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राहुल गांधी की देश को लेकर भविष्यवाणी, देश में आने वाला है एक और खतरा

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राहुल गांधी ने देश में कोराना के अलावा एक और खतरे से सभी को आगाह किया है राहुल गांधी ने कहा कि फिलहाल में देश कोरोनावायरस से लड़ रहा है लेकिन जल्द ही देश को एक और परेशानी से जूझना पड़ेगा।

ज्योतिरादित्य सिंधिया का मध्य प्रदेश में जोरदार स्वागत, बीजेपी मुख्यालय पर बोले “मैं खुद को बीजेपी को सौंपता हूं”

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ज्योतिरादित्य सिंधिया के इस्तीफे के बाद अब मध्य प्रदेश में कांग्रेस की सरकार अल्पमत में आ चुकी है क्योंकि ज्योतिरादित्य के साथ साथ 22 और विधायकों ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। ज्योतिरादित्य के बीजेपी में शामिल होने के बाद ऐसे कयास लगाए जा रहे है कि मध्य प्रदेश में फिर से बीजेपी की सरकार बन सकती है।

दंगा करने वालों को हम पाताल से भी ढूंढ निकालेंगे: अमित शाह

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आप को बतादें कि सरकार के पास एक ऐसा सॉफ्टवेयर है जो चेहरे देखकर उसकी डिटेल्स बता देता है और इसी के माध्यम से सरकार को दंगाइयों की गिरफ्तारी करने में आसानी हो रही है। इसी सॉफ्टवेयर के द्वारा दंगे में शामिल लोगों की जानकारी पुलिस को मिल रही है और एक एक कर सभी को गिरफ्तार किया जा रहा है।  

ज्योतिरादित्य सिंधिया आज बीजेपी में हो सकते हैं शामिल

ज्योतिरादित्य सिंधिया आज बीजेपी में हो सकते हैं शामिल
Congress Leaders Jyotiraditya Scindia at a party press conference in the capital New Delhi on tuesday. Express Photo by Tashi Tobgyal New Delhi 160517 *** Local Caption *** Congress Leaders Jyotiraditya Scindia at a party press conference in the capital New Delhi on tuesday. Express Photo by Tashi Tobgyal New Delhi 160517
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आज दोपहर तक ज्योतिरादित्य सिंधिया के बीजेपी में शामिल होने की भी खबरें आ रही हैं। हालांकि इस पर अभी पार्टी की तरफ से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। हालांकि यह पहली बार नहीं है इससे पहले भी सिंधिया के बीजेपी में शामिल होने की खबरें कई बार आ चुकी हैं लेकिन हाल ही में सिंधिया का अमित शाह से मिलना इस बात को और सुनिश्चित करता है कि अब वह समय आ चुका है जब सिंधिया बीजेपी में शामिल होकर ही रहेंगे.

मध्य प्रदेश में सिंधिया की वजह से जायेगी कांग्रेस की सत्ता? एमपी कांग्रेस के 16 विधायक राज्य से बाहर

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कांग्रेस नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया काफी समय से बीजेपी के बड़े नेताओ के संपर्क में है जिससे पार्टी की परेशानी और भी बढ़ चुकी है इससे पहले सिंधिया के बीजेपी में शामिल होने की खबर आ चुकी है हालांकि अभी तक सिंधिया ने इस पर कभी खुल कर बात नहीं है।

केजरीवाल जीते नहीं, जिताए गए!

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केजरीवाल को जिताने में कांग्रेस, शहरी नक्सली और वामपंथी सफल रहे हैं। मीडिया और मुसलमान भी आप के पक्ष में चले गए। ऐसे कई कारण गिनाए जा सकते हैं। भाजपा को अब उसकी रणनीति पर मंथन करना होगा।

भाजपा नेतृत्व आत्मपरीक्षण करे

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हाल के दिल्ली विधान सभा चुनावों में भाजपा को करारी हार झेलनी पड़ी। भाजपा के विकास से भटक कर राष्ट्रीय मुद्दों की ओर बढ़ जाने का शायद यह परिणाम हो सकता है। अब तक पांच राज्य भाजपा गंवा चुकी है और अन्य पांच राज्यों में शीघ्र चुनाव होने हैं। यह भाजपा नेतृत्व के लिए आत्मपरीक्षण की घड़ी है।

साधो ये जग बौराना

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अचानक मां दहाड़ मार कर रो दी, क्योंकि उसके कुछ और बच्चों ने मौत को गले लगा लिया था। हमारी जेब में तीन फोन थे, एक लैफ्ट का, एक राइट का, एक लैफ्टाइट का। तीनों बज रहे थे। उस मां की आंखों के आंसू न जाने कैसे हमारी आंखों तक पहुंच गए। ‘साधो ये जग बौराना” कहकर रोते हुए हम उस मां के चरणों में झुक गए...

भाजपा की व्यूह  रचना धरी की धरी रह गई

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मेरठ कॉलेज से पढ़ाई पूरी कर 1970 में जीविकोपार्जन के लिए जब दिल्ली पहुंचा तब दिल्ली के राजनितिक क्षितिज पर महापौर लाला हंसराज गुप्त, चीफ मेट्रोपोलिटन काउंसिलर विजय कुमार मल्होत्रा, बलराज साहनी और मदनलाल खुराना जैसे भारतीय जनसंघ के नेता तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के सशक्त नेतृत्व को सफल चुनौती दे रहे थे।

राजनीतिक शुचिता के पुरोधा पं. दीनदयाल उपाध्याय

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पं. दीनदयाल के लिए राजनीतिक अस्तित्व से अधिक राजनीतिक शुचिता और अस्मिता की चिंता जीवन पर्यन्त रही और उन्होंने सीना ठोंककर उसे सफलीभूत किया, क्योंकि उनके लिए सिद्धांत अमूल्य थे, राजनीति उनके लिए सफलता-विफलता का दर्पण नहीं थी। पंडितजी के इस जन्मशती वर्ष पर

नागरिकता कानून विरोध की राजनीति?

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नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ देशभर में हुए हिंसक आंदोलन मोदी सरकार के खिलाफ एक सुनियोजित साजिश थी। कुत्सित राजनीति के हथियार के तौर पर विरोध के अधिकार का खतरनाक इस्तेमाल किया गया। इसे समझना जरूरी है।

जेएनयू पूरा देश नहीं

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सोशल मीडिया और नागरिक पत्रकारिता के कारण यह सच सभी के सामने आ रहा है कि सीएए के समर्थन करने वालों की संख्या अत्यधिक है और जेएनयू में जो हो रहा है वह दिखावा मात्र है। जेएनयू पूरा देश नहीं है।

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