राहुल हत्याकांड: मौत पर चुप्पी साधे सेक्यूलर समाज!

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राजधानी दिल्ली के आदर्श नगर क्षेत्र में 18 साल के राहुल राजपूत की पीट पीट कर हत्या कर दी गई लेकिन सेकुलर लिबरल बिग्रेड हर बार की तरह चुप्पी साधे हुए हैं। यह लोग फिर से सड़कों पर नहीं उतरे। दिल्ली में ही अंकित सक्सेना की हत्या के दौरान भी…

उद्धव-आदित्य, राऊत से नहीं; शिवसैनिकों से घनिष्ठता बढ़ाएं

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उद्धव, आदित्य एवं संजय राऊत की सेना शिवसेना नहीं है। उनकी सरकार कितने दिनों टिकेगी, कुछ कहा नहीं जा सकता। महाराष्ट्र की परिस्थिति दिनोंदिन खराब से भयावह होती जा रही है, जनता इसे एक सीमा तक ही सहन करेगी।

पश्चिम बंगाल में एक और बीजेपी नेता की हत्या

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  पश्चिम बंगाल में बीजेपी नेता की हत्या पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं की हत्या बदस्तूर जारी है तमाम विरोध के बाद भी इस पर विराम नहीं लग रहा है। बीजेपी नेताओं की मानें तो वह इस हत्या के पीछे ममता सरकार और उनके कार्यकर्ताओं…

कृषि बिल: किसानों को गुमराह कर रहे शरारती तत्व

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    कृषि बिल का विरोध एक साज़िश केंद्र सरकार द्वारा पारित किसान संबंधि बिल को लेकर लगातार विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है वैसे कहने के लिए तो यह विरोध किसानों द्वारा हो रहा है लेकिन इसकी असलियत यह है कि यह लोग किसान नहीं बल्कि कुछ पार्टी के…

क्यों महाराष्ट्र सीबीआई जांच से कतरा रहा है?

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 महाराष्ट्र पुलिस के रवैये से सुशांत सिंह कथित आत्महत्या मामला और उलझता जा रहा है। महाराष्ट्र ने बिहार पुलिस को इस मामले में प्राथमिकी दर्ज होने पर भी जांच में न सहयोग किया और न जांच होने दी, न सीबीआई जांच को राजी है। आखिर इसका राज क्या है?

देर-सबेर जाएगी अशोक गहलोत सरकार

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राजस्थान में गहलोत सरकार गिर भी जाती है तो सचिन पायलट का मुख्यमंत्री बनना तो मुश्किल होगा ही; वसुंधरा भी कोई गुल खिला दें, ऐसा लगता नहीं है। ऐसे में अंततः राजस्थान में मध्यावध्धि चुनाव की ज्यादा उम्मीद लगती है।

क्या फिर बनेगी भाजपा की सरकार?

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बालासाहेब ठाकरे के विचारों एवं नीतियों को तिलांजलि देकर जिस तरह से उद्धव ठाकरे ने अपनी कट्टर विरोधी पार्टियों कांग्रेस-राकांपा से हाथ मिलाया है, वही उनको धूल में मिला सकते हैं। कांग्रेस-राकांपा उद्धव ठाकरे के समक्ष आए दिन चुनौतियां पेश कर रहे हैं। यह बात उन्हें जितनी जल्दी समझ में आ जाये यह उनके लिए अच्छा है। बहरहाल वह इससे कैसे निपटते हैं यह उनके राजनीतिक अनुभव व रणकौशल पर निर्भर है।

ज्योतिरादित्य सिंधियाः चुनौतियां और पहेलियां

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मध्यप्रदेश के इस राजनीतिक नाट्य से उत्पन्न कुछ पहेलियां आज दिखाई दे रही हैं, वैसी ही कुछ दिखाई न देने वाली पहेलियां भी हैं। ये दिखने वाली और न दिखने वाली राजनीतिक पहेलियां उजागर होकर उन्हें हल करने के लिए कुछ समय तक इंतजार करना होगा।

केजरीवाल जीते नहीं, जिताए गए!

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केजरीवाल को जिताने में कांग्रेस, शहरी नक्सली और वामपंथी सफल रहे हैं। मीडिया और मुसलमान भी आप के पक्ष में चले गए। ऐसे कई कारण गिनाए जा सकते हैं। भाजपा को अब उसकी रणनीति पर मंथन करना होगा।

दिल्ली जीत पाएंगे केजरीवाल?

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केजरीवाल की राह 2015 के मुकाबले 2020 में बहुत ही चुनौतीपूर्ण है। केजरीवाल ने ट्वीट में ‘भगवान के भला करने की बात’ लिखी है। केजरीवाल का कितना भला होता है यह भगवान ही जानें।

साधो ये जग बौराना

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अचानक मां दहाड़ मार कर रो दी, क्योंकि उसके कुछ और बच्चों ने मौत को गले लगा लिया था। हमारी जेब में तीन फोन थे, एक लैफ्ट का, एक राइट का, एक लैफ्टाइट का। तीनों बज रहे थे। उस मां की आंखों के आंसू न जाने कैसे हमारी आंखों तक पहुंच गए। ‘साधो ये जग बौराना” कहकर रोते हुए हम उस मां के चरणों में झुक गए...

नागरिकता कानून विरोध की राजनीति?

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नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ देशभर में हुए हिंसक आंदोलन मोदी सरकार के खिलाफ एक सुनियोजित साजिश थी। कुत्सित राजनीति के हथियार के तौर पर विरोध के अधिकार का खतरनाक इस्तेमाल किया गया। इसे समझना जरूरी है।

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