बड़े लक्ष्य और आम आदमी का सरोकार

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वर्तमान वर्ष के बजट में हमने जीडीपी में लम्बी छलांग लगाने समेत कई बड़े लक्ष्य रखे हैं। लेकिन आम आदमी के सरोकारों पर भी गौर करना होगा। यदि उसकी क्रय शक्ति न बढ़ी तो सारे प्रयास व्यर्थ हो जाएंगे। हालांकि, मोदी सरकार के आत्मविश्वास की स्पष्ट झलक बजट में दिखाई देती है। 

विदेशी छात्रों के लिए भारत में पढ़ाई की पहल

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  वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में साल 2019-20 का बही-खाता पेश करते हुए स्टडी इन इंडिया‘ यानी ‘भारत में शिक्षा‘  योजना शुरू करने का अहम् निर्णय लिया है। इस योजना का उद्देश्य भारत में उच्च विज्ञान व तकनीकि शिक्षा का ऐसा अंतरराष्ट्रीय माहौल बनाना है, जिससे विदेशी छात्र भारत में पढ़ने के लिए लालायित हों। इस गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए 400 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है।

किसानों और नौकरी पेशा लोगों पर केंद्रित बजट

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अंतरिम बजट में किसानों को अधिकतम लाभ देने की कोशिश की गई है। मनरेगा के लिये 2019-20 में 60,000 करोड़ रुपये आवंटित करने की घोषणा की गई है। मनरेगा का शुरू से ही रोजगार पैदा करने एवं देश के समावेशी विकास को सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण योगदान रहा है। प्रधानमंत्री…

युवा उद्योगपति एवं भारत का महाशक्ति बनने का सपना

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भारत को महाशक्ति बनना है तो आने वाले 20 से 30 वर्षों तक एक निश्चित नीति के अतंर्गत काम करना होगा। सरकारी नेतृत्व और  राजनीतिक इच्छाशक्ति की इसमें बहुत महत्वपूर्ण भूमिका होगी। शिक्षा नीति आमूल बदलनी होगी; ताकि राष्ट्र व राष्ट्रप्रेम से नई पीढ़ी ओतप्रोत रहे।

पर्यटन उद्योग के विकास में तेजी

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पर्यटन में साधनों के विकास के साथ तेजी से इजाफा हो रहा है। आज देश के जीडीपी में पर्यटन उद्योग की भागीदारी लगभग साढ़े नौ प्रतिशत है। इससे नए-नए रोजगार उपलब्ध हो रहे हैं। ‘उड़ान’ जैसी नई योजना के अंतर्गत देश के छोटे हवाई अड्डों का विकास किया जा रहा है, जिससे देश में आंतरिक हवाई सफर आम नागरिकों की पहुंच में आ गया है।

बैंकिंग क्षेत्र की विकास यात्रा-अतीत, वर्तमान एवं भविष्य

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भारतीय बैंकिंग क्षेत्र की गौरवशाली परम्परा रही है; लेकिन वर्तमान में वह कठिन दौर से गुजर रहा है। सरकारी बैंकों में फंसे हुए कर्ज की समस्या विकराल है। डिजिटलाइजेशन के साथ धोखाधड़ी की घटनाएं भी बढ़ गई हैं। बैंकों के पास पूंजी की उपलब्धता घट गई है, जिसका अर्थव्यवस्था पर असर हो रहा है। सरकार ने बैंकों को उबारने के लिए इंद्रधनुष नाम से योजना बनाई है, लेकिन संकट कई गुना गहरा है।

बुनियादी ढांचे की विकास यात्रा

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केंद्रीय बजट 2018 ने भारतीय अर्थव्यवस्था के विकास के प्रमुख माध्यम के रूप में बुनियादी ढांचा क्षेत्र की पहचान की है। बजट में आधारभूत संरचना प्रावधान जीडीपी में वृद्धि, कनेक्टिविटी को मजबूत करने, विशेष रूप से सीमावर्ती क्षेत्रों को मुख्य भूमि से जोड़ने के लिए महत्वपूर्ण हैं।

नया विधेयक, बैंक ग्राहक और जमापूंजी

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नये वित्तीय विधेयक की धारा ५२ के प्रावधानों को लेकर आम लोगों में बेचैनी है. इसमें प्रावधान है कि नया निगम चाहे तो जमाकर्ताओं की सारी जमापूंजी डकार सकता है. इससे न्यूनतम एक लाख रु. की बीमाकृत सुरक्षित राशि भी देने से इनकार कर सकता है. यह तो दिनदहाड़े डकैती हुई, जिसे रोकना सरकार का कर्तव्य है. लोगों में सरकार के प्रति विश्वास का माहौल पैदा होना चाहिए, संदेह का नहीं.

जीएसटी आम आदमी के लिए बहुत अच्छा

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विरोध करने वाले भले बदलावों को जीएसटी की अधूरी तैयारी का नाम देते रहें, लेकिन कर का पूरा ढांचा ही बदल देने वाली प्रणाली को सुचारु होने में कुछ महीने तो लगेंगे ही। दीर्घावधि में जीएसटी सब के लिए लाभप्रद ही होगा। पिछले करीब आठ महीने से देश भर में जो भी नाम सुर्खियों में रहे हैं, उनमें जीएसटी काफी आगे है। जीएसटी यानी वस्तु एवं सेवा कर आजादी के बाद का सब से बड़ा कर सुधार है, जिसे लागू करने के लिए सरकारों को बहुत मशक्कत भी करनी पड़ी है। वास्तव में यह क्रांतिकारी कदम है, इसलिए इसका जम कर समर्थन भी किया जा रहा

नोटबंदी, जीएसटी, रेरा का महागठबंधन

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नोटबंदी, रेरा, जीएसटी को लागू करने के फैसले सही थे, लेकिन सभी फैसलों का समय गलत था या फिर समय सही था तो उसका नियोजन सही नहीं था। भारतीय इतने तीव्रता से लिए गए फैसलों के आदी नहीं है।   भाजपा ने केंद्र में अपनी सरकार २०१४ में शासित की। उसका केंद्र में आना लोगों के लिए एक नई उम्मीद की किरण थी। अच्छे दिन का वादा उनके चुनाव का मुख्य नारा था। लोग भी उनके इसी चुनाव प्रचार से प्रभावित हुए थे। आम जनता भ्रष्टाचार देख देख कर त्रस्त हो गई थी। वे ऐसे कुछ की उम्मीद लगाए थे, जिससे आतंकवाद, भ्रष्टाचार और बढ़ती हु

उद्योग केंद्रित नीतियों की आवश्यकता

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आर्थिक सुधारों की दृष्टि से नोटबंदी, जीएसटी, करवंचना रोकने और कैशलेस लेनदेन बढ़ाने जैसे कठोर उपाय एक ही कालखंड में आए और इससे समाज में हड़बड़ी का माहौल निर्माण हो गया। नए प्रश्न निर्माण हुए। इससे पार पाने के लिए उद्योग केंद्रित नीतियों की आवश्यकता है। औद्योगिक क्षेत्र में स्वस्थ स्पर्धा, विश्वास का माहौल और प्रशासनिक संस्कृति का निर्माण हो तो इन समस्याओं से निपटा जा सकेगा।   किसी भी समाज की सम्पन्नता में उद्योगों का महत्वपूर्ण योगदान होता है। व्यवसायी समाज की आवश्यकता को पहचान कर उसे पूरा करने के लि

कैसा होगा भविष्य का बैंकिंग?

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भविष्य का बैंकिंग पूरी तरह बदल चुका होगा। ग्राहकों के लिए विशिष्ट बैंकिंग अनुभव, जोखिमों और नियमों दोनों का बेहतर प्रबंधन, अत्याधुनिक तकनीक की मदद से गैर-बैंकिंग असंगठित संस्थाओं से प्रतिस्पर्धा करना, यही बैंकों का भविष्य है और तभी बैंक जीवित रह सकेंगे। हमारे बच्चे शायद किसी अलग तरह की बैंकिंग का अनुभव लेंगे। एक बात तो पक्की है कि बैंक शाखाओं का महत्व निकट भविष्य तक ही सीमित रहेगा। उसके बाद उनका महत्व बहुत हद तक कम हो जाएगा। भविष्य में बैंक शाखाएं बहुत अलग तरह की भूमिका अदा करेंगी। जैसे किसी पेचीदा माम

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