्ट्रक्शन उद्योग का वह नाम है जिसने युवावस्था में ही अपनी बुद्धिमत्ता तथा ज्ञान के आधार पर व्यावसायिक बुलंदी को प्राप्त कर लिया है। अपने व्यवसाय का सम्पूर्ण ज्ञान होने के साथ-साथ प्रशांत सामाजिक संज्ञान भी रखते हैं। मृदुभाषी, सफल उद्योगपति तथा सदैव फॅशनेबल वेष परिधान करने वाले प्रशांत कारुलकर ने हिंदी विवेक से अपने व्यवसाय तथा वर्तमान सामाजिक परिस्थिति व युवाओं को मार्गदर्शन करने वाला वार्तालाप किया। प्रस्तुत है, उस वार्तालाप के कुछ अंश- जब आपने व्यवसाय शुरू किया तो आपके मन में कौन स

मुस्लिमों में भी राष्ट्रभक्ति की उफनती लहरें हैं – इन्द्रेश कुमार

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मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के जरिए सुधारवाद का एक बड़ा आंदोलन खड़ा हुआ है। मुल्ला-मौलवियों द्वारा फैलाई गई गलतफहमियों को दूर करने से लेकर तुलसी, गोरक्षा और राम मंदिर पर भी मु. रा. मंच के सलाहकार तथा मार्गदर्शक मा. श्री इन्द्रेश कुमारजी ने बेबाक खुलासा किया। प्रस्तुत है उनके साथ हुई प्रदीर्घ बातचीत के महत्वपूर्ण अंश-  वैश्विक आतंकवाद के कारण लोगों के मन में मुसलमानों के प्रति जो नफरत और भय की भावना है वह देश की एकता व सार्वभौमिकता के लिए कितनी खतरनाक है? पिछले कई वर्षों से विश्व के अनेक क्षेत्रों में हिंसा के

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