संक्रांति पर्व

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संक्रांति का त्यौहार सामाजिक संबंध दृढ़ करने, आपस में मिलने जुलने, तनाव दूर कर, खुशियां फैलाने वाला त्यौहार है. यह पर्व केवल भारत ही नहीं, थाईलैंड, म्यांमार, कंबोडिया और श्रीलंका में भी पूरी श्रद्धा के साथ मनाया जाता है.

बदलती परंपराओं और त्यौहारों का नया स्वाद

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आज की युवा पीढ़ी, परंपराओं के साथ भले ही हाथों में हाथ डाल कर ना चल रही हो परंतु उन्हें जिंदा रखने की हसरत उनमें है। बस उनका देखने का नजरिया बदल गया है। बदलाव और नयापन हमेशा अच्छा होता है। इससे समाज उन्नति की ओर बढ़ता है। ट्रिंग... ट्रिंग... ट्रिंग... कॉलबेल बजी। उत्साह से नेहा ने दरवाजा खोला। अपनी चारों सहेलियों को देख नेहा का चेहरा खिल उठा। ‘‘कौन आया है बेटी?’’ मां भी कमरे से बाहर आ गई। नेहा ने गांव से आई अपनी मां का सभी सहेलियों से परिचय कराया। बातचीत चल निकली तो त्यौहारों पर आ

भगवद्गीता सबके लिए

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गीता मनुष्यमात्र को आतंकवाद, भोगवाद, पर्यावरण ह्रास, बैरभाव, ईर्ष्या आदि से बचा सकती है। संप्रदाय निरपेक्ष शाश्वत सिद्धांतों को मानव धर्म के तौर पर सिखा सकती है। आने वाले समय मेंं विश्व भगवद्गीता को मानवता की विवेक ग्रंथ के रूप में स्वीकार कर लें तो आश्चर्य की बात नहीं होगी। कुरुक्षेत्र के युद्ध मैदान में भयभीत एवं हताश हुए अर्जुन को भगवान श्रीकृष्ण ने गीता सुनाई। महर्षि वेदव्यास रचित महाभारत महाकाव्य का गीता एक हिस्सा है। ‘अर्जुन को युद्ध करने हेतु प्रेरित करना’- यही कृष्ण का उद्देश्य था..

इस्लाम में स्वर्ग और नरक

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मुहम्मद पैगंबर की तरह प्रत्येक धर्म संस्थापकों ने मनुष्य के पारलौकिक जीवन और स्वर्ग-नरक की संकल्पनाओं को रचा है। शायद उसका लक्ष्य केवल इतना ही था कि जनसाधारण सन्मार्ग पर चलें और दुष्कृत्यों से दूर रहें। आज की कसौटी तो यही है कि मानवता, आपस में भाईचारा और सहिष्णुता कायम करने से पृथ्वी पर ही स्वर्ग आ जाएगा। हजारो वर्षों पूर्व से ही प्रत्येक धर्म में मानव के मरणोत्तर अस्तित्व एवं उसके पारलौकिक जीवन के विषय में विविध मत रहे हैं एवं आज भी हैं। इसके अनुसार जीवितावस्था में जिसका जैसा व्यवहार हो उसे उसी के अनु

विश्वव्यापी भारतीय संस्कृति

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सारे विश्व से जो पुरातात्विक प्रमाण मिले हैं उससे साबित होता है कि भारतीय संस्कृति विश्व के हर कोने में फैली हुई थी। चाहे जापान हो या न्यूजीलैण्ड, यूरोप हो या अफ्रीका अथवा अमेरिकी प्रायःद्वीप- हर जगह भारतीय और उनकी संस्कृति पहुंची है। हर संस्कृति से उसका मेलजोल हुआ। वह सर्वव्यापी हो गई। समुंदर पार जाने या देशांतर के दौरान संस्कृति किसी को कोई नुकसान नहीं पहुंचाती। वह सहजता और सरलता से सीमाओं को पार कर देती हैं। यहां तक कि सदियों या सहस्राब्दियों पूर्व उसने जो प्रभाव छोड़ा था वह भी सहजभाव बन जाता है। इसी

ध्वस्त होती मान्यताएं

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उत्तर प्रदेश में आज आबादी का घनत्व बढ़ा है। अर्थ ही सब कुछ हो गया है। इसलिए लोगों का झुकाव मान और शान से ज्यादा अर्थ पर केन्द्रित हो गया है। अर्थ की धारणा ने सांस्कृतिक धरोहरों को भी करारी चोट दी है। तमाम मान्यताएं ध्वस्त हो रही हैं। फिर भी आशा की किरण

पारंपरिक लोकनाट्य

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  उत्तर प्रदेश के इन लोकनाट्यों की चमक और आभा के कारण आज विश्व पटल पर हमारी एक विशेष पहचान है। ऐसे में हम सभी का यह कर्तव्य ही नहीं पूर्ण दायित्व है कि हम अपने इन अमूल्य लोकनाट्यों को संरक्षित कर प्रचार-प्रसार करते रहें। उत्तर प्रदेश भारत का एक ऐस

उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत और मीडिया

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  उत्तर प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा रही है। शिक्षा, कला, संगीत, साहित्य, संस्कृति क्षेत्र में यहां के शिक्षाविदों एवं कलाकारों ने पूरे देश में ही नहीं अपितु वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बनाई है। हिंदी पत्रकारिता का प्रारंभ भी उत्तर प्रदेश के

हिंदी के विकास में गैर हिंदी भाषियों का योगदान

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भारत में विभिन्न बोलियों के रूप में लगभग सात सौ अस्सी भाषाएं प्रचलित हैं। इनको छियासठ लिपियों के द्वारा लिखा जाता है। भारत के संविधान द्वारा बाईस भाषाओं को मान्यता प्राप्त है। इनमें जनसंख्या, क्षेत्रीय विस्तार और बोलियों की संख्या की दृष्टि से हिंदी सब से

इस्लामिक संघर्ष: इतिहास और वर्तमान

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मध्यपूर्व और विशेष रूप से इराक और सीरिया में पिछले दो-तीन वर्षों से जबरदस्त लड़ाई चल रही है। ओसामा बिन लादेन का अलकायदा संगठन हमें पता था। बिन लादेन मारा गया, नया संगठन खड़ा हो गया, उसका नाम है इस्लामिक स्टेट ऑफ सीरिया एण्ड इराक अथात इसीस। इस इसीस में भर्

कश्मीरी पंडित : कश्मीर के आदि निवासी

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कश्मीर की मनोरम घाटी इस समय तन्हा हो गई है; मानो अच्छाइयां वहां से विदा हो चुकी हो। बर्बर आतंकवादियों ने पौराणिक काल से यहां बसे कश्मीरी पंडितों को उनके घरों से भगा दिया है, हजारों लोगों का क्रूरता से संहार किया है और कश्मीर के ५००० साल पुराने इतिहास और

जम्मू-कश्मीर में तीर्थ यात्रा का पुनर्जागरण

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सम्पूर्ण जम्मू-कश्मीर के भौगोलिक एवं सभ्यता की दृष्टि से वर्तमान में चार भाग हैं- जम्मू, कश्मीर, लद्दाख व पाक- अधिक्रांत कश्मीर। वैसे तो चीन-अधिक्रांत लद्दाख भी जम्मू-कश्मीर का एक भू-भाग है। इन सब क्षेत्रों की परिस्थितियां, रचना व समाज-जीवन भिन्न है। सम

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