लीसेस्टर-बर्मिंघम प्रकरण— घृणा का जनक कौन?

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इस त्रासदी के लिए वाम-उदारवादी किसे जिम्मेदार ठहराएंगे? हिंदुत्व, आरएसएस, भाजपा या मोदी? सच तो यह है कि बीते 1200 से अधिक वर्षों से समस्त विश्व 'काफिर-कुफ्र' अवधारणा से प्रेरित संकीर्ण मानसिकता का शिकार रहा है, जिसमें गैर-इस्लामी संस्कृति, परंपरा, पूजास्थलों और उनके मानबिंदुओं का कोई स्थान नहीं है। भारतीय उपमहाद्वीप और मध्यपूर्व एशिया के बाद यह विषैला वैचारिक-चिंतन अमेरिका और पश्चिमी देशों अपना विस्तार कर रहा है। लीसेस्टर-बर्मिंघल में जिहादियों का हिंदुओं पर हमला— इस श्रृंखला की एक सूक्ष्म कड़ी है। 

सपनों को साकार करने का संकल्प 

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भारत की संस्कृति भारत की धरती की उपज है। उसकी चेतना की देन है। साधना की पूंजी है। उसकी एकता, एकात्मता, विशालता, समन्वय धरती से निकला है। भारत में आसेतु-हिमालय एक संस्कृति है। उससे भारतीय राष्ट्र जीवन प्रेरित हुआ है। अनादिकाल से यहां का समाज अनेक सम्प्रदायों को उत्पन्न करके भी एक ही मूल से जीवन रस ग्रहण करता आया है। सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के एजेंडे को नरेंद्र मोदी इसी रूप में पूरा कर रहे हैं।

हिन्दू जागरण के सूत्रधार अशोक सिंहल

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1981 में डा. कर्णसिंह के नेतृत्व में दिल्ली में ‘विराट हिन्दू सम्मेलन’ हुआ; पर उसके पीछे शक्ति अशोकजी और संघ की थी। उसके बाद उन्हें ‘विश्व हिन्दू परिषद’ की जिम्मेदारी दे दी गयी। एकात्मता रथ यात्रा, संस्कृति रक्षा निधि, रामजानकी रथयात्रा, रामशिला पूजन, रामज्योति आदि कार्यक्रमों से परिषद का नाम सर्वत्र फैल गया।  अब परिषद के काम में बजरंग दल, परावर्तन, गाय, गंगा, सेवा, संस्कृत, एकल विद्यालय आदि कई नये आयाम जोड़े गयेे। श्रीराम जन्मभूमि आन्दोलन ने तो देश की सामाजिक और राजनीतिक दिशा ही बदल दी। वे परिषद के 1982 से 86 तक संयुक्त महामंत्री, 1995 तक महामंत्री, 2005 तक कार्याध्यक्ष, 2011 तक अध्यक्ष और फिर संरक्षक रहे।

श्रीरामजन्मभूमि आन्दोलन के सारथी अशोक सिंघल  

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पांच शताब्दियों से चल रही श्री राम जन्मभूमि मुक्ति की लड़ाई 1984 में अशोक जी सहित  महान  संतों के  के नेतृत्व श्रीरामजन्मभूमि मुक्ति आंदोलन के साथ पुनः प्रारंभ हुयी और 1990 में कारसेवकों का नृशंस हत्याकांड झेलते हुए हुए 6 दिसंबर 1992 को विवादित ढांचे के विध्वंस और अस्थायी श्री राम लला मंदिर तक पहुँच गयी । यही श्री राम जन्मभूमि आन्दोलन का निर्णायक मोड़ और इस विषय पर हिन्दुओं की निर्णायक विजय सुनिश्चित करने का दिन था ।यह उन्हीं का प्रयास रहा कि अदालत ने 30 सितम्बर 2010 को हाइकोर्ट के तीन न्यायाधीशों  की खंडपीठ ने एक स्वर से उसी स्थान को श्रीरामजन्मभूमि माना । आज श्री राम जन्मभूमि पर भव्य मंदिर का  निर्माण प्रारंभ हो चुका है। यही स्वर्गीय अशोक जी स्वप्न  था ।  

देश का सबसे बड़ा भूमाफिया वक्फ बोर्ड

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वक्फ बोर्ड ने इतनी जमीन कब्जा कर ली है कि खुद को छोटा देश घोषित कर सकता है ! भारत की सेना के पास करीब 18 लाख एकड़ जमीन है रेलवे के पास करीब 12 लाख एकड़ में फैली हैं । और देश के सभी वक्फ बोर्डों के पास कुल 8 लाख एकड़ से ज्यादा जमीन हैं । मतलब जमीन के मामले में वक्फ बोर्ड सेना और  रेलवे के बाद तीसरे नंबर पर है । और यहां से जो पैसा आता है वो भारत में धर्मांतरण लव जिहाद के लिए इस्तेमाल होता है ।

काँग्रेस, वामपंथी, क्षेत्रियदल और आम आदमी पार्टी…

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2013 : फिर पहली बार उसको सरकार में लाने में समर्थन दिया.. 2015 , 2020 दिल्ली में टेक्टिकली पूरा वोट ट्रांसफर करवाया. 2022 : कैप्टेन को निकाल कर यही काम पंजाब में किया. अब यही काम गुजरात में कर रही है..गुजरात चुनाव में कांग्रेस एक दम से गायब हो गयी है... ये सब संयोग नहीं है..कांग्रेस को चलाने वाले NAC गैंग का ही प्रयोग है.. योगेंद्र यादव वापस अपने असली गैंग के पास जा चुके हैं..भूषण आज भी कूद कूद कर उन्ही के लिए माहौल बनाता है..

हैदराबाद की भारत में विलय की कहानी

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निज़ाम ने इस ‘मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुसलमीन (एमआईएम) नामक संगठन को कार्य दिया कि या तो हिंदुओं को तलवार की नोक पर मुसलमान बनाओ या फिर इस्लाम स्वीकार नहीं करने पर मौत के घाट उतार दो ताकि जनमत संग्रह की स्थिति में हिन्दू भारत में विलय के पक्ष में आवश्यक संख्या बल खो दें । निज़ाम का यह आतंकवादी संगठन निर्बाध रूप से अपने कार्य को अंजाम तक पहुँचाने में जुट गया। भारी संख्या में हिंदुओं को मार दिया गया और प्रताड़ित होकर बहुतों ने इस्लाम स्वीकार कर लिया। हैदराबाद में व्यापक स्तर पर भारत-विरोधी गतिविधियां चल रही थीं, पाकिस्तान द्वारा भारी-मात्रा में गोला-बारूद वहां भेजा जा रहा था और भारत में विलय के पक्षधर हिंदू जनता की रजाकार सेनाओं द्वारा हत्‍याएं की जा रही थीं और बाहर से मुसलमानों को लाकर हैदराबाद में बसाया जा रहा था। इन सबको देखते हुए 12 सितंबर 1948 को कैबिनेट की एक अहम बैठक हुई जिसमें नेहरू और पटेल के साथ उस समय भारतीय सेना के सभी बड़े अफसर मौजूद थे। भारत ने 13 सितम्बर 1948 को हैदराबाद को भारत में विलय करने के लिए ऑपरेशन पोलो शुरू किया। 5 दिन युद्ध हुआ, जिसके अंत में रजाकार और निजाम के सैनिक गीदड़ की तरह भाग खड़े हुए। भारत की विजय हुई और 17 सितम्बर 1948 को हैदराबाद का भारत मे विलय हो गया।

पेरियार जैसों को नास्तिक समझना एक भूल

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कृष्णमूर्ति ने अपनी किताब में बताया कि एक बार दक्षिण भारत के कुछ लोग जो एक राजनीतिक मूवमेंट से जुड़े हुए थे संभवतः वह पेरियारवादियों की ओर ही इशारा कर रहे थे उन्होंने कहा कि एक बार उसी पॉलीटिकल मूवमेंट से जुड़े एक व्यक्ति उनके पास आया और जे कृष्णमूर्ति से पूछा कि आप ईश्वर पर विश्वास करते हैं तो जे कृष्णमूर्ति ने कहा नहीं जे कृष्णमूर्ति का जवाब सुनते ही वह व्यक्ति उग्र होकर देवी देवताओं को गाली देने लगा अब जे कृष्णमूर्ति ने उस व्यक्ति से कहा कि वास्तव में आप नास्तिक नहीं एक विक्षिप्त मनोरोगी हैं क्योंकि अगर आप ईश्वर को मान ही नहीं रहे हैं, आप राम कृष्ण के अस्तित्व को मानते ही नहीं हैं तो आप राम और कृष्ण से नफरत कैसे कर सकते हैं मतलब कि क्या कोई व्यक्ति काल्पनिक चरित्रों से नफरत कर सकता है

विश्वकर्मा: अखिल विश्व के कर्ताधर्ता

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हे सुव्रत ! सुनिए, शिल्पकर्म (इसमें हजार से अधिक प्रकार के अभियांत्रिकी और उत्पादन कर्म आएंगे) निश्चित ही लोकों का उपकार करने वाला है। शारीरिक श्रमपूर्वक धनार्जन करना पुण्य कहा जाता है। उसका उल्लंघन करना ही पाप है, अर्थात् बिना परिश्रम किये भोजन करना ही पाप है। यह व्यवस्था सामान्य है, विशेष में यही है कि धर्मशास्त्र की आज्ञानुसार किये गए कर्म का फल पुण्य है और इसके विपरीत किये गए कर्म का फल पाप है। यही कारण है कि संत रैदास को नानाविध भय और प्रलोभन दिए जाने पर भी उन्होंने धर्मपरायणता नहीं छोड़ी, अपितु धर्मनिष्ठ बने रहे। लेखक ने जो पुस्तक की समीक्षा लिखी है वह अत्यंत तार्किक और गहन तुलनात्मक शोध का परिणाम है जिसका दूरगामी प्रभाव होगा। उचित मार्गदर्शन के अभाव में, धनलोलुपता में अथवा आर्ष ग्रंथों को न समझने के कारण आज के अभिनव नव बौद्ध और मूर्खजन की स्थिति और भी चिंतनीय है। वामपंथ और ईसाईयत में घोर शत्रुता रही, अंबेडकर इस्लाम के कटु आलोचक रहे और साथ इस इस्लाम और ईसाइयों के रक्तरंजित युद्ध अनेकों बार हुए हैं, किन्तु वामपंथ, ईसाईयत, इस्लाम एवं शास्त्रविषयक अज्ञानता, ये चारों आज एक साथ सनातनी सिद्धांतों के विरुद्ध खड़े हो गए हैं। 

विश्‍वकर्मा और उनके शास्‍त्र

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उत्तरबौद्धकाल से ही शिल्‍पकारों के लिए वर्धकी या वढ्ढकी संज्ञा का प्रयोग होता आया है। 'मिलिन्‍दपन्‍हो' में वर्णित शिल्‍पों में वढ्ढकी के योगदान और कामकाज की सुंदर चर्चा आई है जो नक्‍शा बनाकर नगर नियोजन का कार्य करते थे। यह बहुत प्रामाणिक संदर्भ है, इसी के आसपास सौंदरानंद महाकाव्य, हरिवंश (महाभारत खिल) आदि में भी अष्‍टाष्‍टपद यानी चौंसठपद वास्‍तु पूर्वक कपिलवस्‍तु और द्वारका के न्‍यास का संदर्भ आया है। हरिवंश, ब्रह्मवैवर्त, मत्स्य आदि पुराणों में वास्‍तु के देवता के रूप में विश्‍वकर्मा का स्‍मरण किया गया है...।

मदरसा सर्वेक्षण पर इतनी हायतौबा क्यों ?

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उत्तर प्रदेश में अवैध मदरसों की फसल लहलहा रही है। श्रावस्ती जिले में 62 किमी सीमा नो मैंस लैंड से मिलती है । इस सीमा पर अवैध रूप से गांव बस गये हैं और अवैध मदरसे भी संचालित हो रहे हैं लेकिन खुफिया एजेंसियों व सुरक्षा बलों के अफसर भी कुछ कहने की स्थिति में नहीं हैं। अमेठी में चारागाह की जमीन पर बना अवैध मदरसा बुलडोजर से ध्वस्त किया गया है। अनेक मदरसो में अवैध गतिविधियां चलती रहती हैं जिनका समय- समय पर खुलासा होता रहता है। नेपाल सीमा से सटे क्षेत्रों मे अवैध मदरसों की बाढ़ आ गई जहां पर पता चला है कि मदरसों में छात्र तो भारतीय हैं लेकिन उनको पढ़ाने वाले शिक्षक  नेपाल से आते हैं जिनका कोई विवरण नहीं मिला।  मदरसों में आज भी औरंगजेब के समय की कटटर तालीम दी जा रही है। प्रदेश के कई मदरसें में आतंकवादी पकड़े गये हैं। मदरसों के कई मौलाना दुराचार जैसी वारदातों में संलिप्त पाये गये हैं। 

हैदराबाद निजाम भारत का शत्रु – बाबासाहेब अंबेडकर

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डॉ. अंबेडकर कहते हैं कि भारतीय रियासतों में राजनीतिक सुधारों के प्रति मुस्लिम नेताओं का रुख यह दर्शाता है कि मुस्लिम राजनीति किस तरह विकृत हो गई है। वे आगे लिखते हैं, "मुसलमानों और उनके नेताओं ने कश्मीर के हिंदू राज्य मे प्रतिनिधि सरकार की स्थापना के लिए प्रचंड आंदोलन चलाया था। वे ही मुसलमान और वे ही नेता अन्य मुस्लिम रियासतों में प्रतिनिधि सरकारों की व्यवस्था लागू किए जाने के घोर विरोधी हैं। इस विचित्र रवैये का कारण बड़ा सीधा सा है। हर मामले में मुसलमानों के लिए निर्णायक प्रश्न यही है कि उसका हिंदुओं की तुलना में मुसलमानों पर क्या प्रभाव पड़ेगा। यदि प्रतिनिधि सरकार से मुसलमानों को सहायता मिली हो, तो वे उसकी मांग करेंगे और उसके लिए संघर्ष भी करेंगे। कश्मीर रियासत में शासक हिंदू हैं, किंतु प्रजाजनों में बहुसंख्यक मुसलमान हैं। मुसलमानों ने कश्मीर में प्रतिनिधि सरकार के लिए संघर्ष इसलिए किया, क्योंकि कश्मीर में प्रतिनिधि सरकार से तात्पर्य है हिंदू राज्य से मुस्लिम अवाम के लिए सत्ता का हस्तांतरण। अन्य मुस्लिम रियासतों में शासक मुसलमान, परंतु अधिसंख्य प्रजा हिंदू है। ऐसी रियासतों में प्रतिनिधि सरकार का तात्पर्य होगा मुस्लिम शासक से सत्ता का हिंदू प्रजा को हस्तांतरण।

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