सेवाव्रती देवो भव

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हमारी संस्कृति हमें बताती है, ‘मातृदेवो भव, पितृदेवो भव, आचार्यदेवो भव’-माता, पिता एवं आचार्य (गुरू) ये देवता स्वरूप हैं। इसमें ‘सेवाव्रती देवो भव’ भी जोड़ना चाहिए। डॉ.अशोकराव कुकड़े ऐसे ही सेवाव्रती हैं, जिन्हें पद्मभूषण से सम्मानित किया गया है।

मोदी सरकार और महिला विकास

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मोदी सरकार ने महिलाओं के सर्वांगीण विकास के लिए विभिन्न कदम उठाए हैं। ग्रामीण से लेकर शहरी और कामकाजी महिलाओं तक सभी का इन योजनाओं में ध्यान रखा गया है।

आर्य समाज-एक सिंहावलोकन

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आंतरिक मामले में आर्य समाज भले ही निर्बल हो रहा हो परंतु बाह्य आपदाओं से निपटने में वह पूर्णरूपेण सशक्त एवं सक्षम है। ऐसे अवसरों पर आर्य समाज के अंतर्गत विभिन्न विचारधाराओं के लोग मिल कर एकमत हो जाते हैं और विजयश्री निश्चित रूप से आर्य समाज को ही प्राप्त होती है।

भोग्य नहीं अब योग्य हूं

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आज की नारी समय की मांग के अनुरूप बनाने का प्रयास कर रही है। नगरीय, महानगरीय, भौतिकवादी और भूमंडलीय संस्कृति में महिला सशक्तिकरण का एक प्रभावशाली दौर चल रहा है।

महर्षि दयानंद सरस्वती का वेद-विषयक दृष्टिकोण

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१.   ऋक्‌, यजुः, साम और अथर्व - ये चार मंत्र संहिताएं ही ‘वेद’ हैं। इन चार मंत्र संहिताएं ही ईश्वर-प्रणीत अथवा अपौरुषेय ज्ञान-पुस्तकें हैं। इन चार के अतिरिक्त जो भी पुस्तकें हैं -मान्य या अमान्य, वे सब मनुष्यों द्वारा रचित अर्थात् पौरुषेय हैं।

आर्य धर्म और राजनीति

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यह एक बड़ा भारी भ्रम है कि राजनीति का धर्म से कोई संबंध नहीं है। राजनीति का जन्म ही धर्म की रक्षा के लिए है। धर्म की रक्षा के लिए राजनीति तो बड़ा काम देती है, उसी प्रकार राजनीति के बिना धर्म भी सुरक्षित नहीं रह सकता।

स्वदेशी राष्ट्रभाषा का महत्व

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महर्षि दयानंद हिंदी को आर्य भाषा कहते थे। आर्य समाज, लाहौर ने सन 1936 में प्रथम आर्य भाषा सम्मेलन किया, जिसके अध्यक्ष मुंशी प्रेमचंद थे।

भारत-राष्ट्र का नवनिर्माण

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वेद को खोने-भुलाने से यह देश भी भूल गया- हमें ही विजयी होना है और विशुद्ध होना है। पराजित अनायास पापरिहत नहीं हो सकता। विजयी होने के लिए उच्च चरित्र का होना आवश्यक है। क्या आज यह देश ‘भारत’ के नाम से दुनिया के किसी कोने में जाना जाता है? क्या विश्वामित्र-रक्षित भारत भूमि की स्तुति, वंदना और अर्चना होती है? क्या भारत-भक्ति का उन्मूलन पिछले दो सौ साल से और विशेषतः 15 अगस्त, 1947 से नहीं किया जा रहा है।

स्वतंत्रता संग्राम में क्रांतिकारी भूमिका

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इसी सूची में भगत सिंह के दादा जी अजीत सिंह का नाम भी आता है। भगत सिंह कहा था कि मेरे दादा जी ने जनेऊ के समय मुझे देश को भी समर्पित कर दिया था। भगत सिंह जलियांवाला कांड को देख कर अत्यंत भावुक हुए और उनका खून खौल पड़ा। उन्होंने नौजवान भारत सभा बनाई और चंद्रशेखर आज़ाद, सुखदेव और राजगुरु से मिल कर लाला लाजपत राय की हत्या का बदला सैंडर्स को गोली मार कर लिया।

राष्ट्रीय एकता में योगदान

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गौतम बुद्ध को इसीलिए वेदों के विरुद्ध आवाज उठानी पडी। लेकिन स्वामी दयानंद सरस्वती ने वेदों का सही और युक्तिसंगत अर्थ करके समाज में चल रही उन भ्रांतियों का द़ृढ़ता से निराकरण किया। आर्य समाज के जो दस नियम उन्होंने बनाए हैं वे भी मनुष्य मात्र के लिए उपयोगी हैं। इनमें कहीं संकुचितपन की झलक देखने को नहीं मिलेगी। यदि कहीं आर्य समाज के कार्यक्रमों में संकुचितपन की कोई गंध मिलेगी तो वह आर्य समाजी कार्यकर्ताओं का अपना दोष तो हो सकता है, स्वामी दयानंद सरस्वती द्वारा प्रतिपादित आर्य समाज के सिद्धांतों का दोष नहीं कहा जा सकता।

आर्यों का तीर्थस्थान काकड़वाड़ी मंदिर

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काकड़वाड़ी आर्य समाज वर्षों तक वैदिक धर्म प्रचार का केन्द्र रहा और अब भी है। मुंबई प्रदेश आर्य प्रतिनिधि सभा का दफ्तर यही है। आर्य प्रतिनिधि सभा के संन्यासी एवं महोपदेशक का विश्राम स्थान भी यही स्थल है। सभा के अधिकारी एवं आर्य समाज के पदाधिकारी प्राय: इसी समाज के नेता रहे।उत्तर प्रदेश के उपदेशक एवं आर्य समाज के प्रमुख नेता

महर्षि दयानंद, वेद और आर्य समाज

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वैदिक ज्ञान विज्ञान के तत्वों को संसार के समक्ष अपने विशुद्ध रूप में रख कर इस विषयक अज्ञान को दूर करने का श्रेय अधिकांश में वेदों के परम आचार्य महर्षि दयानंद को ही है। आर्य समाज की स्थापना उन्होंने वेदों के इसी सत्य ज्ञान के प्रसार-प्रचार के लिए की थी।

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