उद्धवा..... मी वरून पाहतोय… आणि माझ्या शिवसैनिकांच्या चेहऱ्यावरची निराशा मला अस्वस्थ करतेय. मी वरून पाहतोय. आजही माझी नजर मुंबईवर...
फिल्म सिंघम का एक संवाद है, "जयकांत शिकरे, यह गांव मेरा है और मैं इस गांव का! लगता है-...
आज का महानगरीय मतदाता भावनात्मक नारों से ज्यादा सेवा, सुविधाएं और स्थिरता देख रहा था। सड़कें, पानी, यातायात, भ्रष्टाचारमुक्त प्रशासन...
वेनेज़ुएला से ताइवान तक दुनिया में कहीं भी कुछ भी झंझट होता रहे, अमेरिका से ट्रम्प कुछ भी बकवास करता...
राज ठाकरे ने ऐसा ही एक सवाल पूछा: 'वाढवण बंदर बना, वह जरूरत थी, यह मैं समझ सकता हूं। लेकिन...
संसद में संवाद से समाधान खोजा जाना चाहिए, किंतु कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने जिस तरह से सड़क पर घमासान...
एसआईआर के विरोध में विपक्षी दलों की आलोचनाएं एवं ‘वोट चोरी’ और ‘नाम कटना’ जैसे आरोपों में तथ्य-सत्य नहीं है।...
इतिहास का सबक स्पष्ट है, जो राष्ट्र अपनी संस्थाओं को बिकाऊ नहीं बनने देते, वही संप्रभु रहते हैं। जो समाज...
बीजेपी नेतृत्व का मानना है कि आने वाले चुनावी दौर में वही संगठन प्रभावी होगा, जिसकी कमान सक्रिय, तकनीकी रूप...
राजनीति में वही टिका रहता है, जो आने वाली पीढ़ी की आशाएं-आकांक्षाएं क्या हैं, इसे अच्छी तरह समझता है। उनकी...
आज मुंबईकर यह सोचने लगा है कि अगर भाजपा को महानगरपालिका की सत्ता मिलती है, तो क्या बदलाव संभव है?...
भारत के लोकतांत्रिक इतिहास में कुछ व्यक्तित्व केवल सत्ता का संचालन नहीं करते, वे राजनीति को नैतिक गरिमा, वैचारिक उजास...
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