आओ! जीवन का विश्वास जगाएं

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अमेरिका के लास वेगास में जो नरसंहार हुआ वह सिहरन पैदा करता है। इक्कीसवीं सदी के दूसरे दशक का उत्तरार्द्ध हमें सचेत कर रहा है कि अब भी समय है कि हम इस भस्मासुरी प्रवृत्ति से बचें और सनातन जीवन मूल्यों को आत्मसात करते हुए विज्ञान और टेक्नालाजी से प्राप्त सुविधाओं और संपन्नता का सम्यक तथा संतुलित उपयोग और उपभोग करें। पिछले दिनों एक दिल दहला देने वाला समाचार दुनिया के सब से समृद्ध और सभ्य कहे जाने वाले देश अमेरिका से आया। वहां के एक शहर लास वेगास में एक संगीत समारोह चल रहा था। १४०००० लोग उस समारोह का आनंद

चलो केरल! अ.भा.वि.प. का अभियान

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केरल में कम्युनिस्टों की राजनीतिक हिंसा से पीड़ित परिवारों को संबल प्रदान करने के लिए अ.भा.विद्यार्थी परिषद की ओर से आगामी ११ नवम्बर को ‘चलो केरल!’ अभियान का आयोजन किया जा रहा है। इसमें देशभर से छात्र शामिल होंगे। यह अभूतपूर्व व ऐतिहासिक होगा। प्रस्तुत है इस अभियान का विवरण और संघ स्वयंसेवकों पर माकपा के हमलों की कारण मीमांसा... हाल ही में ३ सितम्बर को जब १०.३० बजे टी.वी. पर केन्द्र में बनने वाले मंत्रियों का शपथ ग्रहण समारोह देख रहा था, सब के परिचय में उनके जीवन की किसी बड़ी उपलब्धि का उल्ल

मर्केल की मरियल जीत

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जर्मनी में लम्बे समय बाद कट्टर दक्षिणपंथी पार्टी का उभरना और एंजेला मर्केल की पार्टी का मतदान प्रतिशत घट जाना भविष्य के बदलाव की ओर इंगित कर रहे हैं। सीरियाई शरणार्थियों को अपने यहां जगह देना मर्केल को महंगा पड़ा है। इससे जर्मनी की अर्थव्यवस्था पर भी असर पड़ रहा है।   २४ सितंबर २०१७ को जर्मनी में संपन्न संसदीय चुनाव एक मोड़ लेकर आया है। मौजूदा चांसलर एंजेला मर्केल को लगातार चौथी बार जीत तो जरूर मिली है, लेकिन घुर दक्षिणपंथी पार्टी ऑल्टरनेटिव फॉर जर्मनी (एएफडी) संसद में दमदार अंदाज में पहुंची है और च

जीएसटी आम आदमी के लिए बहुत अच्छा

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विरोध करने वाले भले बदलावों को जीएसटी की अधूरी तैयारी का नाम देते रहें, लेकिन कर का पूरा ढांचा ही बदल देने वाली प्रणाली को सुचारु होने में कुछ महीने तो लगेंगे ही। दीर्घावधि में जीएसटी सब के लिए लाभप्रद ही होगा। पिछले करीब आठ महीने से देश भर में जो भी नाम सुर्खियों में रहे हैं, उनमें जीएसटी काफी आगे है। जीएसटी यानी वस्तु एवं सेवा कर आजादी के बाद का सब से बड़ा कर सुधार है, जिसे लागू करने के लिए सरकारों को बहुत मशक्कत भी करनी पड़ी है। वास्तव में यह क्रांतिकारी कदम है, इसलिए इसका जम कर समर्थन भी किया जा रहा

२०१९ का चुनाव जीतने के लिए…

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२०१४ और २०१९ में बहुत फर्क है। भाजपा कार्यकर्ताओं को इसे समझना होगा। केवल पार्टी कार्यालय में बैठ कर यहां-वहां की बातें करना और चाय की प्यालियों पर प्यालियां समाप्त करना, इस सब से कुछ नहीं होने वाला। जनता के दर पर जाकर उनके प्रेम की चाय पीना ज्यादा आवश्यक है। इस दिवास्वप्न में न रहें कि हमारे सभी विरोधी कमजोर हैं और हमें कोई प्रतिद्वंद्वी नहीं बचा है।  भारतीय जनता पार्टी को २०१९ का चुनाव जीतने के लिए क्या करना चाहिए और क्या नहीं, यह बताने का साहस मैं नहीं करूंगा। न वह मेरा अधिकार है, न ही मैं उसका विश

कागज पर हस्ताक्षर

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दोनों को देख लोग कुछ कहें इसके पहले ही गौरव बोल पड़ा, ‘आज मैं और साक्षी कोर्ट में जाकर शादी के बंधन में बंध गए। हम पति-पत्नी आप सभी को डिनर पार्टी में आमंत्रित कर रहे हैं। विश्वास है आप सभी हम लोगों को आशीर्वाद देने रीगल होटल में जरूर आएंगे।’  हाथों की मेंहदी अभी छूटने भी नहीं पाई थी कि जिसने अग्नि को साक्षी मान कर उसका हाथ थामा था, उसे राह में भटकने के लिए बीच में छोड़ कर सदा-सदा के लिए दूर चला गया। हादसे से घायल साक्षी को सभी ने धैर्य रखने की सलाह तो दी पर कोई भी उसका हम सफर बनने को सामने

सफाई, कचरा प्रबंधन और वैज्ञानिक ड्रेनेज

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यह एक कड़वी सच्चाई है कि स्वतंत्रता के बाद से अब तक सफाई, स्वास्थ्य, कचरे का प्रबंधन, वैज्ञानिक ड्रेनेज जैसी बातें किसी भी सरकार के एजेंडे पर या प्राथमिकता पर नहीं रहीं। न किसी केंद्र सरकार के, न किसी राज्य सरकार के। लिहाजा, केंद्र की मोदी सरकार जरूर कचरे और स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ी है। बारिश के मौसम में हम कई खतरनाक बीमारियों को बढ़ते हुए देख रहे हैं। जैसे एंसेफेलाइटिस, डेंगू, चिकनगुनिया, मलेरिया, स्वाइन फ्लू आदि। हर साल बारिश के शुरू होते ही इनके फैलने की खबरें आने लगती हैं। साथ ही इन बीमारियों

भारत कोई धर्मशाला नहीं…

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म्यांमार से अवैध रूप से घुस आए रोहिंग्या भारतीय सुरक्षा व सामाजिक तानेबाने के लिए खतरा बने हुए हैं। इसलिए आम भारतीय मुस्लिमों को शाही इमाम जैसे नेताओं के झांसे में आकर आतंकियों के सहयोगी बन रहे रोहिंग्याइयों को भारत में बसाने की मांग नहीं करनी चाहिए व एक देशभक्त भारतीय होने का परिचय देना चाहिए। केंद्र की भाजपानीत सरकार को देश के कथित बुद्धिजीवी, सहिष्णुतावादी इस समय रोहिंग्या विषय में नए सिरे से बदनाम कर रहे हैं। रोहिंग्याइयों को शरण न देने के संदर्भ में कहा जा रहा है कि भारत की अतिथि देवो भवः की परम्प

संवाद

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निरंतर संवाद एक मनोवैज्ञानिक चिकित्सा के समान है जो लोगों को अकेलेपन और नैराश्य से दूर रखता है। ...संवाद मानसिक संबल प्रदान करने के साथ-साथ सुरक्षा भी प्रदान करता है। इससे समाज में होने वाली कई दुखद घटनाओं को रोका जा सकता है। कुछ समय पहले सोशल मीडिया पर एक वीडियो देखा। पति-पत्नी दोनों एक ही दफ्तर में कार्यरत हैं। दिन के लगभग ८-९ घंटे एकसाथ बिताते हैं। काम के प्रति दोनों की आस्था और दोनों का तालमेल बहुत अच्छा है। कोई भी नया प्रोजेक्ट शुरू करने के पहले एक दूसरे के विचारों को सुनना, क्या नया किया जा सकता

गुड टच, बैड टच

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स्कूलों में छोटे बच्चों को लेकर जो घिनौनी घटनाएं सामने आ रही हैं उससे लगता है कि उन्हें इस अबोध उम्र में भी ‘गुड टच, बैड टच’ समझाने की जरूरत है। स्कूलों को यह भूमिका निभानी होगी, जबकि अभिभावकों को बच्चों की हरकतों आदि पर बारीकी से नजर रखनी होगी ताकि भविष्य के संकट को टाला जा सके।   विद्यालय में प्रद्युम्न नामक बच्चे की हत्या और पांच साल की एक बच्ची का उसके ही स्कूल में रेप!- मन विचलित हुआ न, सभी माता-पिता का? डर लगने लगा होगा। मन और आत्मा झकझोर गई होगी और इन बच्चों की जगह अपने बच्चों क

नोटबंदी, जीएसटी, रेरा का महागठबंधन

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नोटबंदी, रेरा, जीएसटी को लागू करने के फैसले सही थे, लेकिन सभी फैसलों का समय गलत था या फिर समय सही था तो उसका नियोजन सही नहीं था। भारतीय इतने तीव्रता से लिए गए फैसलों के आदी नहीं है।   भाजपा ने केंद्र में अपनी सरकार २०१४ में शासित की। उसका केंद्र में आना लोगों के लिए एक नई उम्मीद की किरण थी। अच्छे दिन का वादा उनके चुनाव का मुख्य नारा था। लोग भी उनके इसी चुनाव प्रचार से प्रभावित हुए थे। आम जनता भ्रष्टाचार देख देख कर त्रस्त हो गई थी। वे ऐसे कुछ की उम्मीद लगाए थे, जिससे आतंकवाद, भ्रष्टाचार और बढ़ती हु

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